राम मंदिर चढ़ावा चोरी: महाघोटाले के 'मास्टरमाइंड्स' जेल में, फिर भी दागदार बैंक कर्मियों पर 'मेहरबान' क्यों है पुलिस?

Ram Mandir Offering Theft: 'Masterminds' of the massive scam are in jail, yet why is the police 'lenient' towards the tainted bank employees?

अयोध्या। आस्था के सबसे बड़े केंद्र प्रभु श्री राम के मंदिर में चढ़ावे की चोरी के मामले ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया है। जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ रही है, वैसे-वैसे पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े होने लगे हैं। विशेष जांच दल की प्रारंभिक रिपोर्ट में स्पष्ट रूप से बैंक कर्मियों की लापरवाही और संदिग्ध भूमिका को उजागर किया गया था, लेकिन इसके बावजूद पुलिस प्रशासन अब तक इन जिम्मेदार बैंक अधिकारियों और कर्मचारियों पर नरमी बरत रहा है। आखिर यह नरमी किसके इशारे पर और क्यों दिखाई जा रही है? यह सवाल अब अयोध्या से लेकर लखनऊ तक गूंजने लगा है।

मामले की तह में जाएं तो राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट और संबंधित बैंक के बीच बकायदा एक एमओयू  हुआ था। इस समझौते के तहत दान राशि की सुरक्षित गणना और उसकी कड़ी निगरानी करने की पूरी जिम्मेदारी बैंक प्रबंधन की थी। गणना स्थल पर बैंक के दो विशेष कर्मियों की नियमित ड्यूटी रहती थी, जिन्हें शक के दायरे में आने के बाद कुछ समय पहले हटाया भी गया था। हैरानी की बात यह है कि जब पूरी व्यवस्था को संभालना बैंक की जिम्मेदारी थी, तो पुलिस की कार्रवाई सिर्फ बैंक अधिकारियों से पूछताछ तक ही क्यों सिमट कर रह गई? बैंक भले ही अपने स्तर पर विभागीय जांच का ढोंग रच रहा हो, लेकिन पुलिस ने अब तक किसी भी जिम्मेदार बैंक कर्मी को आरोपी क्यों नहीं बनाया? यह ढीला रवैया पुलिस की मंशा पर साफ तौर पर सवालिया निशान लगाता है। इस महाघोटाले की आंच इतनी तेज थी कि ट्रस्ट के दो बड़े पदाधिकारियों को अपने पदों से इस्तीफा देना पड़ा। चंपत राय का करीबी टिन्नू यादव और गणना इंचार्ज सुभाष श्रीवास्तव समेत छह गणना कर्मी सलाखों के पीछे हैं। लेकिन चौंकाने वाली बात यह है कि गणना इंचार्ज के जेल जाने के बाद भी बैंक के उच्चाधिकारियों पर कोई कानूनी हंटर नहीं चला है। एसआईटी (SIT) और पुलिस की विवेचना में जो सीसीटीवी फुटेज सामने आए हैं, वे रोंगटे खड़े कर देने वाले हैं। महज 40 दिनों के भीतर इस शातिर गिरोह ने 70 बार राम लला के चढ़ावे पर हाथ साफ किया। गिरोह का दुस्साहस ऐसा था कि वे हर दिन औसतन दो बार और कभी-कभी तो दिन में तीन बार भी चोरी की वारदात को अंजाम देते थे। शातिर दिमाग अविनाश शुक्ला को चोरी की मुख्य जिम्मेदारी दी गई थी। सीसीटीवी फुटेज गवाह हैं कि वह अकेले 50 से अधिक बार रकम पार करते हुए कैमरे में कैद हुआ। जब अविनाश रकम पार करता था, तब मनीष और रमाशंकर उसे चारों तरफ से घेरकर खड़े हो जाते थे ताकि कैमरों या अन्य लोगों की नजर उस पर न पड़े। इन दोनों ने भी कई बार खुद रकम गायब की। रिमांड पर हुए खुलासे के मुताबिक, अनुकल्प और लवकुश मिश्रा यह तय करते थे कि किस समय और कैसे रकम को पार करना है। एसआईटी की जांच में अनुकल्प की भूमिका सबसे मुख्य पाई गई है।  इन चोरों को किसी का डर न रहे, यह सुनिश्चित करने का काम चंपत राय के करीबी टिन्नू यादव और गणना इंचार्ज सुभाष श्रीवास्तव का था। पुलिस ने जब मुख्य आरोपी अविनाश शुक्ला, अनुकल्प, लवकुश और करुणेश को रिमांड पर लेकर कड़ाई से पूछताछ की, तो इस नेक्सस का दायरा और बड़ा हो गया। सूत्रों के मुताबिक, आरोपियों ने पूछताछ में 8 से 10 और नए नामों का खुलासा किया है। पुलिस ने इनमें से पांच संदिग्धों को हिरासत में लेकर पूछताछ की है, जिनमें से एक-दो की भूमिका पर शक बेहद गहरा गया है। इनमें कई अन्य गणना कर्मी भी शामिल हैं। फिलहाल स्थिति यह है कि एसआईटी की विस्तृत और वैज्ञानिक जांच अपने अंतिम चरण में पहुंच चुकी है, जिसने पुख्ता सबूत जुटा लिए हैं। वहीं दूसरी ओर, स्थानीय पुलिस की विवेचना बेहद लंबी खींचती नजर आ रही है। जब सबूत साफ हैं, सीसीटीवी फुटेज गवाही दे रहे हैं, और एमओयू के तहत बैंक की जवाबदेही तय थी, तब भी बैंक कर्मियों को बचाना पुलिस की नीयत पर जनता के भरोसे को कमजोर कर रहा है। अब देखना यह है कि क्या पुलिस इन सफेदपोशों पर शिकंजा कसती है या फिर छोटे प्यादों को जेल भेजकर इतिश्री कर ली जाएगी।