राहुल गांधी का 'राजनीतिक ज्ञान शून्य': एंटी-इन्कंबेंसी और चुनावी आरोपों पर भाजपा का करारा पलटवार,सुधांशु त्रिवेदी ने पूछे तीखे सवाल
नई दिल्ली। कांग्रेस नेता राहुल गांधी द्वारा चुनावी व्यवस्था और 'एंटी-इन्कंबेंसी' (सत्ता विरोधी लहर) को लेकर दिए गए बयानों पर भारतीय जनता पार्टी ने तीखा हमला बोला है। भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता और राज्यसभा सांसद डॉ. सुधांशु त्रिवेदी ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान राहुल गांधी के दावों को बेबुनियाद बताते हुए उनके राजनीतिक ज्ञान पर गंभीर सवाल खड़े किए।
चुनावी प्रक्रिया, निर्वाचन आयोग और एंटी-इंकंबेंसी को लेकर कांग्रेस नेता राहुल गांधी के ताजा बयानों पर भारतीय जनता पार्टी ने पलटवार किया है। भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता और राज्यसभा सांसद सुधांशु त्रिवेदी ने राहुल गांधी द्वारा प्रेस कॉन्फ्रेंस में पेश किए गए तथ्यों और रिपोर्टों के स्रोत पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि जिन रिपोर्टों और आंकड़ों के आधार पर चुनाव व्यवस्था को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं, उनके स्रोत और प्रमाण स्पष्ट होने चाहिए। राहुल गांधी ने गुरुवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस में चुनाव प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठाते हुए निर्वाचन आयोग के कामकाज और विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) से जुड़े मुद्दे उठाए। उन्होंने दावा किया कि भारत में चुनावी प्रक्रिया को लेकर गंभीर सवाल खड़े हुए हैं। राहुल ने एंटी-इंकंबेंसी का उल्लेख करते हुए कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में सरकारों के खिलाफ समय के साथ असंतोष उभरता है और सवाल किया कि हाल के चुनावों में भाजपा के खिलाफ यह प्रवृत्ति दिखाई क्यों नहीं दे रही है। राहुल गांधी ने अपने तर्क के समर्थन में विभिन्न राज्यों के चुनावी रुझानों का उल्लेख किया और कहा कि पहले चुनावों में सत्ता परिवर्तन की प्रवृत्ति देखने को मिलती रही है। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा के संदर्भ में एंटी-इंकंबेंसी का प्रभाव उसी तरह क्यों नहीं दिखाई देता, जैसा अन्य राजनीतिक दलों के मामले में देखा गया है। इसके जवाब में सुधांशु त्रिवेदी ने कांग्रेस के राजनीतिक इतिहास का हवाला देते हुए एंटी-इंकंबेंसी के तर्क पर सवाल उठाया। उन्होंने तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल, बिहार, उत्तर प्रदेश और ओडिशा जैसे राज्यों का उदाहरण देते हुए कहा कि कई राज्यों में कांग्रेस लंबे समय से सत्ता में वापस नहीं आई है। भाजपा का तर्क है कि एंटी-इंकंबेंसी का प्रभाव किसी एक दल तक सीमित मानना भारतीय राजनीति की पूरी तस्वीर को नहीं दर्शाता। त्रिवेदी ने राहुल गांधी के प्रेस कॉन्फ्रेंस में इस्तेमाल किए गए प्रस्तुतीकरण और रिपोर्टों पर भी सवाल उठाया। उन्होंने पूछा कि जिन स्रोतों के आधार पर चुनाव प्रक्रिया को लेकर दावे किए जा रहे हैं, उनकी विश्वसनीयता और आधार क्या है। भाजपा नेता ने पुराने चुनावी दौर का उल्लेख करते हुए बूथ कैप्चरिंग, मतपेटियों की लूट और चुनावी हिंसा जैसी घटनाओं का भी जिक्र किया। उन्होंने दावा किया कि समय के साथ चुनाव प्रक्रिया में तकनीकी और निगरानी संबंधी बदलाव हुए हैं तथा सीसीटीवी समेत विभिन्न व्यवस्थाओं का इस्तेमाल बढ़ा है। वहीं राहुल गांधी का कहना है कि मतदाता का वोट लोकतांत्रिक व्यवस्था की बुनियाद है और चुनाव प्रक्रिया में किसी भी तरह की गड़बड़ी संविधान और संस्थाओं की विश्वसनीयता से जुड़ा विषय है। उन्होंने निर्वाचन आयोग से जुड़े सवालों पर मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग भी उठाई है। दोनों पक्षों के बयानों के बीच अब चुनाव प्रक्रिया, एसआईआर, निर्वाचन आयोग की भूमिका और एंटी-इंकंबेंसी को लेकर राजनीतिक बहस तेज हो गई है। इस विवाद में लगाए गए आरोपों और उनके आधार की स्वतंत्र पुष्टि का प्रश्न भी महत्वपूर्ण बना हुआ है।