‘बर्निंग बस’ का खौफनाक मंजरः 9 यात्रियों की मौत का जिम्मेदार कौन? धुआं उठा और बदबू आने लगी! फिर भी ड्राइवर ने नहीं रोकी बस, यात्री ने खोला हादसे का राज
ग्रेटर नोएडा। यमुना एक्सप्रेसवे के पास बुधवार देर रात चलती स्लीपर बस में आग लगने से बड़ा हादसा हो गया। जेवर थाना क्षेत्र में हुए इस दर्दनाक हादसे में बस के अंदर फंसे 9 यात्रियों की मौत हो गई, जबकि करीब 30 यात्रियों को पुलिस और रेस्क्यू टीम ने सुरक्षित बाहर निकाल लिया। हादसे के बाद अब बस में आग लगने से पहले की घटनाओं को लेकर बड़ा खुलासा हुआ है। बस में सवार एक यात्री ने पूरी घटना की जानकारी दी है। यात्री की शिकायत के आधार पर पुलिस ने मामले में एफआईआर दर्ज की है। सुनील कुमार के मुताबिक, हादसा रात करीब 11:30 बजे हुआ। उस समय बस में कुछ यात्री सो रहे थे, जबकि कई अन्य यात्री सोने की तैयारी कर रहे थे। इसी दौरान बस के अंदर अचानक धुआं और अजीब तरह की बदबू महसूस होने लगी। यात्रियों ने इसकी जानकारी बस चालक को दी और बस रोकने के लिए कहा। आरोप है कि ड्राइवर ने यात्रियों की बात को गंभीरता से नहीं लिया और बस चलाता रहा। यात्री का दावा है कि जब बस के अंदर धुआं तेजी से भरने लगा और आग फैलने लगी, तब जाकर बस को रोका गया। उनका आरोप है कि इस दौरान ड्राइवर और कंडक्टर मौके से भाग गए। देखते ही देखते बस के भीतर अफरा-तफरी मच गई और यात्रियों में चीख-पुकार शुरू हो गई। सुनील ने बताया कि हादसे के समय ड्राइवर गुटखा-पान और बीड़ी-सिगरेट पी रहा था। यात्रियों की ओर से बस रोकने की मांग किए जाने के बावजूद ड्राइवर ने कथित तौर पर उनकी बात नहीं मानी। सुनील के मुताबिक, यात्रियों की बात पर ड्राइवर के हंसने की आवाज भी सुनाई दे रही थी।
आग लगने के बाद बस में मौजूद यात्रियों ने खुद ही एक-दूसरे को बचाने की कोशिश शुरू कर दी। बस में आग बुझाने वाला सिलेंडर मौजूद था, लेकिन उससे आग पर काबू नहीं पाया जा सका। आग तेजी से फैलती चली गई। यात्री ने बताया कि उन्होंने फायर एक्सटिंग्विशर की मदद से बस की खिड़की का शीशा तोड़ने की कोशिश की, ताकि अंदर फंसे यात्रियों को बाहर निकाला जा सके। इस दौरान कई यात्री किसी तरह बस से बाहर निकलने में सफल रहे। कुछ यात्रियों ने खिड़कियों और दूसरे रास्तों से निकलकर अपनी जान बचाई। लेकिन आग की लपटें इतनी तेजी से फैल रही थीं कि बस के अंदर फंसे लोगों को बाहर निकालना मुश्किल हो गया। यात्री के मुताबिक, उस समय बस के अंदर से यात्रियों के चीखने और मदद के लिए आवाजें आ रही थीं। बाहर निकले लोग भी अंदर फंसे यात्रियों को बचाने की कोशिश कर रहे थे, लेकिन आग के कारण बस के अंदर जाना संभव नहीं था। हादसे में 9 यात्रियों को बाहर निकलने का मौका नहीं मिल सका और उनकी मौत हो गई। हादसे के बाद बस पूरी तरह आग की चपेट में आ गई। बाहर निकलने में कामयाब एक यात्री ने घटना का वीडियो भी बनाया, जिसमें बस आग की लपटों से घिरी नजर आ रही है। यात्री ने कहा कि अगर यात्रियों की शिकायत के बाद बस को समय रहते सड़क किनारे रोक दिया जाता तो लोगों को बाहर निकलने के लिए पर्याप्त समय मिल सकता था। उनका कहना है कि हादसे के समय रात काफी हो चुकी थी और बस में बड़ी संख्या में यात्री सो रहे थे।
ऐसे में अचानक आग लगने के बाद यात्रियों को संभलने और बाहर निकलने का पर्याप्त मौका नहीं मिल पाया। यह बस यमुना एक्सप्रेसवे के जीरो प्वाइंट से करीब 32 किलोमीटर आगे जेवर थाना क्षेत्र में आग की चपेट में आई। बताया गया कि राज कल्पना ट्रैवल्स की बस संख्या BR32 PA8647 दिल्ली से महोबा जा रही थी। बस में करीब 40 यात्री सवार थे। आग लगने के बाद कई यात्रियों ने बस से कूदकर अपनी जान बचाई। पुलिस और रेस्क्यू टीम ने करीब 30 यात्रियों को सुरक्षित बाहर निकाला। हादसे के बाद उत्तर प्रदेश सरकार ने मृतकों के परिजनों और घायलों के लिए आर्थिक सहायता का ऐलान किया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की ओर से मृतकों के परिजनों को 2-2 लाख रुपये और घायलों को 50-50 हजार रुपये की आर्थिक सहायता देने की घोषणा की गई है। फिलहाल पुलिस ने यात्री सुनील कुमार की शिकायत और बयान के आधार पर जांच शुरू कर दी है। हादसे के दौरान बस चालक और कंडक्टर की भूमिका भी जांच के दायरे में है। पुलिस इस बात की भी जांच कर रही है कि यात्रियों द्वारा धुआं और बदबू की शिकायत किए जाने के बाद बस को तत्काल क्यों नहीं रोका गया और आग आखिर किस वजह से लगी।