चारधाम यात्रा की तैयारियां तेज: गाडू घड़ा यात्रा का शुभारंभ! वेद मंत्रों के बीच बदरीनाथ धाम के लिए रवाना हुआ पवित्र तेल कलश

Preparations for the Char Dham Yatra in full swing: Gadu Ghada Yatra begins! Amid chanting of Vedic mantras, the sacred oil urn departs for Badrinath Dham.

चमोली। आस्था, परंपरा और धार्मिक श्रद्धा का अद्भुत संगम एक बार फिर उत्तराखंड की पवित्र धरती पर देखने को मिल रहा है। भगवान बदरी विशाल के अभिषेक हेतु उपयोग में आने वाले तिल के तेल से भरे पवित्र ‘गाडू घड़ा’ की द्वितीय चरण की यात्रा सोमवार को विधि-विधान और वैदिक मंत्रोच्चार के साथ भव्य रूप से शुरू हो गई। यह पवित्र यात्रा बदरीनाथ धाम के पुजारी समुदाय डिमरी के मूल गांव डिम्मर स्थित श्री लक्ष्मी नारायण मंदिर से आरंभ हुई। यहां विशेष पूजा-अर्चना, बाल भोग और पारंपरिक अनुष्ठानों के बाद श्रद्धालुओं की उपस्थिति में गाडू घड़ा को धाम के लिए रवाना किया गया। पूरे आयोजन के दौरान धार्मिक वातावरण भक्तिमय बना रहा और वेद मंत्रों की गूंज ने माहौल को आध्यात्मिक ऊर्जा से भर दिया।

यात्रा का यह चरण डिम्मर से शुरू होकर उमट्ठा, पाखी, रविग्राम, लंगासू, चमोली, बिरही और पीपलकोटी जैसे प्रमुख पड़ावों से होते हुए बदरीनाथ धाम की ओर अग्रसर है। हर पड़ाव पर स्थानीय श्रद्धालु गाडू घड़ा का स्वागत पुष्प वर्षा, ढोल-दमाऊं और पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ कर रहे हैं, जिससे पूरी यात्रा एक उत्सव का रूप लेती जा रही है। सोमवार को गाडू घड़ा का रात्रि प्रवास ज्योतिर्मठ स्थित नृसिंह मंदिर में हुआ, जो इस यात्रा का एक महत्वपूर्ण धार्मिक पड़ाव माना जाता है। निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार 22 अप्रैल को यह पवित्र कलश बदरीनाथ धाम पहुंचेगा, जबकि 23 अप्रैल को धाम के कपाट खुलने के साथ ही इसे गर्भगृह में स्थापित किया जाएगा। परंपरा के अनुसार इसी तिल के तेल से पूरे वर्ष भगवान बदरी विशाल का अभिषेक किया जाता है, जिससे इस यात्रा का महत्व और भी बढ़ जाता है।

डिमरी धार्मिक केंद्रीय पंचायत के पदाधिकारियों के साथ-साथ बड़ी संख्या में श्रद्धालु इस यात्रा में शामिल हैं, जो अपनी आस्था और परंपरा को जीवंत बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। गाडू घड़ा यात्रा न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि यह उत्तराखंड की सांस्कृतिक विरासत और सामूहिक आस्था का भी प्रतीक है। इधर चारधाम यात्रा को लेकर भी श्रद्धालुओं में उत्साह चरम पर है। केदारनाथ धाम के कपाट 22 अप्रैल को प्रातः 08:00 बजे विधि-विधान के साथ खोले जाएंगे, जबकि 23 अप्रैल को सुबह 6:15 बजे बदरीनाथ धाम के कपाट भी श्रद्धालुओं के दर्शनार्थ खुल जाएंगे। इसके साथ ही उत्तराखंड की विश्व प्रसिद्ध चारधाम यात्रा विधिवत रूप से शुरू हो जाएगी।