उत्तराखण्डः उफनती नदी के बीच फंसे श्रद्धालु! एसडीआरएफ की सतर्कता से टला बड़ा हादसा, चारों ओर मचा हड़कंप
चंपावत। ऐतिहासिक श्री रीठा साहिब गुरुद्वारा में आयोजित होने वाले प्रसिद्ध जोड़ मेले के दौरान एक बड़ा हादसा होते-होते टल गया। क्षेत्र में हुई अचानक बारिश के कारण लदिया और रतिया नदियों के संगम क्षेत्र में जलस्तर तेजी से बढ़ गया, जिससे नदी के बीच लगभग 50 से 60 श्रद्धालु फंस गए। स्थिति गंभीर होती देख मौके पर तैनात एसडीआरएफ की टीम ने तत्काल राहत एवं बचाव अभियान शुरू किया और सभी श्रद्धालुओं को सुरक्षित बाहर निकाल लिया। इस दौरान नदी क्षेत्र में फंसे कई वाहनों को भी सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाया गया। समय रहते की गई कार्रवाई के चलते एक बड़ी दुर्घटना टल गई और किसी प्रकार की जनहानि नहीं हुई। घटना के बाद मेले में मौजूद लोगों ने एसडीआरएफ की त्वरित कार्रवाई और साहसिक प्रयासों की सराहना की। एसडीआरएफ सेनानायक अर्पण यदुवंशी ने बताया कि जोड़ मेले में श्रद्धालुओं की भारी भीड़, क्षेत्र की भौगोलिक संवेदनशीलता और खराब मौसम की संभावनाओं को देखते हुए एसडीआरएफ की एक विशेष टीम को पूर्व से ही मेला क्षेत्र में तैनात किया गया था। उन्होंने कहा कि आपदा प्रबंधन की दृष्टि से की गई यह अग्रिम तैनाती शनिवार को बेहद महत्वपूर्ण साबित हुई। यदि टीम पहले से मौके पर मौजूद नहीं होती तो स्थिति और अधिक गंभीर हो सकती थी।
जानकारी के अनुसार 31 मई को बड़ी संख्या में श्रद्धालु लदिया और रतिया नदियों के संगम क्षेत्र स्थित पवित्र कुंड में स्नान कर गुरुद्वारा साहिब के दर्शन के लिए आवागमन कर रहे थे। इसी दौरान क्षेत्र में हुई बारिश के कारण नदी का जलस्तर अचानक बढ़ने लगा। देखते ही देखते तेज बहाव के बीच दर्जनों श्रद्धालु नदी के मध्य फंस गए। वहीं नदी किनारे खड़े कई वाहन भी पानी में घिर गए। अचानक आई इस स्थिति से मौके पर अफरा-तफरी का माहौल बन गया और लोग सुरक्षित स्थानों की ओर भागने लगे। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए मेले में तैनात एसडीआरएफ टीम उप निरीक्षक दीपक सामंत के नेतृत्व में तत्काल घटनास्थल पर पहुंची। टीम ने बिना समय गंवाए राहत एवं बचाव अभियान शुरू किया। तेज बहाव, लगातार बढ़ते जलस्तर और चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों के बावजूद एसडीआरएफ जवानों ने अदम्य साहस और पेशेवर दक्षता का परिचय देते हुए एक-एक श्रद्धालु को सुरक्षित नदी पार कराया। बचाव अभियान के दौरान टीम ने पूरी सतर्कता बरतते हुए महिलाओं, बच्चों और बुजुर्गों को प्राथमिकता के आधार पर सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाया।