सुधार एक्सप्रेस' की रफ्तार तेज करेंगे पीएम मोदी: नौकरशाही को चाक-चौबंद करने के लिए खुद संभाली कमान

PM Modi to Accelerate the 'Reform Express': Takes Personal Command to Streamline the Bureaucracy

नई दिल्ली। वर्ष 2047 तक 'विकसित भारत' का लक्ष्य हासिल करने की दिशा में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सरकारी काम-काज की रफ्तार बढ़ाने और नौकरशाही को पूरी तरह चाक-चौबंद करने के लिए एक बड़ी पहल की है। गुरुवार को प्रधानमंत्री की अध्यक्षता में करीब पांच घंटे तक मंत्रिपरिषद की एक हाई-प्रोफाइल मैराथन बैठक चली। इस बैठक में पीएम मोदी ने न सिर्फ प्रशासनिक सुस्ती पर कड़ा रुख अपनाया, बल्कि नौकरशाहों के विदेशी दौरों, अदालतों में लंबित मुकदमों और विभिन्न स्तरों पर फाइलों के अटकने की टाइमलाइन का पूरा कच्चा-चिट्ठा देख डाला। प्रधानमंत्री ने सरकार की प्राथमिकताओं को स्पष्ट करते हुए साफ कहा कि सुधार ही 'विकसित भारत' की असली नींव हैं। उन्होंने अपनी सरकार को 'सुधार एक्सप्रेस' की सरकार बताते हुए सभी मंत्रालयों को इसमें और तेजी लाने के निर्देश दिए।

सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, इस उच्च स्तरीय बैठक में प्रधानमंत्री के सामने मंत्रालयवार एक विस्तृत प्रजेंटेशन (प्रस्तुति) पेश की गई। इस प्रजेंटेशन के जरिए पीएम मोदी ने सीधे तौर पर यह जाना कि किस मंत्रालय में संयुक्त सचिव, सचिव या राज्य मंत्रियों के स्तर पर कोई फाइल औसतन कितने दिनों तक अटकी रहती है। इसके साथ ही, अधिकारियों की जवाबदेही तय करने के लिए उनके विदेशी दौरों का पूरा डेटा भी पीएम के सामने रखा गया। इसमें यह विशेष रूप से रेखांकित किया गया कि किस मंत्रालय के कितने अधिकारियों ने तय सीमा या संख्या से अधिक बार विदेश यात्राएं की हैं। मंत्रालयों से जुड़े कानूनी विवादों की समीक्षा करते हुए पीएम को विभिन्न अदालतों में लंबित मुकदमों की जानकारी भी दी गई और यह भी आंका गया कि किस मंत्रालय ने इन मुकदमों को खत्म करने के लिए क्या प्रयास किए हैं। मंत्रालय अब पुराने और रटे-रटाए ढर्रे पर काम करना बंद करें। हर मंत्रालय को लीक से हटकर कुछ नया सोचना होगा और नया करना होगा। विकास से जुड़े मामलों को बिना किसी देरी के निपटाएं। हमें हर हाल में नए तरीके से सोचने और काम करने की इस कार्य-संस्कृति को धरातल पर उतारना होगा।" - प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस मैराथन बैठक के दौरान ऊर्जा, स्वास्थ्य, श्रम, वन एवं पर्यावरण और कॉमर्स (वाणिज्य) समेत देश के 11 महत्वपूर्ण मंत्रालयों ने अपनी-अपनी प्रजेंटेशन दी। उन्होंने बताया कि काम-काज को सुगम बनाने के लिए अब तक क्या कदम उठाए गए हैं और भविष्य का खाका क्या है। प्रधानमंत्री ने सभी मंत्रालयों को निर्देश दिया कि वे देश में 'सुधार उत्सव' मनाएं। उन्होंने कहा कि सुधारों के संबंध में राज्यों, विशेषज्ञों और आम जनता से व्यापक स्तर पर बातचीत की जानी चाहिए। उन्होंने जोर देकर कहा कि प्रशासनिक सुधारों का सबसे बड़ा मकसद आम जनता की परेशानियों को कम करना होना चाहिए। बैठक के दौरान मंत्रिपरिषद के सदस्यों ने हाल ही में तीन राज्यों के विधानसभा चुनावों में मिली बंपर सफलता के लिए प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व की जमकर सराहना की। बैठक के समापन सत्र में पीएम ने कोर्ट-कचहरी के चक्करों में फंसे मंत्रालयों के मामलों को तेजी से निपटाने के निर्देश दिए ताकि सरकारी पैसे और समय की बर्बादी को रोका जा सके। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि पीएम मोदी का यह कड़ा रुख आने वाले दिनों में भारतीय प्रशासनिक व्यवस्था (ब्यूरोक्रेसी) की पूरी कार्यशैली को बदलने वाला साबित होगा।