ऑपरेशन सिंदूर की पहली वर्षगांठ पर प्रधानमंत्री ने सेना के शौर्य को किया नमन,बोले-आतंकवाद के पूरे तंत्र को जड़ से मिटाना ही लक्ष्य

On the first anniversary of Operation Sindoor, the Prime Minister paid tribute to the valor of the Army, stating: "The sole objective is to completely eradicate the entire ecosystem of terrorism."

नई दिल्ली। भारत अब आतंकियों की हरकतों को नजरअंदाज नहीं करता, बल्कि उन्हें उनके गढ़ में घुसकर जवाब देना जानता है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज ऑपरेशन सिंदूर' की पहली वर्षगांठ पर भारतीय सशस्त्र बलों के अदम्य साहस और सटीकता को सलाम करते हुए यह हुंकार भरी। सोशल मीडिया पर राष्ट्र के नाम अपने संदेश में प्रधानमंत्री ने स्पष्ट कर दिया कि भारत आतंकवाद और उसे खाद-पानी देने वाले पूरे तंत्र को नेस्तनाबूद करने के अपने संकल्प पर पूरी मजबूती से कायम है। आज से ठीक एक साल पहले, 7 मई की तड़के सुबह, भारतीय वायुसेना और थल सेना के जांबाज जवानों ने एक ऐसे मिशन को अंजाम दिया था जिसने पूरी दुनिया को भारत की बढ़ती सैन्य शक्ति का अहसास करा दिया। पहलगाम में हुए कायरतापूर्ण हमले, जिसमें 26 निर्दोष भारतीयों ने अपनी जान गंवाई थी, उसका हिसाब चुकता करने के लिए 'ऑपरेशन सिंदूर' लॉन्च किया गया था। भारतीय जांबाजों ने सीमा पार पाकिस्तान और पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में घुसकर नौ प्रमुख आतंकी प्रशिक्षण शिविरों को मिट्टी में मिला दिया था। उस सटीक स्ट्राइक में 100 से ज्यादा खूंखार आतंकी मारे गए थे।

प्रधानमंत्री मोदी ने इस वर्षगांठ पर दोहराया कि ऑपरेशन सिंदूर ने भारत का एक नया रक्षा सिद्धांत स्थापित किया है। उन्होंने कहा, "अब भारत परमाणु धमकियों के आगे झुकने वाला देश नहीं है। अगर भारत पर कोई आंच आएगी, तो उसकी भारी कीमत आतंकियों के साथ-साथ उनके आकाओं को भी चुकानी होगी। यह अभियान न केवल आतंकवाद के खिलाफ भारत की कठोर नीति का प्रमाण है, बल्कि रक्षा क्षेत्र में 'आत्मनिर्भर भारत' की सफलता की भी गवाही देता है। पीएम ने कहा कि स्वदेशी तकनीक और सेनाओं के बीच सटीक समन्वय ने दुनिया को दिखा दिया है कि भारतीय सेना पेशेवर क्षमता के मामले में सर्वश्रेष्ठ है। प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में देशवासियों को आश्वस्त किया कि सीमाएं अब पहले से कहीं अधिक सुरक्षित हैं। उन्होंने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर महज एक सैन्य कार्रवाई नहीं थी, बल्कि यह राष्ट्रीय सुरक्षा की रक्षा के अटूट संकल्प का प्रतीक था। आज एक साल बीत जाने के बाद भी भारत की नीति 'जीरो टॉलरेंस' की है। रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि इस ऑपरेशन के बाद से पड़ोसी मुल्क की नापाक हरकतों पर नकेल कसी गई है और वैश्विक मंच पर भारत की साख एक मजबूत और निर्णायक राष्ट्र के रूप में उभरी है। पूरे देश में आज लोग इस दिन को गर्व के साथ मना रहे हैं। शहीद जवानों के परिवारों को याद करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि देश उनके बलिदान को कभी नहीं भूलेगा। उन्होंने विश्वास जताया कि आधुनिक हथियारों और मजबूत राजनीतिक इच्छाशक्ति के साथ भारतीय सेना हर चुनौती का सामना करने के लिए तैयार है।