अब जनता भरेगी सड़कों की लाइट का बिल, हर बिजली बिल में लगकर आएगा 'स्ट्रीट लाइट सरचार्ज
देहरादून। उत्तराखंड के शहरी उपभोक्ताओं की जेब पर अब एक और बोझ पड़ने वाला है। प्रदेश के नगर निकायों पर स्ट्रीट लाइटों के करोड़ों रुपये के बकाया बिल का समाधान निकालने के लिए शहरी विकास विभाग ने एक बड़ा मास्टर प्लान तैयार किया है। इस योजना के तहत अब शहर की सड़कों पर जलने वाली लाइटों का खर्च सीधे आम जनता से वसूला जाएगा। विभाग ने इसके लिए 'स्ट्रीट लाइट सरचार्ज' का प्रस्ताव तैयार किया है, जिसे जल्द ही मंजूरी के लिए मुख्य सचिव के समक्ष पेश किया जाएगा।
जानकारी के अनुसार के अनुसार, देहरादून, टिहरी और उत्तरकाशी जैसे बड़े जिलों समेत प्रदेश के लगभग सभी नगर निकायों पर ऊर्जा निगम का भारी-भरकम बिजली बिल बकाया है। स्थिति यह है कि यूपीसीएल जन सुविधा का मामला होने के कारण कनेक्शन काट नहीं सकता और निकाय अपनी खस्ता माली हालत की वजह से भुगतान कर नहीं पा रहे हैं। बकाया राशि का यह ग्राफ लगातार बढ़ता जा रहा है, जिससे सरकारी तंत्र के सामने वित्तीय संकट खड़ा हो गया है। शहरी विकास विभाग के अधिकारियों के मुताबिक, प्रस्तावित योजना के तहत हर उपभोक्ता के मासिक बिजली बिल में एक निश्चित राशि 'स्ट्रीट लाइट सरचार्ज' के रूप में जोड़ दी जाएगी। उपभोक्ता जब अपने बिजली बिल का भुगतान करेगा, तो सरचार्ज की राशि यूपीसीएल के पास जमा होगी। यूपीसीएल इस एकत्रित राशि को शहरी विकास विभाग या संबंधित नगर निकायों को हस्तांतरित कर देगा। इस फंड का उपयोग न केवल पुराने बिलों के भुगतान के लिए होगा, बल्कि स्ट्रीट लाइटों के बेहतर रखरखाव के लिए भी किया जाएगा। प्रदेश के सभी 108 नगर निकायों की आर्थिक स्थिति फिलहाल बहुत ही नाजुक है। देहरादून जैसे बड़े नगर निगम के पास भी आय के बेहद सीमित संसाधन हैं। अधिकांश निकाय या तो केंद्रीय सहायता पर निर्भर हैं या फिर राज्य सरकार के बजट पर। कई निकायों में तो स्थिति यहाँ तक खराब है कि कर्मचारियों का वेतन और दैनिक खर्च निकालना भी चुनौती बन गया है। ऐसे में बिजली और पानी जैसे अनिवार्य बिलों का भुगतान हमेशा लंबित रह जाता है। इस प्रस्ताव के लागू होने के बाद शहरी क्षेत्र में रहने वाले लाखों परिवारों के बिजली बिल में इजाफा तय है। हालांकि विभाग का तर्क है कि इससे निकायों पर वित्तीय बोझ कम होगा और शहरों की सड़कों पर अंधेरा नहीं रहेगा, लेकिन महंगाई के इस दौर में उपभोक्ताओं के लिए यह खबर किसी झटके से कम नहीं है। अब देखना यह होगा कि मुख्य सचिव इस प्रस्ताव पर क्या रुख अपनाते हैं और जनता की इस पर क्या प्रतिक्रिया होती है। फिलहाल, शहरी विकास विभाग अपनी आय बढ़ाने के अन्य विकल्पों पर भी मंथन कर रहा है।