उत्तराखण्डः उपनल कर्मचारियों के नियमितीकरण और वेतनमान का मामला! हाईकोर्ट ने सरकार से कहा- पहले न्यूनतम वेतनमान दो, 9 जून को फिर होगी सुनवाई

Uttarakhand: The matter of regularization and pay scale for UPNL employees! The High Court told the government to first provide the minimum wage, and the hearing will be held again on June 9th.

नैनीताल। उत्तराखंड हाईकोर्ट ने प्रदेश के सरकारी विभागों में वर्षो से लगे  उपनल संविदा कर्मचारियों को आदेश होने के बाद भी सरकार द्वारा नियमित नही क़रने और उन्हें न्यूनतम वेतनमान नही दिये जाने तथा उनको दिए गए वेतन से जीएसटी काटे जाने के खिलाफ दायर अवमानना याचिका पर सुनवाई की। मामले की सुनवाई के बाद कोर्ट ने राज्य सरकार से कहा है कि इनको पहले न्यूनतम वेतनमान दिया जाए। मामले की अगली सुनवाई के लिए 9 जून की तिथि नियत की है। सुनवाई के दौरान सरकार की तरफ से कहा गया कि इनकी जगह जो नई नियुक्तियां की जानी हैं वह सरकार ने वापस ले ली हैं। शर्त यह रखी गई है कि ये अन्य कर्मचारियों की भांति अन्य मांग नही करेंगे। सरकार उन्हें न्यूनतम वेतनमान देने को तैयार है। संघ की तरफ से यह भी कहा गया कि 2013 की नियमावली के तहत सरकार ने स्कंद पुष्प केंद्र में लगे उपनल कर्मचारियों को नियमित किया था उसी के आधार पर उन्हें भी नियमित किया जाए। मामले को कैबिनेट में रखने की क्या जरूरत है। पक्षों को सुनने के बाद कोर्ट ने सरकार से कहा है कि पहले इन्हें न्यूनतम वेतनमान दिया जाए। आज मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति राकेश थपलियाल की एकलपीठ में हुई। बता दें कि संविदा कर्मचारी संघ के अधिवक्ताओं ने कोर्ट के समक्ष उनका पक्ष रखते हुए कहा कि पूर्व में कोर्ट की खंडपीठ ने उपनल कर्मचारियों के नियमितीकरण के सम्बंध में एक आदेश जारी किया था। लेकिन इस आदेश पर अब तक राज्य सरकार की तरफ से कोई निर्णय नहीं लिया गया। न ही इसे उच्च न्यायालय के रिकॉर्ड में  लाया गया है। पूर्व में संघ की ओर से पेश हुए सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता ने इस अवमानना याचिका पर (उत्तराखंड उपनल कर्मचारी संघ बनाम आनन्द बर्धन, मुख्य सचिव उत्तराखंड) की प्राथमिकता के आधार पर सुनवाई की मांग की गयी थी।