NEET RE-EXAM:कांग्रेस की रैली से जाम, 4 स्टूडेंट का छूटा नीट एग्जाम,भड़के अभिभावक,राजनीतिक गलियारों में हंगामा
बेंगलुरु। कर्नाटक की राजधानी बेंगलुरु में रविवार को आयोजित UGNEET-2026 पुनर्परीक्षा के दौरान चार अभ्यर्थियों के परीक्षा से वंचित रह जाने का मामला राजनीतिक विवाद का कारण बन गया है। आरोप है कि कांग्रेस की एक बड़ी राजनीतिक रैली के चलते उत्पन्न यातायात दबाव और अव्यवस्था के कारण कुछ छात्र निर्धारित समय पर परीक्षा केंद्र नहीं पहुंच सके, जबकि राज्य सरकार और कांग्रेस ने इन आरोपों को भ्रामक बताते हुए खारिज किया है।
रविवार को कर्नाटक कांग्रेस के नवनियुक्त प्रदेश अध्यक्ष बी.के. हरिप्रसाद के पदभार ग्रहण समारोह के अवसर पर पैलेस ग्राउंड्स में विशाल रैली आयोजित की गई थी। संयोगवश उसी दिन राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (NEET) की पुनर्परीक्षा भी आयोजित की जा रही थी, जिसमें हजारों अभ्यर्थी शामिल हुए।
रिपोर्ट्स के अनुसार बेंगलुरु स्थित सरकारी रामनारायण चेलाराम कॉलेज ऑफ कॉमर्स एंड मैनेजमेंट परीक्षा केंद्र पर तीन छात्राएं निर्धारित समय से देरी से पहुंचीं। परीक्षा नियमों के अनुसार गेट बंद हो चुके थे, जिसके चलते उन्हें प्रवेश नहीं दिया गया। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक छात्राएं परीक्षा में शामिल होने के लिए लगातार अनुरोध करती रहीं, लेकिन नियमों के कारण उन्हें अनुमति नहीं मिली। एक छात्रा ने परिसर में प्रवेश पाने के लिए ग्रिल पर चढ़ने का प्रयास भी किया, जिसे पुलिस ने रोक दिया।
इसी प्रकार कोप्पल जिले के गंगावती तालुक स्थित एक परीक्षा केंद्र पर भी लगभग 20 मिनट देरी से पहुंचे एक अभ्यर्थी को परीक्षा में बैठने की अनुमति नहीं दी गई।
घटना के सामने आने के बाद मामला राजनीतिक रंग ले गया। भाजपा सांसद तेजस्वी सूर्या ने राज्य सरकार और कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि रैली के कारण शहर के कई हिस्सों में भारी ट्रैफिक जाम की स्थिति बनी, जिससे परीक्षार्थियों को परेशानी हुई। उन्होंने सवाल उठाया कि जब हजारों छात्र देश की सबसे महत्वपूर्ण प्रतियोगी परीक्षाओं में से एक देने जा रहे थे, तब राजनीतिक कार्यक्रम के लिए कोई अन्य दिन क्यों नहीं चुना गया।
दूसरी ओर कर्नाटक के गृह मंत्री प्रियांक खड़गे ने भाजपा के आरोपों को निराधार बताया। उनका कहना है कि संबंधित मामलों में देरी के अलग-अलग कारण थे और ट्रैफिक जाम को जिम्मेदार ठहराना तथ्यों का सरलीकरण है। उन्होंने कहा कि बेंगलुरु ट्रैफिक पुलिस ने पहले ही विस्तृत ट्रैफिक एडवाइजरी जारी कर दी थी और अभ्यर्थियों को समय से पहले घर से निकलने की सलाह दी गई थी। एक छात्रा के मामले का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि उसे समय पर बस नहीं मिल सकी, जिसके कारण वह देर से पहुंची।
खड़गे ने भाजपा पर पलटवार करते हुए कहा कि आज परीक्षा छूटने वाले कुछ छात्रों को लेकर चिंता जताई जा रही है, लेकिन NEET पेपर लीक जैसे बड़े मामलों में विपक्ष की ओर से वैसी संवेदनशीलता नहीं दिखाई गई, जब लाखों छात्रों का भविष्य प्रभावित हुआ था।
हालांकि इस पूरे विवाद के बीच सबसे बड़ा सवाल परीक्षा से वंचित हुए उन चार अभ्यर्थियों के भविष्य को लेकर खड़ा हो गया है, जिन्होंने वर्षों की तैयारी के बाद परीक्षा केंद्र तक पहुंचने का प्रयास किया, लेकिन निर्धारित समय सीमा के कारण अंदर प्रवेश नहीं पा सके। घटना ने एक बार फिर यह बहस छेड़ दी है कि राष्ट्रीय स्तर की महत्वपूर्ण परीक्षाओं के दिनों में प्रशासन और राजनीतिक दलों को ऐसे कार्यक्रमों के आयोजन में अतिरिक्त सावधानी बरतनी चाहिए, ताकि छात्रों के हित किसी भी परिस्थिति में प्रभावित न हों।