विपक्ष के हंगामे के बीच लोकसभा से जन्म-मृत्यु पंजीकरण संशोधन विधेयक पास! बिना चर्चा के हुआ पारित, जानिए क्या हैं नए बदलाव?

Birth and Death Registration (Amendment) Bill passed in Lok Sabha amidst opposition uproar! Passed without discussion—find out what the new changes are.

नई दिल्ली। संसद के मानसून सत्र के 10वें दिन भी विपक्ष का जोरदार हंगामा जारी रहा। दोनों सदनों में विपक्षी सांसदों ने 20 जुलाई को संसद मार्च के दौरान छात्रों पर हुई कथित पुलिस कार्रवाई के मुद्दे पर चर्चा की मांग की। विपक्षी सांसद केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से इस मामले में जवाबदेही तय करने और सदन में जवाब देने की मांग को लेकर लगातार नारेबाजी करते रहे। हंगामे के बीच लोकसभा ने जन्म और मृत्यु पंजीकरण (संशोधन) विधेयक, 2026 को बिना चर्चा के ध्वनिमत से पारित कर दिया। दोपहर 12 बजे सदन की कार्यवाही दोबारा शुरू होने के बाद भाजपा सांसद दिलीप सैकिया की अध्यक्षता में विधेयक को चर्चा और मंजूरी के लिए सदन में पेश किया गया। हालांकि, विपक्षी सांसदों की नारेबाजी के बीच विधेयक को ध्वनिमत से पारित कर दिया गया। इस दौरान कई विपक्षी सांसद सदन के बीचों-बीच पहुंच गए और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की सदन में मौजूदगी की मांग करने लगे। विपक्ष के हंगामे और विधेयक पर चर्चा नहीं होने को लेकर संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि सरकार इस महत्वपूर्ण विधेयक पर सदन में चर्चा चाहती थी, लेकिन विपक्ष ने चर्चा में हिस्सा नहीं लिया। रिजिजू ने इसे दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए कहा कि भविष्य में ऐसा दोबारा नहीं होना चाहिए। उन्होंने विपक्षी सांसदों से सदन की कार्यवाही बाधित करने के बजाय विधेयकों पर चर्चा में हिस्सा लेने की अपील की। जन्म और मृत्यु पंजीकरण (संशोधन) विधेयक, 2026 में कानूनी परिभाषाओं से जुड़े कुछ बदलाव भी किए गए हैं। विधेयक में ‘कार्यकारी मजिस्ट्रेट’ शब्द को भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 के अनुरूप संशोधित किया गया है। इससे पहले कानून में 1973 की आपराधिक प्रक्रिया संहिता का संदर्भ दिया जाता था। लोकसभा से विधेयक पारित होने के बाद अब इसे राज्यसभा की मंजूरी के लिए भेजा जाएगा। राज्यसभा से पारित होने के बाद ही यह विधेयक कानून का रूप ले सकेगा। मानसून सत्र के दौरान अब तक दो विधेयक लोक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक, 2026 और राष्ट्रीय सम्मान के अपमान की रोकथाम (संशोधन) विधेयक, 2026 संसद के दोनों सदनों से पारित हो चुके हैं। वहीं, सदन की कार्यवाही के दौरान भाजपा सांसद अपराजिता सारंगी की अध्यक्षता वाली संयुक्त संसदीय समिति को संविधान (130वां संशोधन) विधेयक, 2025 पर रिपोर्ट पेश करने के लिए अतिरिक्त समय भी दिया गया। समिति अब अपनी रिपोर्ट शीतकालीन सत्र के आखिरी सप्ताह के पहले दिन तक पेश कर सकती है। इस बीच विपक्ष के लगातार विरोध और सरकार द्वारा विधेयक पारित कराए जाने को लेकर संसद में गतिरोध बना हुआ है।

विधेयक में क्या बदलाव किए गए हैं?
यह विधेयक जन्म और मृत्यु पंजीकरण अधिनियम, 1969 के कुछ प्रावधानों में बदलाव करता है।
इसका उद्देश्य जन्म और मृत्यु जैसी महत्वपूर्ण घटनाओं की समय पर जानकारी दर्ज कराने को बढ़ावा देना है।
विधेयक में देरी से जन्म और मृत्यु का पंजीकरण कराने के नियमों को सख्त किया गया है।
अब घटना के दो साल से ज्यादा समय बाद पंजीकरण कराने के लिए प्रथम श्रेणी के न्यायिक मजिस्ट्रेट के आदेश की जरूरत होगी।
मौजूदा कानून में एक साल से ज्यादा देरी होने पर जिला मजिस्ट्रेट, उप-विभागीय मजिस्ट्रेट या अधिकृत कार्यकारी मजिस्ट्रेट के आदेश की जरूरत होती है। नए कानून में दो साल तक की देरी के लिए यही व्यवस्था जारी रहेगी।