पहाड़ों पर कुदरत का कहर: उत्तराखंड-हिमाचल में 220 से अधिक सड़कें बंद, कश्मीर में बादल फटने से हाहाकार

Nature's fury in the mountains: Over 220 roads closed in Uttarakhand and Himachal; cloudbursts wreak havoc in Kashmir.

उत्तर भारत के पहाड़ी राज्यों में मानसून की बारिश आफत बनकर बरस रही है। उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश और जम्मू-कश्मीर में भारी बारिश, भूस्खलन और बादल फटने की घटनाओं ने जनजीवन को पूरी तरह अस्त-व्यस्त कर दिया है। देवभूमि उत्तराखंड में जहां 100 से अधिक सड़कें मलबे की चपेट में आने से बंद हैं, वहीं पड़ोसी राज्य हिमाचल में 120 से ज्यादा रास्तों पर पहिए थम गए हैं। उधर, जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में बादल फटने से भारी तबाही हुई है। मौसम विभाग ने अगले 24 घंटों के लिए इन सभी राज्यों में अचानक बाढ़ और भूस्खलन का रेड/ऑरेंज अलर्ट जारी करते हुए लोगों को बेहद सतर्क रहने की सलाह दी है।

उत्तराखंड में बारिश और पहाड़ों से गिरते पत्थरों ने हाहाकार मचा रखा है। राज्य आपातकालीन परिचालन केंद्र के मुताबिक, प्रदेश में 100 से अधिक सड़कें बंद हो चुकी हैं, जिनमें सबसे ज्यादा मार ग्रामीण इलाकों पर पड़ी है। उत्तरकाशी में ऋषिकेश-यमुनोत्री राष्ट्रीय राजमार्ग स्यानाचट्टी के पास मलबे के कारण पूरी तरह ठप है। इसके अलावा जिले के 10 ग्रामीण मार्ग भी बंद हैं।  नैनीताल जिले के रामगढ़ पुल के पास राष्ट्रीय राजमार्ग का एक बड़ा हिस्सा धंस गया है, जिससे भारी वाहनों की आवाजाही पर पूरी तरह रोक लगा दी गई है। चमोली में 12, पिथौरागढ़ में 14, देहरादून में 10, टिहरी में 9 और अल्मोड़ा में 5 सड़कें बंद हैं। प्रशासन जेसीबी मशीनों की मदद से मलबे को हटाने और रास्तों को खोलने की कोशिश में जुटा है, लेकिन लगातार गिरते पत्थर काम में बाधा डाल रहे हैं। हिमाचल प्रदेश में भी कुदरत का रौद्र रूप देखने को मिल रहा है। रविवार को शिमला, चंबा, कुल्लू और लाहौल-स्पीति सहित कई जिलों में तेज आंधी के साथ भारी बारिश हुई। किन्नौर के रल्ली में 'लाल ढांक' नामक पहाड़ी से विशालकाय चट्टानें गिरने के कारण नेशनल हाईवे-5 पूरी तरह ब्लॉक हो गया है। इससे रिकांगपिओ, पूह और स्पीति वैली का देश के बाकी हिस्सों से संपर्क कट गया है। 

भूस्खलन के कारण पठानकोट-भरमौर और शिमला-रामपुर नेशनल हाईवे समेत 120 से अधिक सड़कें बंद हैं। जहां मैदानी इलाके बारिश से बेहाल हैं, वहीं लाहौल घाटी और रोहतांग दर्रे पर ताजा बर्फबारी हुई है, जिससे तापमान में भारी गिरावट दर्ज की गई है। कुकुमसेरी में न्यूनतम तापमान 10.1°C तक लुढ़क गया है। जम्मू-कश्मीर के अनंतनाग जिले में आने वाले पहलगाम के अवूरा इलाके में शनिवार रात बादल फटने से प्रलय जैसी स्थिति बन गई। तेज आवाज के साथ आए सैलाब ने कई मकानों को आंशिक रूप से ध्वस्त कर दिया। स्थानीय निवासी गुलाम हसन ने उस खौफनाक रात को याद करते हुए बताया, "अचानक एक तेज धमाके जैसी आवाज हुई। मैंने तुरंत अपने बच्चों को घर से बाहर निकाला। देखते ही देखते एक विशाल पेड़ मेरे घर पर आ गिरा। वह मंजर याद करके आज भी रूह कांप जाती है। इलाके के बुजुर्गों का कहना है कि उन्होंने अपने जीवन में अवूरा में ऐसी तबाही कभी नहीं देखी। इस आपदा के कारण पहलगाम-अवूरा-बिजबिहाड़ा मार्ग पूरी तरह टूट चुका है और क्षेत्र में बिजली-पानी की सप्लाई ठप है। पर्यटकों की सुरक्षा को देखते हुए प्रशासन ने उन्हें सुरक्षित होटलों में शिफ्ट कर दिया है।पहाड़ों पर मूसलाधार बारिश के बीच देश के मध्य, पश्चिमी और दक्षिणी हिस्सों में सूखा जैसी स्थिति बनी हुई है। मौसम विभाग के अनुसार, देश के लगभग 70% हिस्से में मानसून सुस्त पड़ गया है। इसके पीछे सबसे बड़ी वजह मानसून को गति देने वाले 'लो-प्रेशर सिस्टम' (कम दबाव का क्षेत्र) का कमजोर होना है। 9 जुलाई के बाद बंगाल की खाड़ी में कोई नया मजबूत सिस्टम नहीं बना, जिससे मानसूनी हवाओं को नमी नहीं मिल पाई। साथ ही मानसून ट्रफ अपनी सामान्य स्थिति से खिसककर उत्तर (हिमालय की तलहटी) की ओर चली गई है। यही कारण है कि बारिश अब केवल उत्तर और पूर्वोत्तर भारत तक सीमित रह गई है। प्रशांत महासागर में 3 नए मौसमी सिस्टम बन रहे हैं। यदि इनमें से कोई एक भी बंगाल की खाड़ी तक पहुंचता है, तो जुलाई के उत्तरार्ध में मानसून दोबारा सक्रिय हो सकता है। मौसम विज्ञान केंद्र ने अगले 4-5 दिनों तक पहाड़ी क्षेत्रों में यात्रा करने वाले पर्यटकों और स्थानीय लोगों के लिए सख्त एडवाइजरी जारी की है। बेहद जरूरी न होने पर पहाड़ी रास्तों और संवेदनशील भूस्खलन वाले क्षेत्रों की यात्रा करने से बचें। जलस्तर कभी भी अचानक बढ़ सकता है, इसलिए नदी तटों के पास जाने या नौकाविहार करने की सख्त मनाही है। धुंध और भारी बारिश के कारण दृश्यता बेहद कम है, वाहन चालक हेडलाइट जलाकर और धीमी गति से चलें।