Oct 06, 2026 Login
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नैनीताल:ज्योलिकोट में दूषित पानी से बीमारी पर हाईकोर्ट की टिप्पणी!समय-समय पर टैंकों की सफाई होती तो मामला! इतना बड़ा न होता,जलजनित रोगों की रोकथाम को पूरे प्रदेश में नई SOP लागू करने के निर्देश

Nainital: The situation would not have escalated had the tanks been cleaned regularly – High Court's observation on the Jyolikot water crisis.

नैनीताल।

ज्योलिकोट और आसपास के गांवों में दूषित पेयजल से जलजनित बीमारियां फैलने के मामले में उत्तराखंड हाईकोर्ट ने सरकार को पूरे प्रदेश के लिए नई मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) तैयार करने के निर्देश दिए हैं। कोर्ट ने कहा कि जलजनित रोगों की रोकथाम के लिए प्रभावी व्यवस्था जरूरी है और तैयार की जाने वाली SOP को पूरे प्रदेश में सख्ती से लागू किया जाए, ताकि भविष्य में दूषित पेयजल के कारण लोगों को परेशानी न उठानी पड़े।

मंगलवार को मुख्य न्यायाधीश मनोज कुमार गुप्ता और न्यायमूर्ति सुभाष उपाध्याय की खंडपीठ में मामले की सुनवाई हुई। इस दौरान नैनीताल के जिलाधिकारी, मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ), उत्तराखंड जल संस्थान के महाप्रबंधक तथा उत्तराखंड पेयजल निगम, कुमाऊं मंडल के मुख्य अभियंता व्यक्तिगत रूप से कोर्ट में पेश हुए।

सुनवाई के दौरान कोर्ट ने जलजनित बीमारियों की रोकथाम के लिए नियमित निगरानी और पेयजल व्यवस्था को लेकर प्रभावी प्रोटोकॉल तैयार करने पर जोर दिया। कोर्ट ने यह भी टिप्पणी की कि यदि पेयजल टैंकों की समय-समय पर और प्रत्येक सीजन में नियमित सफाई की जाती तो स्थिति इस स्तर तक नहीं पहुंचती। कोर्ट ने सरकार को निर्देश दिए कि जलजनित रोगों की रोकथाम और नियंत्रण के लिए नई SOP तैयार कर अगली सुनवाई में प्रस्तुत की जाए तथा इसे पूरे प्रदेश में लागू किया जाए। मामले की अगली सुनवाई चार सप्ताह बाद होगी।

मामले के अनुसार, ज्योलिकोट के साथ गांजा, वीरभट्टी, छीणा, बेलुवाखान और सरियाताल क्षेत्र में पिछले करीब तीन महीनों से डायरिया और पीलिया जैसी जलजनित बीमारियों के मामले सामने आ रहे थे। इस दौरान दो लोगों की मौत तथा बड़ी संख्या में ग्रामीणों के बीमार होकर अस्पताल पहुंचने का मामला सामने आया।

बेलुवाखान निवासी अधिवक्ता रवि बिष्ट ने इस मामले को लेकर हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर की थी। याचिका में प्रभावित क्षेत्रों में जलजनित बीमारियों के फैलने का उल्लेख करते हुए विभागीय स्तर पर लापरवाही और निष्क्रियता का आरोप लगाया गया था। याचिका में प्रभावित लोगों के नि:शुल्क उपचार के साथ ही स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराने की मांग भी की गई थी।