नैनीताल: बायोमेडिकल ट्रीटमेंट प्लांट पर लगी रोक जारी, हाईकोर्ट ने पूछा- PIL चलानी है या NGT जाना है? याचिकाकर्ता से कोर्ट ने मांगा स्पष्टीकरण
नैनीताल। उत्तराखंड हाईकोर्ट में सितारगंज स्थित प्रस्तावित बायोमेडिकल वेस्ट ट्रीटमेंट प्लांट को लेकर दायर जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान महत्वपूर्ण बहस हुई। इस मामले में याचिकाकर्ता सतजीत सिंह गुलाटी ने जुलाई 2024 में जनहित याचिका दायर कर आरोप लगाया था कि सितारगंज इंडस्ट्रियल एरिया में स्थापित किए जा रहे बायोमेडिकल ट्रीटमेंट प्लांट को नियमों के विपरीत अनुमति दी गई है। याचिका में कहा गया कि प्राइवेट प्रतिवादी “नेशनल बायो मेडिकल वेस्ट सॉल्यूशन” को उत्तराखंड राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा दी गई “कंसेंट टू एस्टैब्लिश” (Consent to Establish) गलत तथ्यों के आधार पर प्रदान की गई। साथ ही आरोप लगाया गया कि परियोजना के लिए केंद्र सरकार से प्राप्त पर्यावरणीय मंजूरी भी तथ्यों को छिपाकर हासिल की गई है।
याचिकाकर्ता की ओर से कोर्ट को बताया गया कि प्रस्तावित प्लांट के नजदीक लगभग 10 किलोमीटर के दायरे में हाथियों का कॉरिडोर मौजूद है। इसके समर्थन में डिविजनल फॉरेस्ट ऑफिसर (DFO) की रिपोर्ट का हवाला भी दिया गया, जिसमें क्षेत्र को संवेदनशील बताया गया है। मामले की प्रारंभिक सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने प्लांट की स्थापना पर रोक लगाते हुए यथास्थिति बनाए रखने के निर्देश दिए थे।
वहीं, प्लांट स्थापित कर रही कंपनी की ओर से पेश अधिवक्ताओं ने अदालत में तर्क दिया कि याचिकाकर्ता स्वयं को सितारगंज का निवासी बताते हैं, जबकि उनके रिश्तेदारों का गदरपुर में इसी प्रकार का प्लांट संचालित है। प्रतिवादियों ने यह भी कहा कि बायोमेडिकल वेस्ट मैनेजमेंट नियमों के तहत ऐसे मामलों में अपील का स्पष्ट प्रावधान नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) में मौजूद है। इसलिए इस मामले को जनहित याचिका के रूप में सुनने के बजाय याचिकाकर्ता को NGT जाने के लिए कहा जाना चाहिए।
कोर्ट ने अपने पिछले आदेश में इन सभी तथ्यों को रिकॉर्ड पर लिया था और याचिकाकर्ता के अधिवक्ता से इस संबंध में स्पष्ट रुख बताने को कहा था। शुक्रवार को हुई सुनवाई में याचिकाकर्ता की ओर से अदालत को बताया गया कि इस संबंध में एक शपथपत्र (Affidavit) दाखिल किया जाएगा, जिसमें स्पष्ट किया जाएगा कि वे हाईकोर्ट में ही PIL जारी रखना चाहते हैं या फिर NGT के समक्ष वैकल्पिक उपाय अपनाएंगे।
हाईकोर्ट ने अपने पूर्व आदेश में यह भी उल्लेख किया था कि सतजीत सिंह गुलाटी द्वारा बायोमेडिकल ट्रीटमेंट प्लांट से जुड़े कुछ अन्य मामले पहले से ही NGT में दायर किए जा चुके हैं और वे वहां लंबित हैं। इसी आधार पर प्रतिवादी पक्ष के अधिवक्ता ने दलील दी कि जब याचिकाकर्ता पहले भी ऐसे मामलों में NGT का रुख कर चुके हैं, तो इस मामले में भी वही उचित मंच है।
मामले की अगली सुनवाई अब 13 मई को निर्धारित की गई है।