नैनीताल:शर्मनाक!! काहे के सीएम और काहे की डबल इंजन सरकार? 21 साल के उत्तराखंड में आजतक गांव तक नही पहुंची पक्की सड़क! चारपाई में बैठाकर ,कंधों में लादकर लाना पड़ा बीमार युवक को।
भले ही उत्तराखण्ड राज्य बने 21 वर्ष पूरे हो गए हो लेकिन उत्तराखंड के दूर दराज के पहाड़ी क्षेत्रों में आज भी स्वास्थ्य, शिक्षा, सड़क व बिजली पानी जैसी मूलभूत सुविधाओ का अभाव है। हैरानी तब होती है जब चुनावी सीजन में नेता इन्हीं मूलभूत सुविधाओं को दिलवाने के नाम पर वोट मांगते है और बेचारे ग्रामीण उम्मीद लगाए ये सोचकर कि शायद ये नेता सड़क,स्वास्थ्य, शिक्षा ,रोजगार देगा,वोट करने चले भी जाते है।
डबल इंजन की सरकार के दावों और वादों की ऐसी ही पोल खोलती ये तस्वीर हाईटेक शहर में तब्दील हो रहे नैनीताल जिले की है। ये है भीमताल विधानसभा जहाँ के मलुआताल में पिछले कई दिनों से एक बीमार युवक को अस्पताल पहुचाने के लिए स्थानीय युवको को चारपाई का सहारा लेना पड़ा। बीमार युवक को चारपाई में बैठाकर बारी बारी से ग्रामीण युवक चारपाई को कंधे पर रखकर उबड़ खाबड़ पगडंडियों के रास्ते पर 5 किलोमीटर पैदल चलकर मोटर मार्ग तक बड़ी मुश्किल से पहुंचे। पक्की सड़क शुरू होने के बाद बीमार युवक को गाड़ी से हल्द्वानी के अस्पताल में भर्ती कराया गया।
प्राप्त जानकारी के अनुसार गांव का एक युवक पिछले कई दिनों से बीमार चल रहा था। जब युवक की सेहत ज्यादा बिगड़ने लगी तो सामने बड़ी समस्या खड़ी हो गयी,क्योंकि गांव में आजतक किसी भी जनप्रतिनिधियों ने कोई पक्की सड़क बनवाई ही नही। तब गांव के युवको ने एकजुटता दिखाते हुए आज बीमार युवक को अस्पताल ले जाने का निर्णय लिया और उन्होंने उसे चारपाई के सहारे बारी बारी से पैदल 5 किलोमीटर मोटर मार्ग तक पहुचाया।
ग्रामीणों का कहना है कि ज़्यादातर गांवों की यही हालत है पक्की सड़क के लिए ग्रामीणों से वादे तो बहुत किये गए लेकिन चुनाव के बाद कोई इन गांवों में झांकता तक नही। कई सीएम बदले कई विधायक देखे लेकिन हमारी समस्याएं ज्यो की त्यों ही है। डबल इंजन की सरकार हो या कांग्रेस की किसी भी पार्टी के सीएम ने दुर्गम इलाकों की सुध नही ली ,और अगर कोई आया भी तो दोबारा नही आये क्योंकि काम ही नही हुआ तो आते कैसे।