नैनीताल:जनाक्रोश!अंकिता भंडारी को न्याय दिलवाने के लिए सड़कों पर उतरे लोग,सीबीआई जांच की मांग को लेकर निकाला कैंडल मार्च
नैनीताल।
बहुचर्चित अंकिता भंडारी हत्याकांड को लेकर प्रदेश भर में उबाल लगातार तेज होता जा रहा है। इसी कड़ी में 6 जनवरी को मंगलवार की शाम को नैनीताल में भी लोगों का आक्रोश खुलकर सड़कों पर दिखाई दिया।

नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य के नेतृत्व में नैनीताल में जनाक्रोश के साथ कैंडिल मार्च निकाला गया। यह कैंडल मार्च सांय 5 बजे मल्लीताल स्थित पंत पार्क से तल्लीताल गांधी चौक तक निकाला गया। रैली में स्थानीय नागरिकों, सामाजिक संगठनों और राजनीतिक कार्यकर्ताओं ने निष्पक्ष जांच और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की मांग को लेकर रोष व्यक्त किया।

नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य ने कैंडल मार्च निकालते हुए कहा कि 18 सितम्बर 2022 का दिन याद है जब उत्तराखंड की बेटी अंकिता भंडारी की निर्ममता के साथ हत्या कर दी गई थी। तब भी सवाल खड़े हुए थे,सारे सबूत साक्ष्य मिटा दिए गए। शक की सुई सत्ता के बहुत करीब प्रभावशाली नेता पर रुकती रही ,हम सदन में सड़कों पर लगातार कहते रहे कि मामले की सीबीआई जांच हाईकोर्ट या सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में होनी चाहिए जिससे सच सामने आ सके । अब स्पष्ट भी हो गया है, बीजेपी के पूर्व विधायक सुरेश राठौर की पत्नी ने सबके सामने उस नेता का नाम लिया है,हम सब की जो शंका थी वो सच साबित हो रही है । और ये स्पष्ट है कि इस मामले में शुरुआत से ही बीजेपी सरकार उस प्रभावशाली नेता को बचाने में लगी है ये लड़ाई न्याय की लड़ाई है ये पहाड़ की अस्मिता का प्रश्न है। भाजपा सरकार डरी हुई है सच को सामने नहीं लाना चाहती। सबूतों को नष्ट करना ये शुरुआत से ही बीजेपी की साजिश रही है। उन्होंने पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत का का जिक्र करते हुए ये भी कहा कि इससे बड़ी बात क्या हो सकती है कि पूर्व सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत ने कहा है कि कोई कोई भी कितना ही प्रभावशाली व्यक्ति क्यों न हो मेरे अपने परिवार का ही क्यों न हो,अगर वो दोषी है तो उसे सजा मिलनी ही चाहिए
वहीं प्रदर्शनकारियों का कहना है कि उत्तराखंड की बेटी अंकिता भंडारी को अब तक पूर्ण न्याय नहीं मिल पाया है, जिससे जनता में गहरी नाराजगी है। लोगों ने इस पूरे प्रकरण की सीबीआई जांच तथा उच्चतम न्यायालय की निगरानी में निष्पक्ष जांच की मांग दोहराई।। आयोजकों का कहना है कि यह मार्च अंकिता भंडारी को श्रद्धांजलि देने के साथ-साथ सरकार पर नैतिक दबाव बनाने का एक शांतिपूर्ण प्रयास होगा।
प्रदर्शन में शामिल लोगों ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि जब तक अंकिता को न्याय नहीं मिलता, तब तक आंदोलन जारी रहेगा। जनता का गुस्सा यह दर्शाता है कि यह मामला अब सिर्फ एक परिवार का नहीं, बल्कि पूरे समाज की संवेदना और न्याय की लड़ाई बन चुका है।