नैनीताल: सरोवर नगरी के समीप इस जगह खुला नैनीताल का पहला उत्तराखंड की संस्कृति को दर्शाता घुघुती होम स्टे!
उत्तराखंड से पलायन आज के समय के जब सबसे बड़ी समस्या बन चुका है तब नैनीताल के युवाओं ने पलायन को रोकने और उत्तराखंड की संस्कृति को संरक्षित करने की ओर एक अहम कदम उठाया है। इन युवाओं ने नैनीताल के समीप घुघूखाम मे नैनीताल का पहला उत्तराखंड शैली का होम स्टे खोला है। वैसे तो घुघूखाम अपनी सुन्दरता और वन्यजीव संरक्षण के लिए शुरू से ही आकर्षण का केन्द्र रहा है। इस बार यहां पर्यटको को प्राकृतिक सुन्दरता के साथ साथ उत्तराखंड की संस्कृति से रूबरू होने का भी मौका मिलेगा। इसी उद्देश्य से नैनीताल निवासी अंशुल साह ने यहां "घुघूती" होम स्टे/कैफे खोलने का निर्णय लिया।

घुघुती के संस्थापक अंशुल साह ने कहा कि हम इस होम स्टे के माध्यम से उत्तराखंड की संस्कृति को पर्यटको तक पहुंचाना चाहते है,साथ ही यहां से स्थानीय युवाओं को रोजगार देने की भी कोशिश रहेगी। उत्तराखंड की संस्कृति और लोक शैली पर आधारित घुघुती होम स्टे/कैफे में ज़्यादातर पहाड़ी व्यंजन परोसे जाएंगे। पर्यटकों की मांग रहती है कि उन्हें पहाड़ी नाश्ते के साथ प्राकृतिक सौंदर्य का भी आनंद मिले, इसका भी खास ख्याल रखा गया है।
पर्यटकों को सुबह के नाश्ते से लेकर रात के खाने में ठेठ पहाड़ी व्यंजनों का लुत्फ मिलेगा जिससे देवभूमि उत्तराखंड के नैनीताल के पहले होम स्टे से पर्यटक अपने साथ यहां की स्वीट मेमोरीज भी साथ ले जाएं और उनका बार बार आने के दिल भी करेगा। घुघुती होम स्टे को पहली ही नज़र में देखकर आपको उत्तराखंड की संस्कृति की झलक दिखाई देगी,बाहरी राज्यो में रह रहे उत्तराखंड के प्रवासी लोग जब उत्तराखंड घूमने आते है तो ऐसी जगह की डिमांड करते है जो उन्हें उनके घर की याद दिलाये, घुघुती होम स्टे ऐसा ही एक घर है जो आपको अपने पन का एहसास दिलाएगा।
इस प्रोजेक्ट को सफल बनाने मे आर्ट ऐस्पिरेन्ट के संस्थापक का उनके मित्र प्रमोद प्रसाद ने खूब साथ दिया। आर्ट ऐस्पिरेन्ट के कलाकार व डी॰एस॰बी॰ के फाईन आर्ट के विद्यार्थी युवराज सैनी, विकास कुमार, व ज्ञानेन्द्र गंगवार ने अपनी कला व रंगो के माध्यम से उत्तराखंड की संस्कृति को घुघूती होम स्टे मे उतारा। प्रोजेक्ट की रूपरेखा अंकिता साह राणा व सुशान्त राणा ने तैयार की है।