Aug 19, 2026 Login

नैनीताल:कभी इसी शहर ने बेहतरीन ओलंपिक खिलाड़ी देश को दिए थे आज यहाँ का स्पोर्ट्स ग्राउंड बन चुका है पार्किंग स्थल और पिकनिक स्पॉट

Nainital: Once this city had given the best Olympic players to the country, today the sports ground here has become a parking lot and picnic spot.

टोक्यो ओलम्पिक्स चल रहे है अमेरिका, जापान चीन एक बाद एक मेडल्स जीत रहे है वही भारत के खाते में अब तक एक ही मेडल आया।ऐसा नही है कि भारत मे बेहतरीन खिलाड़ियों की कोई कमी है बल्कि भारत मे क्रिकेट के अलावा किसी और खेल को गंभीरता से लिया ही नही जाता यही वजह की आज हम ओलम्पिक्स में केवल एक मेडल जीतने पर ही सोचते है कि ये काफी है।टोक्यो ओलम्पिक्स में चानू मीराबाई ने वेटलिफ्टिंग में रजत पदक जीत कर देश का नाम रौशन किया चारो ओर इस वक्त ओलम्पिक्स की ही चर्चाएं है महिला बॉक्सिंग में असम की लवलीना भी सेमीफाइनल में पहुंच चुकी है भारत के खाते में एक और मेडल लगभग तय ही समझिए।लवलीना को इंटरमीडिएट कोचिंग देने वाले अभिषेक साह उत्तराखंड के नैनीताल के रहने वाले है।उन्हें उत्तराखंड छोड़कर अन्य राज्यो की ओर रूख करना पड़ा क्योंकि यहां स्पोर्ट्स विजन की कमी थी। इसी तरह भारत मे कितने शहर होंगे जहाँ स्पोर्ट्स को उतनी एहमियत नही मिलती जितनी मिलनी चाहिए,फ़िलहाल हम उत्तराखंड और नैनीताल की बात कर रहे है । उत्तराखंड में स्पोर्ट्स कल्चर समाप्त होता जा रहाहै,एक वक्त ऐसा था जब नैनीताल से एक से बढ़कर एक खिलाड़ी निकले। नैनीताल शहर ने राजेन्द्र सिंह रावत और सैय्यद अली जैसे दो बेहतरीन ओलंपियन दिए है नैनीताल सिर्फ टूरिज्म और एजुकेशनल हब ही नही है बल्कि यहाँ स्पोर्ट्स हब भी हुआ करता था लेकिन फंड के अभाव और प्रशासन की अनदेखी की वजह से आज नैनीताल का प्रमुख खेल का मैदान पार्किन स्थल और पिकनिक स्पॉट बनता जा रहा है।

डीएसए स्पोर्ट्स ग्राउंड में पिकनिक मानते लोग

 

खेल का मैदान बना पार्किंग स्थल

नैनीताल में आज सिर्फ टूरिज्म की बात होती है स्पोर्ट्स विजन खत्म होता जा रहा है इसीलिए यहाँ के खिलाड़ी बाहरी राज्यो में जाकर खेलते है।अगर स्पोर्ट्स ऑथोरिटी ऑफ इंडिया डीएसए ग्राउंड को ओवरटेक कर ले तो नैनीताल से ही कई प्रतिभावान खिलाड़ी निकल सकते है यहां साफ सुथरा पर्यावरण है ताज़ी हवा है किसी भी खेल के लिए प्रैक्टिस करने के लिए इससे अच्छा माहौल भला कहा मिलेगा।शेरवुड कॉलेज से एक स्टूडेंट ओलम्पिक्स में गया क्योंकि कॉलेज की ओर से उसे पूरा स्पोर्ट मिला था अगर इसी तरह यहां खेलो पर ध्यान दिया जाए तो नैनीताल विश्वपटल पर अपनी कई बेहतरीन खिलाड़ी दे सकता है।डीएम नैनीताल ने खुद यही से पढ़ाई की है वो जानते है खेलो के मामले में नैनीताल का क्या इतिहास रहा है उन्होंने यहां का स्पोर्ट्स कल्चर देखा है 15 अगस्त 26 जनवरी को पहले डीएसए ग्राउंड में खूब खेलों का आयोजन हुआ करता था जो अब गायब हो चुके है यहां मेराथन होता है लेकिन लोकल प्रतिभागियों के लिए कोई प्राइज नही होता है जिससे उन्हें निराशा मिलती है।अगर नैनीताल में स्पोर्ट्स कल्चर को बढ़ावा मिले तो यकीनन नैनीताल अगले ओलम्पिक्स में कई इंटरनेशनल लेवल के खिलाड़ी दे सकता है