नैनीतालः स्कूल, मंदिर और आबादी क्षेत्रों के पास मदिरा दुकानों के लाइसेंस पर उठे सवाल! जनहित याचिका पर सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने सरकार से मांगा जवाब
नैनीताल। उत्तराखंड हाईकोर्ट ने नैनीताल में सौ मीटर के मानक को दरकिनार करके खोली गई मदिरा की दुकानों के खिलाफ दायर जनहित याचिका पर सुनवाई की। मामले की सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति रविन्द्र मैठाणी और न्यायमूर्ति शिधार्थ साह की खण्डपीठ ने राज्य सरकार को एक सप्ताह के भीतर स्थिति से अवगत कराने को कहा है। मामले की अगली सुनवाई 28 अप्रैल की तिथि नियत की है। मामले के अनुसार नैनीताल निवासी पवन जाटव ने जनहित याचिका दायर कर कहा है कि नैनीताल और भवाली में नियमों के विपरीत देशी, अंग्रेजी और बार चलाने का लाइसेंस दिया गया है। 2008 और 2020 की नियमावली के मुताबिक मदिरा की दुकानों को स्कूल, कालेज, मंदिर, गुरुद्वारा चर्च और मस्जिद से 100 मीटर के दायरे से बाहर होना चाहिए। सौ मीटर वहां से गिना जाएगा, जहां पर संस्थान का मुख्य द्वार होगा। लेकिन नैनीताल में आर्य समाज के पास देशी मदिरा की दुकान खोली गयी। जब इस बारे में आबकारी विभाग से रिपोर्ट मांगी गयी तो उनके द्वारा बताया गया कि आर्य समाज चौथे मंजिल में है। वहां से इसकी दूरी सौ मीटर से अधिक है, लेकिन उसके मुख्य द्वार से कम है। जबकि यहीं पर प्राईमरी स्कूल भी है। सनवाल स्कूल के पास भी बार खोलने का लाइसेंस दिया गया है। भवाली में भी हनुमान मंदिर के पास बार खोला गया है। वहीं नैनीताल हल्द्वानी मोटर मार्ग के डोलमार में वन पंचायत की भूमि पर मन्दिरा की दुकान खोली गई है। जबकि ये दुकान सरपंच के द्वारा स्थानीय उत्पादों को बेचने के लिए दी गयी थी। इस सम्बंध में उनके द्वारा प्रशासन को प्रत्यावेदन दिया गया। इसका उत्तर देते हुए कहा गया कि ये सभी दुकानें और बार 100 मीटर के दायरे से बाहर स्थित है। जनहित याचिका में कोर्ट से प्रार्थना की गई है कि इनकी जांच कराई जाय। अगर सौ मीटर के दायरे में आते है तो इन्हें संस्थानों से बाहर हटाया जाय।