नैनीताल:SDM से IAS तक का सफर!भीमताल की सौम्या गर्ब्याल ने UPSC में 822वीं रैंक लाकर रचा इतिहास!बढ़ाया उत्तराखंड का मान

Nainital: Journey from SDM to IAS! Soumya Garbyal of Bhimtal created history by securing 822nd rank in UPSC! She raised the prestige of Uttarakhand.

नैनीताल जिले के भीमताल की रहने वाली शांत स्वभाव की सौम्या गर्ब्याल ने अपनी मेहनत, लगन और दृढ़ संकल्प के बल पर एक प्रेरणादायक उपलब्धि हासिल की है। संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) द्वारा शुक्रवार को घोषित सिविल सेवा परीक्षा के अंतिम परिणाम में सौम्या ने 822वीं रैंक प्राप्त कर भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) में जगह बनाई है।


वर्तमान में सौम्या गर्ब्याल अल्मोड़ा जिले की भनौली, जैती और लमगड़ा तहसीलों में उप जिलाधिकारी (SDM) के पद पर अपनी सेवाएं दे रही हैं। सरकारी जिम्मेदारियों के साथ-साथ उन्होंने यूपीएससी की तैयारी जारी रखी और आखिरकार अपने सपने को साकार कर दिखाया। उनकी इस उपलब्धि से भीमताल ही नहीं, पूरे नैनीताल जिले में खुशी और गर्व का माहौल है।
सौम्या मूल रूप से पिथौरागढ़ जिले के धारचूला क्षेत्र के गर्ब्यांग गांव की निवासी हैं, जबकि वर्तमान में उनका परिवार भीमताल में रहता है। इससे पहले वर्ष 2024 में उन्होंने पीसीएस परीक्षा में भी शानदार प्रदर्शन करते हुए 10वीं रैंक हासिल की थी।
सौम्या की माता बीना गर्ब्याल नैनीताल के अभिसूचना विभाग में सब इंस्पेक्टर के पद पर कार्यरत हैं, जबकि उनके पिता देव सिंह गर्ब्याल हैं। उनकी बड़ी बहन साक्षी गर्ब्याल महाराष्ट्र बैंक की पीलीभीत शाखा में मैनेजर के पद पर कार्यरत हैं।
शिक्षा की बात करें तो सौम्या ने हाईस्कूल की पढ़ाई भीमताल के एचजीएस से की, इंटरमीडिएट नैनीताल के मोहन लाल साह बालिका विद्या मंदिर से  हुई और इसके बाद दिल्ली विश्वविद्यालय के हिंदू कॉलेज से स्नातक की डिग्री प्राप्त की।

 


सौम्या की माता बीना गर्ब्याल ने बताया कि उनकी बेटी बचपन से ही मेधावी और लक्ष्य के प्रति समर्पित रही है, ड्यूटी के साथ-साथ यूपीएससी जैसी कठिन परीक्षा की तैयारी करना आसान नहीं होता, लेकिन सौम्या ने अपने अनुशासन और मेहनत से यह साबित कर दिया कि यदि इरादे मजबूत हों तो कोई भी लक्ष्य दूर नहीं रहता।
सौम्या की इस सफलता ने न केवल धारचूला और भीमताल का मान बढ़ाया है, बल्कि यह संदेश भी दिया है कि कठिन परिस्थितियों और जिम्मेदारियों के बीच भी सपनों को साकार किया जा सकता है। उनकी यह उपलब्धि युवाओं के लिए एक प्रेरणा बनकर सामने आई है।