नैनीताल:रख हौसला कर फैसला तुझे वक्त बदलना है!ऐसा ही कुछ कर दिखाया न्यूरोलॉजिकल डिसऑर्डर से जूझते छात्र श्रीवारी साह ने, 10वीं की परीक्षा में 62.8% अंक लाकर रचा इतिहास

Nainital: "Hold onto your courage, make your resolve—you are destined to change the times!" This is precisely what Shrivari Sah—a student battling a neurological disorder—has demonstrated, making his

नैनीताल। 

गंभीर न्यूरोलॉजिकल डिसऑर्डर और दृष्टिबाधिता जैसी चुनौतियों से जूझते हुए नैनीताल के छात्र श्रीवारी साह ने हाईस्कूल परीक्षा में 62.8 प्रतिशत अंक प्राप्त कर एक प्रेरणादायक उदाहरण पेश किया है। उनकी यह सफलता केवल एक परीक्षा परिणाम नहीं, बल्कि हौसले, संघर्ष और निरंतर प्रयास की सच्ची कहानी है।

श्रीवारी साह बचपन से ही एक न्यूरोलॉजिकल डिसऑर्डर से पीड़ित हैं। इस प्रकार की बीमारी में मस्तिष्क (ब्रेन) की कार्यप्रणाली प्रभावित हो जाती है, जिससे व्यक्ति को देखने, समझने, याद रखने और प्रतिक्रिया देने में कठिनाई होती है। श्रीवारी के मामले में, वे चीजों को देख तो सकते हैं, लेकिन मस्तिष्क तक सही तरीके से जानकारी पहुंचने और उसे समझने में परेशानी होती है। यही वजह है कि पढ़ाई उनके लिए सामान्य बच्चों की तुलना में कहीं अधिक कठिन रही।

इस बीमारी के कारण उन्हें कई बार अचानक बेहोशी (ब्लैकआउट या दौरे) की समस्या का भी सामना करना पड़ता है, जो पढ़ाई और रोजमर्रा की जिंदगी दोनों में बाधा बनती है। इसके अलावा वे लगभग 75 प्रतिशत विजुअल डिसएबिलिटी से भी प्रभावित हैं, जिससे पढ़ना-लिखना और भी चुनौतीपूर्ण हो जाता है।

चिकित्सकों के अनुसार, न्यूरोलॉजिकल डिसऑर्डर में दिमाग और शरीर के बीच तालमेल प्रभावित होता है। इसके चलते बच्चों में लर्निंग डिसएबिलिटी, ध्यान केंद्रित करने में कमी, याददाश्त की समस्या और शारीरिक समन्वय में कठिनाई जैसी दिक्कतें सामने आती हैं। ऐसे बच्चों को सामान्य पढ़ाई के साथ-साथ विशेष सहयोग, थेरेपी और अतिरिक्त समय की आवश्यकता होती है।

इन तमाम चुनौतियों के बावजूद श्रीवारी ने हार नहीं मानी। उन्होंने CBSE बोर्ड के नियमों के तहत ‘राइटर’ (लेखक) की सहायता से परीक्षा दी, जो विशेष जरूरत वाले विद्यार्थियों के लिए उपलब्ध सुविधा है।

उन्होंने नैनीताल के Long View Public School Nainital से परीक्षा देते हुए 62.8 प्रतिशत अंक हासिल किए। यह उपलब्धि उनके आत्मविश्वास, मेहनत और मजबूत इच्छाशक्ति का प्रमाण है।

श्रीवारी के माता-पिता श्वेता साह और अधिवक्ता नीरज साह ने बताया कि उन्होंने हर कठिन समय में अपने बेटे का हौसला बढ़ाया और उसे कभी हार नहीं मानने दी। उनका कहना है कि अगर परिवार का साथ और सकारात्मक सोच हो, तो कोई भी चुनौती बड़ी नहीं होती।

श्रीवारी की इस सफलता पर विद्यालय परिवार, शिक्षकों और स्थानीय लोगों ने खुशी जताई है। सभी ने इसे एक प्रेरणादायक उपलब्धि बताते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की है।