खेत में उतरे डीएम: हाथ में दरांती थाम खुद काटी गेहूं की फसल, किसानों के बीच पहुंचकर जाना पैदावार का हाल
रुद्रपुर। ऊधम सिंह नगर के जिलाधिकारी नितिन सिंह भदौरिया का एक अलग ही अंदाज देखने को मिला, जब वे प्रोटोकॉल छोड़ सीधे किसानों के बीच गेहूं के खेत में उतर गए। हाथ में दरांती लेकर उन्होंने न केवल गेहूं की फसल काटी, बल्कि 'क्रॉप कटिंग' (फसल कटाई प्रयोग) की वैज्ञानिक प्रक्रिया को अपनी देखरेख में संपन्न कराकर उत्पादकता का सटीक आकलन भी किया। तहसील रुद्रपुर के अंतर्गत ग्राम भूरारानी में काश्तकार अशोक गांधी के खेत में आयोजित इस विशेष कार्यक्रम में जिलाधिकारी ने स्वयं पहुंचकर निरीक्षण किया। वहां प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के मानकों के अनुसार, 43.30 वर्गमीटर के एक त्रिभुजाकार प्लॉट का चयन किया गया था। डीएम ने स्वयं दरांती चलाई और फसल काटकर उसकी तौल करवाई। इस निर्धारित क्षेत्र से कुल 17.900 किलोग्राम उपज प्राप्त हुई, जिसके आधार पर अब क्षेत्र की औसत पैदावार का डेटा तैयार किया जाएगा।
मौके पर मौजूद अधिकारियों और किसानों को संबोधित करते हुए जिलाधिकारी ने बताया कि ये प्रयोग केवल एक औपचारिक प्रक्रिया नहीं हैं, बल्कि यह देश की खाद्य नीति का आधार हैं। उन्होंने कहा इन्हीं आंकड़ों के आधार पर तय होता है कि फसल नुकसान की स्थिति में किसानों को कितना बीमा क्लेम या मुआवजा मिलना चाहिए। उत्पादकता के आंकड़ों से सरकार को आगामी खाद्य सुरक्षा और आपूर्ति की रणनीति बनाने में मदद मिलती है। प्रशासन की मौजूदगी में कटाई होने से आंकड़ों में पारदर्शिता बनी रहती है। फसल कटाई के बाद डीएम भदौरिया ने काश्तकारों से संवाद किया और उनसे अपील की कि वे अपनी मेहनत की फसल को केवल सरकारी क्रय केंद्रों पर ही बेचें। उन्होंने स्पष्ट किया कि इससे किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य का लाभ मिलेगा और बिचौलियों से सुरक्षा होगी। साथ ही, उन्होंने पर्यावरण संरक्षण की अपील करते हुए किसानों को पराली न जलाने की सख्त सलाह दी। जिलाधिकारी के इस जमीन से जुड़े प्रयास की स्थानीय किसानों ने काफी सराहना की। किसानों का कहना है कि जब जिले का सबसे बड़ा अधिकारी खुद खेत में आकर फसल काटता है, तो इससे प्रशासन के प्रति विश्वास बढ़ता है और सरकारी योजनाओं की जमीनी हकीकत का सही पता चलता है। इस दौरान राजस्व विभाग और कृषि विभाग के तमाम बड़े अधिकारी भी उपस्थित रहे।