अब 'नैना' की नजर से नहीं बच पाएंगे संदिग्ध: रेलवे स्टेशन हो या दफ्तर, एआई मॉडल रखेगा हर हलचल पर पैनी नजर
देहरादून। सुरक्षा के क्षेत्र में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस एक नए युग की शुरुआत करने जा रहा है। अब भारी भीड़ के बीच छिपे संदिग्धों या रेलवे स्टेशनों पर लावारिस वस्तुओं की पहचान करना बेहद आसान होगा। 'सैक्निनजाज' (Sacninjas) कंपनी द्वारा विकसित 'नैना' (NAINA) एआई मॉडल अपनी अनूठी खूबियों के साथ सुरक्षा व्यवस्था को हाई-टेक बनाने के लिए तैयार है। यह मॉडल न केवल सुरक्षा के लिहाज से, बल्कि स्वास्थ्य आपातकाल और परिवहन नियमों को लागू करने में भी क्रांतिकारी साबित हो सकता है।
सैक्निनजाज के निदेशक अमोल के अनुसार, नैना एआई की सबसे बड़ी ताकत इसकी 'सटीक पहचान' है। यह मॉडल कैमरों के जरिए भीड़ में मौजूद किसी भी संदिग्ध व्यक्ति या वस्तु को तत्काल स्कैन कर उसकी संदिग्धता का प्रतिशत बता देता है। यदि किसी व्यक्ति के पास कोई हथियार है, तो यह एआई उसे भी पहचान लेगा और सुरक्षाकर्मियों को तुरंत अलर्ट भेज देगा। कंपनी वर्तमान में इस मॉडल को दिल्ली मेट्रो में लागू करने की योजना पर काम कर रही है। नैना एआई का उपयोग केवल सार्वजनिक स्थानों तक सीमित नहीं है। कॉरपोरेट ऑफिसों में इसे कर्मचारियों की सुरक्षा के लिए लगाया जा सकता है। यह एआई हर कर्मचारी की सामान्य गतिविधियों को नोट करता है। यदि अचानक किसी कर्मचारी को दिल का दौरा (हार्ट अटैक) पड़ता है या उसकी तबीयत बिगड़ती है, तो नैना तुरंत कंपनी प्रबंधन को अलर्ट भेजेगा, जिससे समय रहते पीड़ित को इलाज मिल सके। हाईवे और एक्सप्रेस-वे पर हादसों के समय अक्सर पुलिस और एम्बुलेंस पहुंचने में देरी हो जाती है। नैना इस समस्या का समाधान करता है। दुर्घटना होते ही यह एआई मॉडल उसे पहचान कर संबंधित पुलिस और स्वास्थ्य टीमों को तत्काल लोकेशन और अलर्ट भेज देगा। उत्तराखंड जैसे पहाड़ी राज्य के लिए, जहाँ आपदाएं और सड़क हादसे एक चुनौती हैं, यह तकनीक काफी कारगर हो सकती है। नैना एआई परिवहन विभाग के लिए भी किसी वरदान से कम नहीं है। वर्तमान कैमरे केवल नंबर प्लेट स्कैन करते हैं, लेकिन नैना उससे कहीं आगे है। यह सीट बेल्ट न लगाने या अन्य यातायात नियमों का उल्लंघन करने वाले वाहनों को खुद ही पहचान लेगा और बिना किसी मानवीय हस्तक्षेप के स्वतः चालान की कार्रवाई कर देगा। चारधाम यात्रा हो या राज्य की महत्वपूर्ण सुरक्षा व्यवस्था, 'नैना' एआई मॉडल उत्तराखंड की बदलती जरूरतों के लिए एक सशक्त कवच बन सकता है। तकनीक का यह नया अवतार सुरक्षा और सेवा दोनों मोर्चों पर मील का पत्थर साबित होगा।