मई में तपने लगा नैनीताल: 35 डिग्री के पार पहुंचने का अनुमान! पर्यटन और सेहत पर बढ़ा खतरा
नैनीताल। उत्तराखंड की ‘समर कैपिटल’ माने जाने वाले नैनीताल में इस बार मई की गर्मी ने लोगों को चौंका दिया है। आमतौर पर सुहावने मौसम और ठंडी हवाओं के लिए मशहूर नैनीताल में अब तापमान लगातार बढ़ रहा है। भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) के अनुसार 18 से 22 मई 2026 के बीच राज्य में तापमान 1 से 3 डिग्री सेल्सियस तक बढ़ सकता है और नैनीताल सहित पर्वतीय जिलों में अधिकतम तापमान 35 से 40 डिग्री के बीच पहुंचने की आशंका जताई गई है। इसके बाद प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग भी अलर्ट मोड में आ गए हैं। राज्य आपातकालीन परिचालन केंद्र (SEOC) की ओर से सभी जिलाधिकारियों को हीटवेव और बढ़ती गर्मी को लेकर सतर्क रहने के निर्देश दिए गए हैं। अस्पतालों में ORS, आईवी फ्लूड और जरूरी दवाओं का पर्याप्त स्टॉक रखने, एंबुलेंस सेवाओं को हाई अलर्ट पर रखने और हीट स्ट्रोक के मरीजों के लिए त्वरित उपचार सुनिश्चित करने को कहा गया है।
पिछले पांच वर्षों में मई में कितना रहा नैनीताल का तापमान?
आईएमडी के उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार नैनीताल और आसपास के पर्वतीय क्षेत्रों में मई के दौरान तापमान लगातार ऊपर जा रहा है।
वर्ष 2021 में अधिकतम तापमान करीब 27.8°C दर्ज हुआ।
2022 में यह बढ़कर लगभग 30.5°C तक पहुंच गया।
2023 में अधिकतम तापमान 28.8°C रहा।
2024 में मई के दौरान 31.7°C तक तापमान रिकॉर्ड किया गया।
2025 में अधिकतम तापमान करीब 28.4°C दर्ज हुआ।
पर्वतीय क्षेत्रों में तापमान का यह लगातार बढ़ना जलवायु परिवर्तन, बढ़ते कंक्रीटीकरण, वाहनों के दबाव और जंगलों में कमी जैसे कारणों से जुड़ा हुआ है। नैनीताल जैसे हिल स्टेशन, जो कभी मैदानी इलाकों की तुलना में काफी ठंडे माने जाते थे, अब वहां भी गर्मी का असर स्पष्ट दिखाई देने लगा है। गर्मी बढ़ने के साथ एक ओर मैदानी इलाकों से बड़ी संख्या में पर्यटक नैनीताल पहुंच रहे हैं, वहीं दूसरी ओर स्थानीय लोगों और कारोबारियों के सामने नई चुनौतियां भी खड़ी हो रही हैं। होटल व्यवसायियों के अनुसार वीकेंड और छुट्टियों में पर्यटकों की संख्या तेजी से बढ़ रही है, लेकिन अत्यधिक गर्म मौसम के कारण दिन के समय माल रोड और झील क्षेत्र में भीड़ कम दिखाई देने लगी है। स्थानीय व्यापारियों का कहना है कि अगर तापमान इसी तरह बढ़ता रहा तो लंबे समय में नैनीताल की “कूल डेस्टिनेशन” वाली पहचान प्रभावित हो सकती है। बढ़ती गर्मी के कारण पानी की मांग, बिजली की खपत और ट्रैफिक दबाव भी लगातार बढ़ रहा है। डॉक्टरों के मुताबिक पहाड़ी क्षेत्रों में रहने वाले लोग अत्यधिक गर्म मौसम के लिए उतने अभ्यस्त नहीं होते, इसलिए डिहाइड्रेशन, थकान, चक्कर आना और हीट एग्जॉशन जैसी समस्याएं तेजी से बढ़ सकती हैं। खासकर बुजुर्गों, बच्चों और हृदय रोगियों को दोपहर के समय बाहर निकलने से बचने की सलाह दी गई है। स्वास्थ्य विभाग ने लोगों से पर्याप्त पानी पीने, हल्के कपड़े पहनने और सीधे धूप में लंबे समय तक रहने से बचने की अपील की है। कभी मई-जून में ठंडी हवाओं और हल्की ठिठुरन के लिए मशहूर नैनीताल अब गर्मी के नए रिकॉर्ड दर्ज करने लगा है। मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि यदि आने वाले वर्षों में तापमान वृद्धि की यही रफ्तार रही तो उत्तराखंड के पर्वतीय पर्यटन स्थलों का पारिस्थितिक संतुलन और पर्यटन पैटर्न दोनों प्रभावित हो सकते हैं।
