रेप केस की जांच के दौरान रेनू भाटिया के एक सवाल ने मचा दिया बवाल!अगर आपकी बेटी होती तो,स्टाफ कहां था तब?भड़का नर्सिंग स्टाफ, महिला आयोग अध्यक्ष से माफी की मांग।
कुरुक्षेत्र के लोकनायक जयप्रकाश (LNJP) सिविल अस्पताल में 15 वर्षीय किशोरी से कथित दुष्कर्म के मामले को लेकर विवाद लगातार गहराता जा रहा है। मामले की जांच के लिए अस्पताल पहुंचीं हरियाणा महिला आयोग की अध्यक्ष रेणु भाटिया की टिप्पणियों पर अब नर्सिंग स्टाफ ने कड़ा विरोध दर्ज कराया है।

निरीक्षण के दौरान रेणु भाटिया ने अस्पताल स्टाफ से सवाल किया था कि यदि वार्ड में भर्ती किशोरी उनकी अपनी बेटी होती, तो क्या उसे कुछ समय के लिए भी अकेला छोड़ दिया जाता। उन्होंने यह भी जानना चाहा कि जब वार्ड में तीन कर्मचारियों की ड्यूटी थी, तब घटना के समय कोई भी मौके पर मौजूद क्यों नहीं था।
महिला आयोग अध्यक्ष ने दावा किया कि पीड़िता के साथ भर्ती एक अन्य मरीज ने अस्पताल कर्मियों को आरोपी डॉक्टर की संदिग्ध गतिविधियों की जानकारी दी थी। इसके बावजूद समय रहते कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई। उन्होंने अस्पताल प्रशासन से यह भी पूछा कि आरोपी डॉक्टर नाबालिग बच्ची को 100 रुपये क्यों दे रहा था और उसके पारिवारिक हालात के बारे में असामान्य रुचि क्यों दिखा रहा था। उनके अनुसार ये ऐसे सवाल हैं जिनकी गंभीरता से जांच होनी चाहिए।

करीब एक घंटे तक अस्पताल में चली समीक्षा के दौरान रेणु भाटिया ने अस्पताल के वरिष्ठ अधिकारियों से भी जवाब-तलब किया। उन्होंने सुरक्षा व्यवस्था, निगरानी तंत्र और स्टाफ की भूमिका पर कई सवाल उठाए।
हालांकि महिला आयोग अध्यक्ष की टिप्पणियों के बाद नर्सिंग स्टाफ में नाराजगी फैल गई। सोमवार को नर्सों ने पेन-डाउन और वर्क सस्पेंड कर विरोध प्रदर्शन किया तथा रेणु भाटिया के खिलाफ नारेबाजी की। प्रदर्शनकारी नर्सों का कहना है कि महिला आयोग अध्यक्ष ने पूरे नर्सिंग समुदाय को कटघरे में खड़ा कर दिया है, जिससे उनके सम्मान और पेशेवर छवि को ठेस पहुंची है।
नर्सिंग कर्मचारियों ने मांग की है कि रेणु भाटिया सार्वजनिक रूप से अपने बयान पर स्पष्टीकरण दें। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि ऐसा नहीं किया गया तो आंदोलन को पूरे हरियाणा में विस्तार दिया जाएगा।
फरीदाबाद में मीडिया से बातचीत के दौरान रेणु भाटिया ने अपने बयान का बचाव करते हुए कहा कि उनकी टिप्पणियां अस्पताल में ड्यूटी पर तैनात नर्सिंग अधिकारियों की जिम्मेदारी से जुड़ी थीं और वह अपने रुख पर कायम हैं।
उधर, ऑल इंडिया गवर्नमेंट नर्स फेडरेशन ने मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी को पत्र भेजकर महिला आयोग अध्यक्ष को पद से हटाने की मांग की है। संगठन का कहना है कि बिना जांच पूरी हुए नर्सिंग स्टाफ पर सवाल उठाना उचित नहीं है।
पेन-डाउन प्रदर्शन के दौरान नर्सिंग स्टाफ की प्रतिनिधि अनीता कश्यप ने कहा कि महिला आयोग अध्यक्ष द्वारा लगाए गए आरोपों से पूरे नर्सिंग समुदाय की छवि प्रभावित हुई है। उन्होंने कहा कि नर्सिंग कर्मचारी हमेशा मरीजों की सेवा और सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हैं तथा तथ्यों के सामने आए बिना किसी वर्ग को दोषी ठहराना न्यायसंगत नहीं माना जा सकता।
इस बीच, अस्पताल में नाबालिग से कथित दुष्कर्म के मामले की जांच जारी है और प्रशासनिक स्तर पर भी विभिन्न पहलुओं की पड़ताल की जा रही है। मामले ने अस्पतालों में मरीजों की सुरक्षा, निगरानी व्यवस्था और जवाबदेही को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।