नैनीताल: Congratulations!युवा क्रिकेटर देवराज चौधरी का कूच बिहार ट्रॉफी के लिए अंडर 19 में हुआ सलेक्शन!सचिन तेंदुलकर युवराज सहित कई दिग्गज खिलाड़ी खेल चुके है कूच बिहार ट्रॉफी के लिए
नैनीताल:2/12/2022
सरोवर नगरी नैनीताल सिर्फ पर्यटन ही नही बल्कि स्पोर्ट्स कल्चर के लिए भी प्रसिद्ध है। यहां के डीएसए मैदान से खेल कर कई प्रतिभाशाली खिलाड़ी राष्ट्रीय स्तर पर अपना परचम लहरा चुके है। नैनीताल का नाम आज फिर यहाँ के युवा क्रिकेट खिलाड़ी देव राज चौधरी ने रौशन किया है। उनका चयन कूंच विहार ट्रॉफी के लिए अंडर 19 टीम में हुआ है।
देवराज को बचपन से ही क्रिकेट के प्रति खासी रुचि रही है। उनकी इस रुचि को देखते हुए उनके पिता नैनीताल के जाने माने व्यवसायी विमल चौधरी ने उनका साथ दिया। उन्हीं के प्रयासों से देवराज को नैनीताल की वी विहान क्रिकेट टीम में खेलने का मौका मिला जिसके बाद देवराज क्रिकेट की प्रैक्टिस वी विहान के साथ डीएसए मैदान में ही करने लगे। देवराज अच्छे बैट्समैन भी है और अच्छे बॉलर भी। उनको अभी कूंच बिहार ट्रॉफी में अपनी प्रतिभा दिखाने का मौका मिला है। देवराज क्रिकेट एसोसिएशन ऑफ उत्तराखंड का इंटर स्टेट अंडर 19 में प्रतिनिधित्व करेंगे ये टूर्नामेंट बीसीसीआई द्वारा आयोजित किया जाएगा।

देवराज हर सुबह डीएसए मैदान में प्रैक्टिस करते है ताकि उन्हें स्टेट लेवल और नेशनल/इंटरनेशनल लेवल पर क्रिकेट खेलने का मौका मिले और वो नैनीताल का नाम अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी रौशन कर सकें।
देवराज अपने माता पिता और बाकी परिवार के साथ अयारपाटा हिल्स नैनीताल में रहते है। परिवार वालो का उन्हें भरपूर सहयोग मिला है। देवराज पढ़ाई में भी तेज रहे।
उनकी इस उपलब्धि पर वी विहान क्रिकेट टीम के सदस्यों सहित तमाम लोगों ने बधाई दी।सीनियर विजय सिंह पाल, बिलाल,रवि बिष्ट,सौरव रावत,प्रदीप उप्रेती,जितेंद्र राणा,जुनैद अहमद,विमल चौधरी,जगदीश बवाड़ी,मुकेश मंटू जोशी,सहित तमाम लोगो ने उनके सुनहरे भविष्य की कामना की।
आपको बता दें कि कूच बिहार ट्रॉफी अंडर-19 खिलाड़ियों के लिए भारत का राष्ट्रीय चार दिवसीय क्रिकेट टूर्नामेंट है। यह 1945-46 सीज़न के बाद से सालाना आयोजित किया जाता है। यह भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड द्वारा चलाया जाता है
कई टेस्ट खिलाड़ी युवावस्था में कूचबिहार ट्रॉफी में प्रमुख रहे हैं। 1954-55 के फाइनल में नॉर्थ ज़ोन स्कूलों की जीत में बूढ़ी कुंदरन और रुसी सुरती ने शतक बनाए। अशोक मांकड़ ने 1960-61 से 1962-63 तक लगातार तीन सत्रों के फाइनल में पश्चिम क्षेत्र के स्कूलों का प्रतिनिधित्व किया। करसन घावरी और मोहिंदर अमरनाथ 1967-68 में सेमीफाइनल में विरोधी टीम के प्रमुख गेंदबाज थे। सचिन तेंदुलकर ने 1988-89 में बॉम्बे अंडर-19 के लिए 214 रन बनाए थे। उन्होंने एक साल से भी कम समय के बाद टेस्ट क्रिकेट में पदार्पण किया।
1999-2000 में फाइनल में युवराज सिंह ने पंजाब अंडर-19 में 5 विकेट पर 839 के कुल योग में 358 रन बनाए। युवराज के अनुसार, कूच बिहार ट्रॉफी उस समय के युवा क्रिकेटरों के लिए रणजी ट्रॉफी के बाद दूसरे स्थान पर थी, लेकिन इसमें गिरावट आई है। तब से स्थिति में, इंडियन प्रीमियर लीग द्वारा प्रतिस्थापित किया गया।