Oct 04, 2026 Login

ऊधम सिंह नगरः RD-FD के नाम पर लोगों से 15 से 20 लाख रुपये की वसूली! रकम लेकर फरार चल रहा कलेक्शन एजेंट गिरफ्तार, कंपनी के चेयरमैन, एमडी और डायरेक्टर के नाम भी आए सामने

Udham Singh Nagar: ₹15–20 lakh collected from people under the guise of RD and FD schemes! The collection agent who absconded with the money has been arrested; the names of the company's Chairman, MD

सितारगंज। RD और FD के नाम पर लोगों से छोटी-छोटी किस्तों में लाखों रुपये जमा कराने और बाद में रकम वापस नहीं करने के मामले में सितारगंज पुलिस ने करीब छह महीने से फरार चल रहे एक वांछित कलेक्शन एजेंट को गिरफ्तार किया है। पुलिस के मुताबिक, आरोपी बांसुरी म्युचुअल बेनिफिट इंडिया निधि लिमिटेड के नाम पर लोगों के RD/FD खाते खुलवाकर उनसे नियमित रूप से धनराशि एकत्र करता था। विवेचना में करीब 50 से 60 खाताधारकों से 15 से 20 लाख रुपये की धनराशि एकत्र किए जाने की बात सामने आई है। पुलिस के अनुसार, गिरफ्तार आरोपी की पहचान राजेन्द्र प्रसाद पुत्र सीताराम, निवासी ग्राम रम्पुरा नत्थू, थाना बरखेड़ा, जनपद पीलीभीत, उत्तर प्रदेश, उम्र 42 वर्ष के रूप में हुई है। आरोपी को दो अक्टूबर 2026 की शाम सितारगंज मंडी क्षेत्र से गिरफ्तार किया गया। पुलिस के मुताबिक, सात जनवरी 2026 को मझरा सिसौना निवासी रविता राणा ने कोतवाली सितारगंज में शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत में आरोप लगाया गया कि राजेन्द्र प्रसाद ने बांसुरी म्युचुअल बेनिफिट इंडिया निधि लिमिटेड के नाम पर लोगों के RD और FD खाते खुलवाए और नियमित रूप से धनराशि जमा कराई। खाताधारकों को निर्धारित अवधि पूरी होने के बाद जमा रकम और मैच्योरिटी राशि वापस मिलने का भरोसा दिया गया था, लेकिन अवधि पूरी होने के बाद रकम वापस नहीं की गई। शिकायत के आधार पर कोतवाली सितारगंज में FIR संख्या 18/2026 के तहत धारा 316(5) BNS में मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच के दौरान पुलिस ने पीड़ितों और गवाहों के बयान दर्ज किए। पुलिस के अनुसार, इस दौरान 11 मूल खाता पुस्तिकाएं, 10 मूल बॉन्ड पेपर और सात मूल किस्त रसीदें भी कब्जे में ली गईं। जांच में सामने आया कि राजेन्द्र प्रसाद खुद को कंपनी का फील्ड मार्केटिंग और कलेक्शन एजेंट बताकर लोगों को RD/FD खाते खुलवाने के लिए प्रेरित करता था। इसके बाद वह खाताधारकों से प्रतिदिन 50, 100, 150 रुपये या निर्धारित किस्त के रूप में नकद रकम लेता था। जमा रकम की प्रविष्टि खाताधारकों की खाता पुस्तिका में की जाती थी और उस पर उसके हस्ताक्षर भी होते थे। पूछताछ में आरोपी ने पुलिस को बताया कि वह पांच जून 2023 को कंपनी में कलेक्शन एजेंट के रूप में नियुक्त हुआ था। इसके बाद वह सितारगंज क्षेत्र में लोगों के खाते खुलवाने और उनसे धनराशि जमा कराने का काम करता था। पुलिस के अनुसार, आरोपी ने करीब 50 से 60 लोगों के खाते खुलवाए और उनसे करीब 15 से 20 लाख रुपये की धनराशि एकत्र की। आरोपी के बयान के मुताबिक, यह रकम अजय गंगवार और राजकुमार गंगवार को दी गई। उसने अजय गंगवार के कहने पर अपने बैंक खाते से ऑनलाइन रकम ट्रांसफर करने की बात भी पुलिस को बताई है। खाताधारकों को प्रतिदिन 50, 100 या 150 रुपये जैसी छोटी रकम जमा करने के लिए कहा जाता था और करीब एक वर्ष की अवधि पूरी होने पर मैच्योरिटी राशि मिलने का भरोसा दिलाया जाता था। लेकिन अवधि पूरी होने के बाद जब खाताधारकों को रकम नहीं मिली तो मामला पुलिस तक पहुंचा। पुलिस के अनुसार, खाताधारकों को रकम वापस नहीं मिलने के बाद राजेन्द्र प्रसाद ने सितारगंज क्षेत्र में कलेक्शन का काम बंद कर दिया और करीब छह महीने से फरार चल रहा था। पुलिस उसकी तलाश कर रही थी। दो अक्टूबर को उपनिरीक्षक जगत सिंह साही और कांस्टेबल कमल गहतौड़ी चौकी सिडकुल क्षेत्र में ड्यूटी पर थे। इसी दौरान मुखबिर से सूचना मिली कि मुकदमे में वांछित राजेन्द्र प्रसाद सितारगंज मंडी में मौजूद है। सूचना मिलते ही पुलिस टीम ने मौके पर पहुंचकर घेराबंदी की और आरोपी को गिरफ्तार कर लिया।

पूछताछ में तीन और नाम सामने आए
पुलिस के मुताबिक, गिरफ्तार आरोपी से पूछताछ और अब तक की विवेचना में अजय गंगवार, राजकुमार गंगवार और गीता देवी के नाम सामने आए हैं। आरोपी ने अजय गंगवार को कंपनी का चेयरमैन, राजकुमार गंगवार को मैनेजिंग डायरेक्टर और गीता देवी को डायरेक्टर बताया है। पुलिस ने उपलब्ध साक्ष्यों और विवेचना के आधार पर मामले में धारा 61(2)/3(5) BNS की बढ़ोतरी की है। सामने आए अन्य व्यक्तियों की भूमिका की जांच की जा रही है। पुलिस का कहना है कि उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आगे की वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।