Oct 03, 2026 Login

बागेश्वरः 13 साल बाद कफनी ग्लेशियर पहुंची सेना! ट्रैक को फिर खोलने की संभावनाओं का लिया जायजा, तिम्फू ग्लेशियर में 6106 मीटर ऊंचे अनाम कोल पर फतह

Bageshwar: Army reaches Kafni Glacier after 13 years! Assessed the feasibility of reopening the trek; conquered an unnamed 6,106-meter-high col at Timphu Glacier.

बागेश्वर। वर्ष 2013 की विनाशकारी आपदा के करीब 13 साल बाद बागेश्वर के कफनी ग्लेशियर ट्रैक पर सेना का अभियान पहुंचा है। 12 कुमाऊं की टीम ने पिंडारी और कफनी ग्लेशियर क्षेत्र में अभियान चलाकर क्षतिग्रस्त ट्रैक की मौजूदा स्थिति का जायजा लिया। सेना के इस अभियान का मुख्य उद्देश्य ट्रैक की स्थिति और इसे भविष्य में दोबारा ट्रैकिंग के लिए खोले जाने की संभावनाओं का आकलन करना रहा। अभियान के दौरान क्षेत्र में स्वच्छता अभियान भी चलाया गया। 18 से 29 सितंबर तक चले अभियान में 12 कुमाऊं का दल बागेश्वर से कपकोट, सोंग, लोहारखेत, धाकुड़ी, खाती और द्वाली होते हुए कफनी ग्लेशियर क्षेत्र तक पहुंचा। वर्ष 2013 की आपदा के दौरान कफनी नदी के उफान में पुल और ट्रैक के कई हिस्से क्षतिग्रस्त हो गए थे। इसके बाद क्षेत्र में आवाजाही और ट्रैकिंग गतिविधियां प्रभावित हुईं। सेना की टीम ने मौजूदा परिस्थितियों का स्थलीय निरीक्षण कर ट्रैक के पुनः संचालन की संभावनाओं को परखा। इसी बीच तिम्फू ग्लेशियर क्षेत्र से भी पर्वतारोहण के लिहाज से महत्वपूर्ण खबर सामने आई है। 16 से 23 सितंबर तक जितेंद्र सिंह दानू के नेतृत्व में चार सदस्यीय पर्वतारोहण दल ने तिम्फू ग्लेशियर क्षेत्र का अन्वेषण किया। टीम के अनुसार, 21 सितंबर को जितेंद्र सिंह दानू और प्रवीण सिंह दानू ने 6106 मीटर ऊंचे एक अनाम कोल पर पहुंचकर पहली चढ़ाई का दावा किया। दल के मुताबिक, इस ऊंचाई से हिमालय की कई प्रमुख चोटियों का विहंगम दृश्य दिखाई देता है, जिसमें नंदा देवी भी शामिल है। दोनों अभियानों से बागेश्वर के उच्च हिमालयी क्षेत्रों में ट्रैकिंग और पर्वतारोहण की संभावनाओं को लेकर नई उम्मीद जगी है। कफनी ग्लेशियर ट्रैक के पुनः संचालन की दिशा में सेना का आकलन आने वाले समय में महत्वपूर्ण साबित हो सकता है।