नैनीताल: अरविंदो आश्रम में ‘बसंत इंटीग्रल लिविंग मेला 2026’ का आयोजन, पारंपरिक कला और अनुभवात्मक शिक्षा का संगम

Nainital: ‘Basant Integral Living Mela 2026’ Organized at Aurobindo Ashram—A Confluence of Traditional Arts and Experiential Learning

नैनीताल। वन निवास, अरविंदो आश्रम (दिल्ली शाखा) में 23 मार्च 2026 को “बसंत इंटीग्रल लिविंग मेला-2026” का सफल आयोजन किया गया। यह विशेष कार्यक्रम Auro University, सूरत (गुजरात) के बैचलर ऑफ डिज़ाइन द्वितीय सेमेस्टर के विद्यार्थियों के लिए आयोजित किया गया, जो यहां एक शैक्षणिक एवं अनुभवात्मक कैंप के तहत पहुंचे थे।
मेले का उद्देश्य पारंपरिक ज्ञान, हस्तकला और अनुभवात्मक शिक्षा को एक मंच पर लाना तथा प्रतिभागियों को प्रकृति के साथ सामंजस्यपूर्ण जीवन के महत्व से जोड़ना था। यह आयोजन तल्ला रामगढ़ स्थित मधुबन अरविंद आश्रम से प्रेरित “खुशहाली समूह” की पहल का विस्तार रहा, जिसमें 70 से अधिक महिलाएं और पुरुष पारंपरिक कलाओं को संरक्षित और पुनर्जीवित करने का कार्य कर रहे हैं।
इस अवसर पर खुशहाली समूह की मंजू मेहरा, कामिनी रावत, गीता बिष्ट, भावना साह, गुंजन मेहरा और राधा बिष्ट ने अपनी पारंपरिक कला और कौशल का प्रदर्शन किया। उन्होंने प्रतिभागियों को इन विधाओं की बारीकियां समझाने के साथ-साथ उन्हें स्वयं अभ्यास करने के लिए भी प्रेरित किया।
कार्यक्रम में बांस शिल्प के कारीगर लीलाधर ने भी अपनी कला का प्रदर्शन किया। उन्होंने बांस से टोकरियां बनाने की प्रक्रिया को लाइव दिखाते हुए पारंपरिक तकनीकों की उपयोगिता और सुंदरता से प्रतिभागियों को परिचित कराया।
कार्यक्रम की शुरुआत गायत्री मंत्र के उच्चारण के साथ हुई, जिसके बाद तिलक समारोह के जरिए अतिथियों का स्वागत किया गया। मेले की खास बात यह रही कि इसमें केवल प्रदर्शनी ही नहीं, बल्कि ‘हैंड्स-ऑन’ गतिविधियों का भी आयोजन किया गया। प्रतिभागियों को समूहों में विभाजित कर ऐपण, क्रोशिया, बास्केट बुनाई और पारंपरिक तरीके से हिमालयी नमक बनाने जैसी गतिविधियों का व्यावहारिक अनुभव कराया गया।
Auro University  के छात्रों ने इन गतिविधियों में उत्साहपूर्वक भाग लिया और स्थानीय कारीगरों के साथ मिलकर पारंपरिक विधाओं को करीब से समझा। यह अनुभव उनके लिए सीखने का एक जीवंत और व्यावहारिक माध्यम बना।
कार्यक्रम के दौरान “गेंदे के फूल की कहानी” के माध्यम से अनुभवात्मक शिक्षा का उदाहरण प्रस्तुत किया गया, जिसमें सरल गतिविधियों के जरिए बच्चों में गणित, भाषा, विज्ञान और प्रकृति के प्रति जिज्ञासा विकसित करने पर जोर दिया गया।
मेले में प्रदर्शित हस्तनिर्मित उत्पादों को प्रतिभागियों ने सराहा और उनकी खरीदारी कर स्थानीय कारीगरों का उत्साहवर्धन भी किया।
झोड़ा नृत्य और पारंपरिक पहाड़ी गीतों की प्रस्तुतियों के साथ यह मेला हर्षोल्लास और आत्मीयता के माहौल में संपन्न हुआ।इस मौके पर मनोज साह जगाती (सभासद), अमित सुठा, अर्पित जोशी, पुरन सिंह बगड़वाल, आयुष मेहरा, सुमित पाठक इत्यादि लोग मौजूद रहे।