नैनीतालः जनगणना ड्यूटी से जूझ रहे शिक्षक! स्कूल पढ़ाई के साथ अतिरिक्त बोझ से बढ़ी नाराज़गी, अधिकारियों के आदेशों पर उठे सवाल
नैनीताल। नैनीताल में जनगणना अभियान के तहत शिक्षकों पर बढ़ते कार्यभार को लेकर नाराज़गी सामने आई है। 25 अप्रैल से शुरू हुए मकान सूचीकरण अभियान के दौरान शिक्षकों को दोहरी जिम्मेदारी निभानी पड़ रही है, जिससे उनके सामने कई परेशानियां खड़ी हो गई हैं। एक ओर उन्हें विद्यालय में नियमित रूप से कक्षाएं लेनी पड़ रही हैं, वहीं दूसरी ओर जनगणना कार्य के लिए भी समय देना अनिवार्य किया गया है। शिक्षकों का आरोप है कि कुछ अधिकारियों द्वारा ऐसे निर्देश दिए गए हैं, जिनके तहत उन्हें सुबह स्कूल में पांच पीरियड पढ़ाने के बाद जनगणना कार्य के लिए भेजा जा रहा है। इस व्यवस्था को उन्होंने अव्यवहारिक बताते हुए विरोध जताया है। उनका कहना है कि इस तरह के आदेश न केवल उनकी कार्यक्षमता को प्रभावित कर रहे हैं, बल्कि जनगणना जैसे महत्वपूर्ण कार्य की गुणवत्ता पर भी असर डाल सकते हैं। इसी मुद्दे को लेकर शिक्षकों का एक प्रतिनिधिमंडल नगर पालिका के अधिशाषी अधिकारी से मिला और अपनी समस्याओं से अवगत कराया। शिक्षकों ने स्पष्ट किया कि वे जनगणना कार्य के प्रति पूरी तरह प्रतिबद्ध हैं, लेकिन इसके लिए संतुलित और व्यवहारिक समय-सारणी आवश्यक है।
उन्होंने यह भी कहा कि छात्रों की पढ़ाई प्रभावित न हो, इसके लिए वे शाम के समय ऑनलाइन कक्षाएं लेने को भी तैयार हैं। जनगणना अभियान में विभिन्न विभागों के कर्मचारियों को प्रगणक और पर्यवेक्षक के रूप में नियुक्त किया गया है और यह कार्य 24 मई तक पूरा किया जाना है। हालांकि जमीनी स्तर पर समन्वय की कमी और कुछ अधिकारियों के आदेशों के चलते कार्य में बाधाएं उत्पन्न हो रही थीं, जिससे शिक्षकों में असंतोष बढ़ रहा था। इस मामले में जिलाध्यक्ष शैलेन्द्र चौधरी ने भी शिक्षकों की समस्याओं को प्रमुखता से उठाया। उन्होंने कहा कि यदि शिक्षकों पर इस तरह का अतिरिक्त दबाव बनाया जाएगा तो न तो वे सही ढंग से पढ़ा पाएंगे और न ही जनगणना कार्य को प्रभावी ढंग से पूरा कर पाएंगे। शिक्षकों की शिकायत सुनने के बाद नगर पालिका के अधिशाषी अधिकारी ने उन्हें आश्वासन दिया कि उनकी समस्याओं का समाधान किया जाएगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि कोई अधिकारी ड्यूटी के दौरान अनावश्यक बाधा उत्पन्न करता है, तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। इस आश्वासन के बाद शिक्षकों ने राहत की सांस ली है और उम्मीद जताई है कि अब वे अपने दोनों दायित्वों का निर्वहन बेहतर तरीके से कर सकेंगे।