देवभूमि में मोदी की चुनावी हुंकार: जनता की 'ह्रदय रेखा' छूकर खींच दी भाजपा के उज्ज्वल भविष्य की लकीर
देहरादून | कहते हैं कि हाथों की लकीरें तकदीर बनाती हैं, लेकिन उत्तराखंड की राजनीतिक बिसात पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राज्य की जनता की 'ह्रदय रेखा' को छूकर भाजपा के भविष्य की रेखा को और भी गहरा और लंबा कर दिया है। जसवंत सिंह सेना मैदान में आयोजित विशाल जनसभा के जरिए पीएम मोदी ने न केवल अपनी चुनावी ताकत दिखाई, बल्कि टीम धामी की एकजुटता पर मुहर लगाकर विपक्ष को एक मौन लेकिन कड़ा संदेश भी दे दिया।
प्रधानमंत्री की यह जनसभा चुनावी औपचारिकताओं से कोसों दूर, एक आत्मीय संवाद की तरह रही। पीएम ने इस मंच से विपक्ष पर सीधे प्रहार करने के बजाय उत्तराखंड के प्रति अपने अटूट प्रेम और लगाव को दोहराया। उन्होंने विस्तार से बताया कि कैसे 'डबल इंजन' की सरकार राज्य के विकास में मील का पत्थर साबित हो रही है। पीएम ने यह बखूबी स्पष्ट किया कि उनकी सरकार का कार्य करने का तरीका दूसरों से कैसे अलग और प्रभावी है। मैदान में सजा विशाल मंच भाजपा की आंतरिक शक्ति का प्रदर्शन कर रहा था। आमतौर पर ऐसी सभाओं में पूर्व मुख्यमंत्रियों, वर्तमान सांसदों और कैबिनेट मंत्रियों की इतनी बड़ी संख्या में मौजूदगी कम ही देखी जाती है। लेकिन, एक साथ इतने दिग्गजों का मंच साझा करना भाजपा की एकजुटता का प्रमाण था। प्रधानमंत्री द्वारा मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की पीठ थपथपाना इस बात का संकेत है कि आगामी चुनावी रण में 'टीम धामी' पूरी ताकत के साथ उतरने को तैयार है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि पिछले दो महीनों में उत्तराखंड में हुई यह तीसरी सबसे बड़ी सभा थी। पहले हरिद्वार में अमित शाह और हल्द्वानी में राजनाथ सिंह की रैलियों ने जो माहौल बनाया था, उसे प्रधानमंत्री की इस सभा ने एक नई दिशा और गति प्रदान की है। प्रधानमंत्री ने मां डाटकाली की पूजा-अर्चना की और 'गोरखाली' भाषा में अभिवादन कर स्थानीय लोगों का दिल जीत लिया। डाटकाली टनल से लेकर राजधानी के 12 किलोमीटर लंबे गलियारे में उमड़े भारी जनसैलाब ने यह साफ कर दिया कि जनता का झुकाव किस तरफ है। पीएम मोदी ने मंच से देरी का जिक्र करते हुए खुद इस बात की तस्दीक की कि लोगों के उत्साह ने उनका रास्ता रोके रखा।