राष्ट्र सेवा का सर्वोच्च सम्मान: पूर्व सीएम भगत सिंह कोश्यारी आज 'पद्मभूषण' से होंगे विभूषित
उत्तराखंड के राजनैतिक और सामाजिक इतिहास में आज एक नया स्वर्णिम अध्याय जुड़ने जा रहा है। सूबे के पूर्व मुख्यमंत्री और महाराष्ट्र के पूर्व राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी को आज देश के प्रतिष्ठित नागरिक सम्मान 'पद्मभूषण' से नवाजा जाएगा। नई दिल्ली स्थित राष्ट्रपति भवन के ऐतिहासिक दरबार हॉल में आयोजित एक गरिमामयी समारोह के दौरान राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु उन्हें इस सर्वोच्च सम्मान से विभूषित करेंगी। इस विशेष पल के गवाह बनने के लिए उत्तराखंड के राजनैतिक गलियारों सहित उनके समर्थकों में भारी उत्साह है।
उत्तराखंड में 'भगत दा' के नाम से बेहद लोकप्रिय भगत सिंह कोश्यारी का जीवन सादगी, राष्ट्रवाद और जनसेवा की एक अनूठी मिसाल है। एक प्रतिष्ठित सामाजिक कार्यकर्ता, प्रखर शिक्षाविद् और निर्भीक पत्रकार के रूप में उन्होंने समाज को एक नई दिशा दी। वर्ष 1966 में उन्होंने अपने जीवन को पूरी तरह से शिक्षा और समाज सेवा के लिए समर्पित कर दिया था, जिसके तहत उन्होंने पिथौरागढ़ में 'सरस्वती शिशु मंदिर' की स्थापना की। इसके साथ ही, उन्होंने लंबे समय तक राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के विभाग कार्यवाह के रूप में अपनी जमीनी सेवाएं दीं और पिथौरागढ़ से एक हिंदी साप्ताहिक अखबार का संपादन-प्रकाशन कर पत्रकारिता में भी अमिट छाप छोड़ी। भगत दा का राजनैतिक सफर संघर्षों की भट्टी में तपकर निखरा है। देश में आपातकाल (इमरजेंसी) के दौरान उन्होंने लोकतंत्र की रक्षा के लिए 'मीसा' के तहत जेल की यातनाएं भी सहीं। साल 1997 में उन्हें उत्तर प्रदेश विधान परिषद का सदस्य मनोनीत किया गया। साल 2000 में जब उत्तराखंड अलग राज्य बना, तो वे अंतरिम सरकार में कैबिनेट मंत्री बने और इसके बाद उन्होंने सूबे के मुख्यमंत्री के रूप में कमान संभाली। वे उत्तराखंड विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष की भूमिका में भी बेहद प्रखर रहे। जनता के बीच गहरी पैठ रखने वाले कोश्यारी साल 2008 में राज्यसभा सांसद चुने गए, जबकि साल 2014 के आम चुनाव में उन्होंने नैनीताल-ऊधम सिंह नगर सीट से भारी बहुमत के साथ लोकसभा में कदम रखा। उनकी प्रशासनिक क्षमता और वरिष्ठता को देखते हुए 5 सितंबर 2019 को उन्हें देश के सबसे महत्वपूर्ण राज्यों में से एक, महाराष्ट्र का राज्यपाल नियुक्त किया गया। इसके बाद अगस्त 2020 में उन्होंने गोवा के राज्यपाल का अतिरिक्त प्रभार भी पूरी कुशलता के साथ संभाला। आज मिलने वाला यह 'पद्मभूषण' सम्मान न केवल भगत दा की आधी सदी से ज्यादा की अनवरत राष्ट्रसेवा का प्रतिफल है, बल्कि यह समूचे उत्तराखंड के लिए भी एक गर्व का क्षण है।