मन की बातः मतदाता दिवस से लेकर जेन-Z तक! प्रधानमंत्री मोदी बोले- वोटर बनना जीवन का अहम पड़ाव, इसका जश्न मनाएं

Mann Ki Baat: From Voter's Day to Gen-Z! PM Modi says, "Becoming a voter is an important milestone in life, celebrate it."

नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने आज रविवार को ‘मन की बात’ कार्यक्रम के 130वें एपिसोड को सम्बोधित किया। इस दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि कल हम सभी गणतंत्र दिवस का पर्व मनाएंगे। 26 जनवरी का यह दिन हमें संविधान निर्माताओं को नमन करने का अवसर देता है। उन्होंने कहा कि आज 25 जनवरी का दिन भी अहम है। आज राष्ट्रीय मतदाता दिवस है। मतदाता ही लोकतंत्र की आत्मा होता है। मतदाता बनने को जीवन का एक सामान्य पड़ाव माना जाता है, लेकिन ये अवसर किसी भी नागरिक के जीवन का बड़ा अहम समय होता है। तो हम देश में मतदाता बनने का उत्सव मनाएं। जैसे हम जन्मदिन पर शुभकामनाएं देते हैं, वैसे ही जब कोई युवा मतदाता बने तो पूरा मोहल्ला, गांव या शहर एकजुट होकर उसका अभिनंदन करे। इससे मतदान के प्रति जागरुकता बढ़ेगी। साथ ही ये भावना भी सशक्त होगी की वोटर होना कितना मायने रखता है। उन्होंने कहा कि मैं युवा साथियों से आग्रह करूंगा कि 18 साल का होने पर खुद को वोटर के रूप में रजिस्टर करें।

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि इन दिनों सोशल मीडिया पर एक ट्रेंड चल रहा है, जिसमें लोग 2016 की यादों का ताजा कर रहे हैं। दस साल पहले जनवरी 2016 में हमने भी एक जर्नी की शुरुआत की थी। हमें यह एहसास था कि ये भले छोटा हो, लेकिन ये देश के लिए अहम होगा। मैं जिस जर्नी की बात कर रहा हूं वह है स्टार्टअप इंडिया की जर्नी। इस जर्नी के हीरो हमारे युवा साथी हैं। युवाओं ने जो इनोवेशन किए, वो इतिहास में दर्ज हो रहे हैं। आज दुनिया में भारत तीसरा सबसे बड़ा स्टार्टअप बन रहा है। आज भारत के स्टार्ट अप ऐसे काम कर रहे हैं जिसके बारे में दस साल पहले कल्पना भी नहीं की जा सकती थी। मैं अपने उन सभी युवा साथियों को सैल्यूट करता हूं जो किसी स्टार्टअप से जुड़े हैं। पीएम मोदी ने कहा कि भजन और कीर्तन हमारी संस्कृति की ताकत रहे हैं। आज की पीढ़ी भी कुछ नए कमाल कर रही है। युवाओं ने भक्ति को अपने अनुभव और जीवनशैली में ढाल दिया है। आपने ऐसे वीडियो जरूर देखे होंगे, जिसमें युवा इकट्ठा होते हैं, संगीत होता है और माहौल किसी कंसर्ट से जरा भी कम नहीं होता है, लेकिन वहां पूरी तनमयता के साथ भजन गाया जा रहा होता है। इसे भजन क्लबिंग कहा जा रहा है। यह खासकर जेन जी के बीच लोकप्रिय हो रहा है।

उन्होंने आगे कहा कि हम भारत के किसी हिस्से में चले जाएं वहां कुछ न कुछ असाधारण दिख जाता है। इनसे पता चलता है कि हमारे समाज की असली शक्ति क्या है। गुजरात में बेचरा जी के चंदन की गांव की परंपरा अपने आप में अनूठी है। यहां के लोग अपने घरों में खाना नहीं बनाते, इसकी वजह गांव का शानदार कम्यूनिटी किचन है। इसमें एक साथ पूरे गांव का खाना बनता है और लोग एक साथ बैठकर भोजन करते हैं। बीते 15 सालों से यह परंपरा चलती आ रही है। अगर कोई बीमार है तो होम डिलिवरी की भी व्यवस्था है। ये पहल न केवल लोगों को आपस में जोड़ती है, बल्कि इससे पारिवारिक भावना को बढ़ावा मिलता है। भारत के पारिवारिक सिस्टम को इसे कौतूहल के तौर पर देखा जाता है। कुछ दिन पहले यूएई के राष्ट्रपति अल नाहयान भारत आए थे। उन्होंने बताया कि यूएई साल 2026 को ईयर ऑफ फैमिली के तौर पर मना रहा है। वाकई यह सराहनीय पहल है। जब परिवार और समाज की ताकत मिलती है तो हम बड़ी से बड़ी समस्या को परास्त कर सकते हैं।