काशीपुर किसान आत्महत्या केस में बड़ा अपडेट! हाईकोर्ट से नामजद आरोपितों को मिली बड़ी राहत, गिरफ्तारी पर लगी रोक

Major update in the Kashipur farmer suicide case! The High Court granted significant relief to the accused, with arrests stayed.

नैनीताल। उत्तराखंड हाईकोर्ट ने काशीपुर के किसान द्वारा आत्महत्या करने पर नामजद लोगों की गिरफ्तारी पर रोक व दर्ज मुकदमे को निरस्त करने के मामले पर सुनवाई की। मामले की सुनवाई के बाद आज  न्यायमूर्ति आशीष नैथानी की  एकलपीठ ने उनकी गिरफ्तारी पर रोक लगा दी है। कोर्ट ने राज्य सरकार सहित तहरीर देने वाले मृतक के भाई  परमिंदर को नोटिस जारी कर तीन सप्ताह में अपनी आपत्ति पेश करने को कहा है। साथ में कोर्ट ने याचिकार्ताओं से कहा है कि वे जांच में सहयोग करें। कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई के लिए 15 अप्रैल की तिथि नियत की है। आज राज्य सरकार ने स्थिति से अवगत कराते हुए कहा कि अभी तक किसी की भी गिरफ्तारी नही हुई है। मामला गंभीर होने के कारण डीजीपी इस केस की खुद मॉनिटरिंग कर रहे हैं। मामले की जांच एसआईटी को सौंप दी है, लेकिन जांच प्रारम्भ नहीं हुई। मामले के अनुसार शनिवार देर रात हल्द्वानी के काठगोदाम क्षेत्र स्थित एक होटल में काशीपुर निवासी सुखवंत सिंह ने खुद को गोली मारकर आत्महत्या कर ली थी। आत्महत्या से पहले सुखवंत सिंह ने फेसबुक पर लाइव आकर कई लोगों पर गंभीर आरोप लगाए थे। यही नहीं सुखवंत ने ऊधम सिंह नगर के एसएसपी मणिकांत मिश्रा समेत तमाम पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों पर भी गंभीर आरोप लगाए थे। उनके द्वारा कहा गया था कि उनके साथ जमीन के मामले में धोखाधड़ी हुई है और उनसे करीब चार करोड़ ठग लिए गए। जब इसकी शिकायत बार-बार पुलिस से की गयी तो पुलिस ने उनकी शिकायत पर अमल नही किया गया, उल्टा उनको डरा धमकाया गया। घटनाक्रम के बाद पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए 26 लोगों पर नामजद मुकदमा दर्ज किया था। यह कार्रवाई मृतक के भाई की तहरीर पर की गयी। पुलिस ने अमरजीत सिंह, दिव्या, रविन्द्र कौर, लवप्रीत कौर, कुलविन्दर सिंह उर्फ जस्सी, हरदीप कौर, आशीष चौहान, गिरवर सिंह, महीपाल सिंह, शिवेन्द्र सिंह, विमल, विमल की पत्नी, देवेन्द्र, राजेन्द्र, गुरु प्रेम सिंह , जगपाल सिंह, जगवीर राय, मनप्रीत कलसी, अमित, मोहित, सुखवंत सिंह पन्नू, वीरपाल सिंह पन्नू, बलवंत सिंह बक्सौरा, बृजेंद्र, पूजा और जहीर के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है। सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की तरफ से कहा गया कि उनका इस केस से कोई लेना देना नहीं है। उन्हें इस केस में गलत फंसाया गया है। यह केस दो पक्षों के बीच आपसी जमीन से जुडा मामला है। किसान ने आत्महत्या की है, इसलिए उनकी गिरफ्तारी पर रोक लगाई जाए और दर्ज मुकदमे को निरस्त किया जाय।