नागरिकता संशोधन अधिनियम पर सुप्रीम कोर्ट में आज से महासुनवाई,जल्द तय होगा देश का भविष्य

Major hearings on the Citizenship Amendment Act begin today in the Supreme Court; the country's future to be decided soon.

नई दिल्ली। नागरिकता संशोधन अधिनियम, 2019 को लेकर देश की सर्वोच्च अदालत में आज से निर्णायक कानूनी लड़ाई शुरू होने जा रही है। मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली पीठ मंगलवार से उन तमाम याचिकाओं पर सुनवाई करेगी, जिनमें इस कानून की संवैधानिक वैधता को चुनौती दी गई है। करीब दो साल के अंतराल और लंबी प्रक्रिया के बाद, कोर्ट ने इस मामले को 5 मई, 2026 से शुरू होने वाले सप्ताह के लिए सूचीबद्ध किया था।

सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाओं की विशाल संख्या और उनके अलग-अलग आधारों को देखते हुए सुनवाई के लिए एक विशेष प्रारूप तैयार किया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि सुनवाई को दो मुख्य श्रेणियों में विभाजित किया गया है। पहले उन याचिकाओं पर बहस होगी जो पूरे देश के परिप्रेक्ष्य में कानून को चुनौती देती हैं। इसके बाद उत्तर-पूर्वी राज्यों, विशेषकर असम और त्रिपुरा से संबंधित याचिकाओं पर सुनवाई होगी, जहाँ इस कानून के खिलाफ दलीलें भाषाई पहचान और सांस्कृतिक सुरक्षा पर आधारित हैं। पिछली कार्यवाही के दौरान, पीठ ने स्पष्ट कर दिया था कि सुनवाई के दौरान केवल कानून के तकनीकी और संवैधानिक पहलुओं पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा। केंद्र सरकार जहां इसे शरणार्थियों को अधिकार देने वाला मानवीय कानून बता रही है, वहीं याचिकाकर्ताओं का तर्क है कि यह संविधान के मूल ढांचे और धर्मनिरपेक्षता के सिद्धांतों के खिलाफ है। अदालत द्वारा सुनवाई के तौर-तरीके तय किए जाने के बाद अब सभी की निगाहें सीजेआई की पीठ पर टिकी हैं। यह सुनवाई न केवल राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण है, बल्कि देश के भविष्य और नागरिकता के नियमों पर एक ऐतिहासिक मिसाल कायम करेगी।