Oct 14, 2026 Login
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सीमा विवाद पर बड़ा मंथन: ताकसिंग तनाव के बीच अरुणाचल के वाचा-दमाई में भारत-चीन के कोर कमांडरों की बैठक

Major deliberations on the border dispute: India-China Corps Commanders meet at Wacha-Damai in Arunachal amidst the Taksing standoff.

नई दिल्ली। भारत और चीन के बीच वास्तविक नियंत्रण रेखा पर जारी सैन्य गतिरोध और सीमा विवाद को सुलझाने के लिए रविवार को एक महत्वपूर्ण और उच्चस्तरीय बैठक आयोजित की गई। अरुणाचल प्रदेश के वाचा-दमाई स्थित सीमा बैठक स्थल पर दोनों देशों की सेनाओं के कोर कमांडरों ने मेज पर बैठकर एलएसी से जुड़े कई संवेदनशील मुद्दों पर गंभीर मंथन किया। यह कोर कमांडर स्तरीय वार्ता ऐसे वक्त में हुई है जब हाल ही में अरुणाचल के ऊपरी सुबनसिरी जिले के ताकसिंग क्षेत्र में दोनों सेनाओं के बीच भारी तनाव की खबरें सामने आई थीं।

अरुणाचल प्रदेश के ऊपरी सुबनसिरी जिले के ताकसिंग क्षेत्र में तनाव की खबरों के बीच भारत और चीन की सेनाओं ने वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) से जुड़े मुद्दों पर एक बार फिर सैन्य स्तर की बातचीत की है। रविवार को अरुणाचल प्रदेश के वाचा-दमाई सीमा बैठक स्थल पर दोनों देशों के कोर कमांडरों के बीच अहम बैठक हुई। बातचीत का उद्देश्य एलएसी से जुड़े विवादित मुद्दों का समाधान तलाशना और सीमा पर तनाव को नियंत्रित रखने की कोशिश करना रहा। भारतीय पक्ष का नेतृत्व 3 कोर के कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल गिरीश कालिया ने किया। सूत्रों के अनुसार, बैठक के दौरान भारतीय सेना ने सीमा क्षेत्र में चीनी गतिविधियों से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता से उठाया और अपनी चिंताओं से चीन को अवगत कराया। यह बैठक ऐसे समय हुई है जब ताकसिंग क्षेत्र में दोनों देशों की सेनाओं के गश्ती दलों के आमने-सामने आने की खबरें सामने आई थीं। बताया जा रहा है कि जुलाई के अंत में ताकसिंग क्षेत्र में भारतीय और चीनी गश्ती दल आमने-सामने आए थे। इसके बाद अगस्त की शुरुआत में चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी की ओर से क्षेत्र में अस्थायी ढांचे लगाए जाने की खबरें भी सामने आई थीं। हालांकि, इन गतिविधियों और घटनाक्रम से जुड़े सभी दावों की स्वतंत्र पुष्टि जरूरी है। दरअसल, भारत और चीन के बीच एलएसी का अंतिम और पारस्परिक रूप से स्वीकार्य सीमांकन अभी तक नहीं हुआ है। यही वजह है कि कई इलाकों में दोनों देशों के सैनिक अपनी-अपनी धारणा के अनुसार गश्त करते हैं। ऐसे क्षेत्रों में दोनों पक्षों की गश्त एक-दूसरे के दावे वाले इलाके तक पहुंचने पर आमने-सामने की स्थिति पैदा हो सकती है। वाचा-दमाई में कोर कमांडर स्तर की यह बैठक ऐसे समय हुई है जब इससे पहले भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल और चीन के विदेश मंत्री वांग यी के बीच विशेष प्रतिनिधि स्तर की बातचीत हो चुकी है। इससे संकेत मिलता है कि सीमा विवाद को लेकर दोनों देशों के बीच राजनीतिक और सैन्य, दोनों स्तरों पर संवाद जारी रखने की कोशिश हो रही है। अंतरराष्ट्रीय मामलों के जानकार आनंद कुमार के मुताबिक, मौजूदा घटनाक्रम इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि बातचीत अब केवल सीमा पर तत्काल तनाव कम करने तक सीमित नहीं दिख रही है। दोनों पक्ष सीमा निर्धारण के मुद्दे पर शीघ्र और ठोस प्रगति की जरूरत पर भी जोर दे रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि भारत-चीन संबंध लंबे समय से सैन्य तनातनी, कूटनीतिक अविश्वास और एलएसी पर गतिरोध से प्रभावित रहे हैं। ऐसे में सीमा पर सैन्य संवाद बनाए रखना तनाव को बढ़ने से रोकने के लिहाज से महत्वपूर्ण है। भारत और चीन के बीच सीमा विवाद बेहद जटिल है और इसका स्थायी समाधान जल्द निकलना आसान नहीं माना जाता। सीमा का अंतिम निर्धारण, गश्त के अधिकार और दोनों पक्षों की सुरक्षा चिंताएं ऐसे मुद्दे हैं जिन पर व्यापक सहमति की आवश्यकता होगी। विशेषज्ञ आनंद कुमार का मानना है कि यदि मौजूदा बातचीत की गति बनी रहती है और ‘अर्ली हार्वेस्ट’ जैसे प्रयासों को स्पष्ट उद्देश्य, समयसीमा और ठोस विषयवस्तु मिलती है, तो यह दोनों देशों के संबंधों में नए चरण की शुरुआत कर सकता है। फिलहाल ताकसिंग में तनाव की खबरों के बीच हुई यह बैठक इसलिए अहम है क्योंकि एलएसी पर शांति बनाए रखना और सीमा विवाद के समाधान की दिशा में आगे बढ़ना दोनों मोर्चों पर भारत और चीन को संवाद का रास्ता खुला रखना होगा। आने वाले दिनों में सैन्य स्तर की बातचीत और कूटनीतिक संपर्क यह तय करेंगे कि सीमा पर मौजूदा तनाव कम होता है या फिर दोनों पक्षों के बीच नया गतिरोध पैदा होता है।