Sep 09, 2026 Login

भारत की रेल क्रांति: डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर का नेटवर्क हुआ पूरा, पीएम मोदी ने 20,700 करोड़ के 326 किमी लंबे सेक्शन का किया उद्घाटन

India's Rail Revolution: Dedicated Freight Corridor network completed; PM Modi inaugurates 326-km-long section worth ₹20,700 crore.

वडोदरा। भारतीय रेलवे और देश के लॉजिस्टिक्स क्षेत्र के इतिहास में मंगलवार का दिन एक स्वर्णिम अध्याय के रूप में दर्ज हो गया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वेस्टर्न डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर के तीन अत्यंत महत्वपूर्ण नए सेक्शन देश को समर्पित किए। 20,700 करोड़ रुपये से अधिक की लागत से बनकर तैयार हुए इन 326 रूट किलोमीटर लंबे नए रेल सेक्शन के शुरू होने के साथ ही देश का पूरा डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर नेटवर्क अब अपनी पूरी लंबाई में पूरी तरह चालू (ऑपरेशनल) हो गया है।

देश के माल परिवहन और लॉजिस्टिक्स नेटवर्क को मंगलवार को बड़ी मजबूती मिली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वेस्टर्न डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर (डब्ल्यूडीएफसी) के तीन महत्वपूर्ण सेक्शन राष्ट्र को समर्पित किए। कुल 326 रूट किलोमीटर लंबे इन सेक्शनों को 20,700 करोड़ रुपये से अधिक की लागत से तैयार किया गया है। इनके चालू होने के साथ ही देश का डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर नेटवर्क अपनी पूरी निर्धारित लंबाई में परिचालन के लिए उपलब्ध हो गया है। प्रधानमंत्री ने जिन प्रमुख सेक्शनों का उद्घाटन किया, उनमें न्यू साणंद-न्यू मकरपुरा, न्यू उंबरगांव-न्यू सफाले और न्यू सफाले-न्यू जेएनपीटी शामिल हैं। इसके साथ ही मुंबई क्षेत्र के महत्वपूर्ण औद्योगिक केंद्रों और जवाहरलाल नेहरू पोर्ट टर्मिनल के बीच माल ढुलाई की कनेक्टिविटी और बेहतर होने की उम्मीद है। देश में दो प्रमुख डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर विकसित किए गए हैं। ईस्टर्न डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर लुधियाना से सोननगर तक करीब 1,337 किलोमीटर लंबा है, जबकि वेस्टर्न डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर दादरी को जवाहरलाल नेहरू पोर्ट टर्मिनल (जेएनपीटी) से करीब 1,506 किलोमीटर की दूरी तक जोड़ता है. डब्ल्यूडीएफसी का जेएनपीटी से सीधा जुड़ाव देश के आयात-निर्यात कारोबार के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इससे बंदरगाहों और औद्योगिक क्षेत्रों के बीच माल की आवाजाही तेज होने, लॉजिस्टिक्स लागत घटने और मुंबई के मौजूदा रेलवे नेटवर्क पर मालगाड़ियों का दबाव कम होने की उम्मीद है। डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर का सबसे बड़ा फायदा यह है कि भारी माल ढुलाई के लिए अलग रेल नेटवर्क उपलब्ध हो गया है। दोनों कॉरिडोर पर मिलाकर पहले से औसतन करीब 443 ट्रेनें प्रतिदिन संचालित होने की जानकारी दी गई है। रेल मंत्रालय के अनुसार कॉरिडोर के परिचालन प्रदर्शन में सुधार हुआ है। माल ढुलाई की मात्रा बढ़ने के साथ औसत गति में भी इजाफा हुआ, टर्नअराउंड समय घटा और परिचालन की विश्वसनीयता बेहतर हुई है। प्रधानमंत्री ने न्यू साणंद (नॉर्थ), न्यू मकरपुरा, न्यू उंबरगांव और न्यू जेएनपीटी से मालगाड़ी सेवाओं को भी हरी झंडी दिखाई। इन सेवाओं के शुरू होने से पश्चिमी भारत के औद्योगिक क्षेत्रों और बंदरगाहों के बीच माल परिवहन को नई गति मिलने की उम्मीद है। डीएफसी नेटवर्क का असर केवल मालगाड़ियों तक सीमित नहीं रहेगा। माल ढुलाई का बड़ा हिस्सा अलग फ्रेट कॉरिडोर पर स्थानांतरित होने से पारंपरिक रेलवे नेटवर्क पर अतिरिक्त क्षमता उपलब्ध होगी। इससे भारतीय रेलवे को मौजूदा लाइनों पर अधिक माल और यात्री सेवाएं संचालित करने का अवसर मिलेगा। डबल-स्टैक कंटेनर ट्रेनों और अधिक एक्सल लोड वाली मालगाड़ियों के संचालन से माल परिवहन की दक्षता बढ़ाने में मदद मिल रही है। उत्तरी भारत से पश्चिमी समुद्री बंदरगाहों तक सामान पहुंचाने में भी समय कम होने की उम्मीद है। डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर को देश के लॉजिस्टिक्स ढांचे को मजबूत करने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है। इससे मल्टीमॉडल कनेक्टिविटी बेहतर होगी और उद्योगों को कच्चा माल तथा तैयार उत्पाद तेजी से बाजार और बंदरगाहों तक पहुंचाने में मदद मिलेगी। तेज माल परिवहन का सीधा असर परिवहन लागत और आपूर्ति श्रृंखला की दक्षता पर पड़ने की उम्मीद है। रेलवे अब फ्रेट टर्मिनलों को भी आधुनिक बनाने पर जोर दे रहा है। गति शक्ति मल्टी-मॉडल कार्गो टर्मिनल नीति के तहत आधुनिक रेल फ्रेट टर्मिनल विकसित किए जा रहे हैं, जबकि रेलवे के स्वामित्व वाले गुड्स शेड में भी बुनियादी ढांचे के विस्तार और उन्नयन का काम किया जा रहा है। सरकार ने माल ढुलाई नेटवर्क के अगले विस्तार की दिशा में भी कदम बढ़ा दिया है। केंद्रीय बजट 2026 में पूर्व में डंकुनी से पश्चिम में सूरत तक एक नए डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर की घोषणा की गई है। प्रस्तावित कॉरिडोर की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट तैयार या अपडेट करने की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। भारतीय रेलवे के अनुसार वर्ष 2025-26 में माल ढुलाई बढ़कर 1,670 मिलियन टन हो गई। रेलवे की रणनीति माल ढुलाई में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाने, क्षेत्रीय कनेक्टिविटी मजबूत करने और फर्स्ट-माइल से लेकर लास्ट-माइल तक लॉजिस्टिक्स व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाने की है। स्पेशलाइज्ड वैगन, निजी क्षेत्र के निवेश, आधुनिक टर्मिनल और कस्टमाइज्ड लॉजिस्टिक्स सेवाओं के जरिए रेलवे माल ढुलाई को उद्योगों के लिए और सुविधाजनक बनाने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर का पूरा नेटवर्क चालू होना इसी बदलाव की बड़ी कड़ी माना जा रहा है।