ऊर्जा क्षेत्र में भारत की 'महाशक्ति' बनने की ओर छलांग: अब पड़ोसी देशों को इथेनॉल निर्यात करने की तैयारी,नेपाल के साथ शुरू हुई बातचीत

India's Leap Towards Becoming an 'Energy Superpower': Now Preparing to Export Ethanol to Neighboring Countries; Talks Underway with Nepal

नई दिल्ली। भारत अब न केवल अपनी ऊर्जा जरूरतों को पूरा कर रहा है, बल्कि दक्षिण एशियाई देशों के लिए 'ऊर्जा केंद्र' बनने की दिशा में भी कदम बढ़ा चुका है। ग्रेंस इथेनॉल मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन के अनुसार, भारत जल्द ही अपने पड़ोसी देशों को इथेनॉल का निर्यात शुरू कर सकता है। इस कड़ी में नेपाल के साथ उच्च स्तरीय चर्चा का दौर शुरू हो चुका है, जो आने वाले समय में भारत की सामरिक और आर्थिक स्थिति को और मजबूत करेगा। जीईएमए  के अध्यक्ष सीके जैन ने महत्वपूर्ण जानकारी साझा करते हुए बताया कि हाल ही में एक भारतीय प्रतिनिधिमंडल ने नेपाल का दौरा किया है। इस यात्रा के दौरान नेपाल सरकार को वहां के ईंधन में 10% इथेनॉल मिश्रण शुरू करने का ठोस सुझाव दिया गया है। वर्तमान में भारत में '1जी' इथेनॉल के निर्यात पर प्रतिबंध है, लेकिन पड़ोसी देशों की बढ़ती मांग और कूटनीतिक संबंधों को देखते हुए केंद्र सरकार इस नीति पर पुनर्विचार कर सकती है।

इथेनॉल निर्यात केवल एक व्यापारिक सौदा नहीं है, बल्कि यह भारत की ग्रामीण अर्थव्यवस्था के लिए गेमचेंजर साबित होगा। इथेनॉल का उत्पादन मुख्य रूप से अनाज और गन्ने से होता है, जिससे सीधे तौर पर किसानों को लाभ मिलेगा। भारत वर्तमान में E20 (20% इथेनॉल मिश्रण) लक्ष्य के माध्यम से लगभग 40,000 करोड़ रुपये की विदेशी मुद्रा बचा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि भारत E85 और E100 (उच्च मिश्रण) के स्तर तक पहुंचता है, तो यह बचत 1 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच सकती है। भविष्य की तैयारियों पर बात करते हुए जैन ने कहा कि फ्लेक्स-फ्यूल इंजनों को लेकर सरकार और वाहन निर्माताओं के संगठन के बीच निरंतर संवाद जारी है। उम्मीद है कि अगले 2-3 वर्षों के भीतर फ्लेक्स-फ्यूल वाहन भारतीय सड़कों पर आम हो जाएंगे। हालांकि, माइलेज को लेकर उपभोक्ताओं में कुछ भ्रांतियां हैं, लेकिन विशेषज्ञों का तर्क है कि पर्यावरण संरक्षण और कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता कम होने के लाभ कहीं अधिक महत्वपूर्ण हैं। इसी बीच, भारत के विदेश सचिव विक्रम मिसरी ने नेपाल के निवर्तमान राजदूत शंकर प्रसाद शर्मा से दिल्ली में विदाई मुलाकात की। इस मुलाकात में दोनों देशों के बीच दशकों पुरानी रणनीतिक साझेदारी की समीक्षा की गई। विदेश मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि भारत नेपाल के साथ अपनी 'समय की कसौटी पर खरी उतरी' मित्रता को नई ऊंचाइयों पर ले जाने के लिए प्रतिबद्ध है। डॉ. शंकर शर्मा, जो एक अनुभवी अर्थशास्त्री भी हैं, के कार्यकाल के दौरान दोनों देशों के बीच व्यापारिक और ऊर्जा संबंधों में काफी प्रगति देखी गई है। इथेनॉल निर्यात की यह पहल न केवल दक्षिण एशिया में भारत के प्रभाव को बढ़ाएगी, बल्कि हरित ऊर्जा के क्षेत्र में वैश्विक नेतृत्व की भारत की महत्वाकांक्षा को भी पूरा करेगी। यदि नेपाल के साथ यह सौदा सफल रहता है, तो भूटान और बांग्लादेश जैसे अन्य पड़ोसी देश भी जल्द ही भारत के इथेनॉल बाजार से जुड़ सकते हैं।