पाकिस्तान में खूनी संघर्ष: प्रदर्शनकारियों पर पाकिस्तानी सेना ने बरसाईं अंधाधुंध गोलियां, 11 की मौत, 70 से ज्यादा घायल

Bloody clash in Pakistan: Pakistani army opens indiscriminate fire on protesters; 11 dead, over 70 injured.

नई दिल्ली। पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में स्थिति बेहद तनावपूर्ण और बेकाबू हो गई है। रावलकोट और उसके आसपास के इलाकों में एक शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारी की शोकसभा में जुटे निहत्थे लोगों पर पाकिस्तानी सुरक्षाबलों और सेना द्वारा की गई ताबड़तोड़ गोलीबारी ने पूरे क्षेत्र को दहला कर रख दिया है। इस सीधी सैन्य कार्रवाई (डायरेक्ट एक्शन) में अब तक 11 स्थानीय नागरिकों की दर्दनाक मौत हो चुकी है, जबकि 70 से अधिक लोग गंभीर रूप से घायल हैं। घायलों में कई की हालत नाजुक बनी हुई है, जिससे मौतों का आंकड़ा बढ़ने की आशंका है। यह हिंसक झड़प मंगलवार को जम्मू-कश्मीर जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी द्वारा प्रस्तावित बड़े लॉकडाउन से ठीक पहले हुई। इस खूनी खेल के बाद पूरे पीओके में जनता का गुस्सा सातवें आसमान पर है और पाकिस्तानी हुकूमत व सेना के खिलाफ माहौल पूरी तरह गरमा गया है।

स्थानीय सूत्रों के अनुसार, रावलकोट में लोग एक मृत प्रदर्शनकारी को श्रद्धांजलि देने और शांतिपूर्ण विरोध जताने के लिए एकत्रित हुए थे। इसी दौरान पाकिस्तानी रेंजर्स और सुरक्षाबलों ने भीड़ को तितर-बितर करने के लिए क्रूरता की सारी हदें पार कर दीं। आंसू गैस के गोलों के बाद सीधे नागरिकों पर अंधाधुंध गोलियां चला दी गईं। इस बर्बरता के बाद जम्मू-कश्मीर जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी ने पाकिस्तानी सेना के जनरलों और स्थानीय प्रशासन पर सीधे तौर पर मानवाधिकारों के हनन और निर्दोषों की हत्या का गंभीर आरोप लगाया है। कमेटी के नेताओं का कहना है कि जनता की आवाज को दबाने के लिए सेना इस तरह के हिंसक हथकंडे अपना रही है। दरअसल, पीओके में पिछले लंबे समय से महंगाई, आटे की किल्लत और भारी बिजली बिलों के खिलाफ अवामी एक्शन कमेटी के नेतृत्व में आंदोलन चल रहा है। मंगलवार को होने वाले पूर्ण लॉकडाउन से पहले ही पाकिस्तानी सेना ने पूरे इलाके को छावनी में तब्दील कर दिया था। चश्मदीदों का कहना है कि सेना और अर्धसैनिक बलों ने रावलकोट की घेराबंदी कर रखी है और अस्पतालों में घायलों की चीख-पुकार मची है। इस नरसंहार के बाद मुजफ्फरबाद से लेकर रावलकोट तक तनाव चरम पर है और लोग सड़कों पर उतरकर सेना के इस खूनी कदम का विरोध कर रहे हैं।