मानवता फिर हुई शर्मसार: बहन का 'कंकाल' ढोने के मामले में बैंक दोषी करार,मुख्यमंत्री के निर्देश पर जांच में बड़ा खुलासा
क्योंझर। ओडिशा के क्योंझर जिले से मानवता को शर्मसार करने वाली एक घटना सामने आई है, जहाँ एक भाई को अपनी मृत बहन का कंकाल (अस्थियां/अवशेष) लेकर बैंक की चौखट तक पहुँचने को मजबूर होना पड़ा। इस मामले की सरकारी जांच में बैंक प्रबंधन को सीधे तौर पर लापरवाही और संवेदनहीनता का दोषी पाया गया है।
आपको बता दें 50 वर्षीय जीतू मुंडा अपनी बहन के निधन के बाद उनके बैंक खाते में जमा राशि निकालने के लिए बैंक के चक्कर काट रहा था। कानूनी प्रक्रियाओं और कागजी कार्रवाई से अनजान जीतू जब बैंक पहुँचा, तो मदद मिलने के बजाय उसे संवेदनहीनता का सामना करना पड़ा। स्थिति यहाँ तक पहुँच गई कि उसे अपनी बहन के अवशेषों को साथ लेकर बैंक जाना पड़ा, जिसकी तस्वीरों ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया है। मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी के निर्देश पर शुरू हुई उच्चस्तरीय जांच के बाद उत्तरी संभाग के राजस्व मंडल आयुक्त संग्राम केशरी महापात्र ने गुरुवार को बैंक का दौरा किया। सीसीटीवी फुटेज खंगालने और चश्मदीदों से बात करने के बाद महापात्र ने स्पष्ट किया कि बैंक कर्मचारियों का व्यवहार पूरी तरह असहयोगपूर्ण था। आरडीसी महापात्र ने कहा, "प्राथमिक जांच से यह साफ है कि बैंक प्रबंधन ने पीड़ित की मदद नहीं की। जीतू मुंडा बैंक की जटिल प्रक्रियाओं से अनजान था। बैंककर्मियों का दायित्व था कि वे उसे सही रास्ता दिखाते, लेकिन उन्होंने संवेदनहीनता दिखाई। दूसरी ओर, प्रायोजक बैंक 'इंडियन ओवरसीज बैंक' ने अपना बचाव करते हुए कहा कि यह घटना 'दावा निपटान प्रक्रिया'की जानकारी न होने और तकनीकी कारणों से हुई। हालांकि, इस दलील से प्रशासन संतुष्ट नहीं है। इस घटना की गूँज ओडिशा विधानसभा में भी सुनाई दी, जहाँ विपक्षी दलों ने सरकार और बैंकिंग व्यवस्था को आड़े हाथों लेते हुए भारी हंगामा किया। वर्तमान में मुख्यमंत्री के आदेश पर विस्तृत जांच जारी है और दोषी बैंक कर्मचारियों पर कड़ी कार्रवाई की संभावना जताई जा रही है। यह मामला बैंकिंग सेवाओं में मानवीय दृष्टिकोण की कमी का एक बड़ा उदाहरण बन गया है। अधिकारियों का कहना है कि नियमों के नाम पर किसी गरीब और अनपढ़ व्यक्ति को इस तरह प्रताड़ित करना बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। समाज में इस घटना को लेकर गहरा आक्रोश है और लोग पीड़ित जीतू मुंडा के लिए न्याय की मांग कर रहे हैं।