नैनीताल में बढ़ते ट्रैफिक जाम और पार्किंग संकट पर हाईकोर्ट गंभीर! ट्रैफिक नियंत्रण को लेकर सरकार और नगर पालिका से जवाब तलब
नैनीताल। उत्तराखण्ड हाईकोर्ट ने शहर में लगातार बढ़ते ट्रैफिक दबाव, जाम और पार्किंग की समस्या पर गंभीर चिंता जताई है। मुख्य न्यायाधीश मनोज कुमार गुप्ता और न्यायमूर्ति सुभाष उपाध्याय की खंडपीठ ने जनहित से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर स्वतः संज्ञान लेकर दर्ज जनहित याचिका की सुनवाई के दौरान कोर्ट ने स्पष्ट कहा कि नैनीताल में अनियंत्रित वाहनों का प्रवेश शहर के लिए गंभीर समस्या बन चुकी है। कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि यह सर्वविदित है कि पर्यटन सीजन और विशेषकर सप्ताह के अंत में नैनीताल आने वाले वाहनों की संख्या कई गुना बढ़ जाती है। हजारों पर्यटकों के कारण शहर में कई-कई घंटे तक ट्रैफिक जाम की स्थिति बनी रहती है। ऐसे हालात में यदि किसी स्थानीय निवासी या पर्यटक की तबीयत अचानक बिगड़ जाए तो उसे समय पर अस्पताल पहुंचाना लगभग असंभव हो सकता है, जिससे जान का खतरा भी पैदा हो सकता है। कोर्ट ने यह भी कहा कि नैनीताल की संकरी सड़कें और भौगोलिक परिस्थितियां अनियंत्रित संख्या में वाहनों का भार सहन करने की अनुमति नहीं देतीं। पार्किंग की सीमित व्यवस्था भी शहर की प्रमुख समस्याओं में से एक है और पार्किंग से संबंधित मुद्दा भी न्यायालय के समक्ष विचाराधीन है।
खंडपीठ ने अपने आदेश में यह भी कहा कि यदि नगर पालिका को शहर में आने वाले वाहनों के प्रवेश को नियंत्रित करने की अनुमति नहीं दी जाती है, तो इसके गंभीर परिणाम सामने आ सकते हैं। पहाड़ी क्षेत्र की भौगोलिक सीमाएं सड़कों के विस्तार की अनुमति नहीं देतीं और लगातार बढ़ते वाहनों से केवल ट्रैफिक जाम ही नहीं, बल्कि वायु और ध्वनि प्रदूषण भी बढ़ रहा है। लंबे समय तक चालू रहने वाले वाहनों के इंजन दुर्घटनाओं का कारण भी बन सकते हैं, जबकि सबसे अधिक परेशानी पैदल चलने वाले लोगों को होती है, जिन्हें जाम में फंसे वाहनों से निकलने वाले धुएं का सामना करना पड़ता है। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने यह भी उल्लेख किया कि 15 अप्रैल और 23 अप्रैल 2025 के आदेशों में उठाए गए अतिरिक्त जनहित के मुद्दों पर भी विचार किया जाना भी आवश्यक है। मामले में कोर्ट ने नगरपालिका व सरकार से तीन सप्ताह में जवाब पेश करने को कहा है।