पौराणिक मान्यताओं की विशेषताओं से जुडा है हरेला पर्व, कैसे मनाते हैं इस पर्व को पर्वतीय परम्परा के अनुसार जरुर पढें।
अल्मोड़ा में हरेला का त्यौहार बड़ी धूम धाम से मनाया गया। हरेला से 1 दिन पूर्व हर घर में विधि विधान से हरेला की गुड़ाई की गई वही सावन के पहले सोमवार के दिन हरेला सिरोधारण किया गया जो सुख समृद्धि और हरियाली का प्रतीक है, मान्यता यह है कि जिस साल हरेला जितना बड़ा होगा उस साल फसल उतनी ही बढ़िया होगी। साॅथ ही भगवान से इस दिन फसल अच्छी होने की कामना भी की जाती है। इस दिन घर के बुजुर्ग अपने बच्चों को दीर्घायु, बुद्धिमान और निरोगी होने का आशिर्वाद देते हैं।
मान्यता के अनुसार सुख समृद्धि और हरियाली का प्रतीक हरेला सात प्रकार के अंकुरित बीजों की पौंध होती है हरेला पर्व से 11 दिन पूर्व धान गेहूं मक्का जों सरसों सहित पांच से सात प्रकार के अनाज के बीच को एक टोकरी में बोया जाता है, हरेला पर्व को लेकर लोगों में खासा उत्साह बना रहता है, लोगों ने हरेले के एक दिन पूर्व घरों में रात को हरेला की विधि विधान से गुड़ाई बुराई की। परंपरा के अनुसार परिवार का मुखिया हरेले को काटता है और सिरो धारण करते समय बुजुर्ग लोग अपने बच्चे को जीरिया जगीरिया सहित सुख समृद्धि और खुशहाली का आशीर्वाद देते हैं, इसके साथ ही मंदिर में पहुंचकर लोग अपने आराध्य देवी-देवताओं को हरेला चलाते हैं वहीं लोगों का कहना है कि हरेला पर्व समृद्धि और शौहार्द का त्यौहार है। हरेले का त्यौहार श्रावण मास के पहले गते को मनाया जाता है। मान्यता है कि किसानो के लिए यह त्यौहार समृधि और खुशहाली ले के आता है। कहा जाता है कि जिस साल हरेला अच्छा होता है तो उस साल फसल के अच्छे होने की उम्मीद करते हैं। बुजुर्गों द्वारा बच्चांे को हरेला पूजा जाता है।