श्रमिकों के लिए 'कवच' बनी सरकार:40 पार कामगारों की अब हर साल होगी मुफ्त स्वास्थ्य जांच, 'जननी' पोर्टल से मां-बच्चे की सुरक्षा भी हुई डिजिटल
नई दिल्ली। देश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ कहे जाने वाले करोड़ों श्रमिकों के लिए केंद्र सरकार ने खुशियों की बड़ी सौगात दी है। अब 40 वर्ष और उससे अधिक आयु के सभी कामगारों की हर साल पूर्ण स्वास्थ्य जांच बिल्कुल मुफ्त की जाएगी। केंद्रीय श्रम एवं रोजगार मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया ने गुरुवार को दिल्ली के बसई दारापुर स्थित ईएसआईसी मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल से इस ऐतिहासिक राष्ट्रव्यापी अभियान का बिगुल फूंका। इस पहल का उद्देश्य न केवल श्रमिकों को बीमारियों से बचाना है, बल्कि उनके जीवन स्तर में सुधार कर उन्हें सामाजिक सुरक्षा के दायरे में मजबूती से खड़ा करना है।
देश के करोड़ों श्रमिकों के लिए केंद्र सरकार ने एक बड़ी स्वास्थ्य सुरक्षा योजना की शुरुआत की है। अब 40 वर्ष और उससे अधिक आयु के सभी श्रमिकों की हर साल मुफ्त स्वास्थ्य जांच कराई जाएगी। केंद्रीय श्रम एवं रोजगार मंत्री मनसुख मांडविया ने गुरुवार को दिल्ली के बसई दारापुर स्थित ईएसआईसी मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल से इस राष्ट्रव्यापी अभियान का शुभारंभ किया। सरकार का मानना है कि समय रहते बीमारी का पता लगने से न केवल श्रमिकों का स्वास्थ्य बेहतर होगा, बल्कि गंभीर रोगों से होने वाली आर्थिक और सामाजिक परेशानियों को भी कम किया जा सकेगा। इस नई पहल के तहत श्रमिकों की नियमित स्वास्थ्य जांच की जाएगी और यदि किसी बीमारी की पहचान होती है तो उसका इलाज तथा आवश्यक दवाएं ईएसआईसी के माध्यम से पूरी तरह मुफ्त उपलब्ध कराई जाएंगी। सरकार का फोकस विशेष रूप से मधुमेह, उच्च रक्तचाप, हृदय रोग, फेफड़ों से जुड़ी समस्याएं और अन्य गंभीर बीमारियों की शुरुआती पहचान पर रहेगा। विशेषज्ञों का मानना है कि 40 वर्ष की आयु के बाद कई बीमारियों का खतरा तेजी से बढ़ता है, ऐसे में वार्षिक हेल्थ चेकअप श्रमिकों के लिए जीवनरक्षक साबित हो सकता है। कार्यक्रम के दौरान केंद्रीय मंत्री ने कहा कि स्वस्थ श्रमिक ही मजबूत राष्ट्र की नींव होते हैं। उन्होंने कहा कि देश के श्रमबल को सामाजिक सुरक्षा और स्वास्थ्य सुविधाएं देना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है। डॉ. मांडविया ने बताया कि पिछले दस वर्षों में देश में सामाजिक सुरक्षा का दायरा तेजी से बढ़ा है। वर्ष 2014 में जहां केवल 19 प्रतिशत आबादी सामाजिक सुरक्षा के दायरे में थी, वहीं अब यह बढ़कर 64 प्रतिशत तक पहुंच गई है। इसी अवधि में लाभार्थियों की संख्या 30 करोड़ से बढ़कर लगभग 94 करोड़ तक पहुंच गई है। उन्होंने यह भी बताया कि कर्मचारी राज्य बीमा निगम यानी ईएसआईसी के अंतर्गत आने वाले लोगों की संख्या भी दोगुनी से अधिक हो गई है। पहले जहां करीब 7 करोड़ लोग ईएसआईसी से जुड़े थे, वहीं अब यह आंकड़ा बढ़कर लगभग 15 करोड़ तक पहुंच चुका है। सरकार का लक्ष्य आने वाले समय में अधिक से अधिक असंगठित और संगठित क्षेत्र के श्रमिकों को सामाजिक सुरक्षा के दायरे में लाना है।
केंद्रीय मंत्री ने श्रमिकों से जुड़े चार नए श्रम संहिताओं के तहत किए गए सुधारों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि अब पुरुष और महिला श्रमिकों को समान वेतन का अधिकार सुनिश्चित किया गया है। महिलाओं के लिए मातृत्व अवकाश को 12 सप्ताह से बढ़ाकर 26 सप्ताह किया गया है। साथ ही घर से काम करने जैसे आधुनिक प्रावधान भी श्रम कानूनों में शामिल किए गए हैं, जिससे महिलाओं और कर्मचारियों को अधिक सुविधा मिल सके। इसी बीच केंद्र सरकार ने मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत बनाने की दिशा में भी एक बड़ा कदम उठाया है। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने “जननी” नामक डिजिटल प्लेटफॉर्म लॉन्च किया है। यह प्लेटफॉर्म गर्भवती महिलाओं और नवजात शिशुओं की स्वास्थ्य सेवाओं की निगरानी और रिकॉर्ड प्रबंधन को पूरी तरह डिजिटल बनाएगा। “जननी” का पूरा नाम “जर्नी ऑफ एंटेनाटल, नेटल एंड नियोनेटल इंटीग्रेटेड केयर” है। यह महिलाओं के प्रजनन वर्षों के दौरान उनके स्वास्थ्य रिकॉर्ड को सुरक्षित रखेगा और प्रसव पूर्व देखभाल, संस्थागत प्रसव, नवजात शिशु देखभाल तथा परिवार नियोजन जैसी सेवाओं की निरंतर ट्रैकिंग करेगा। सरकार की इन दोनों पहलों को देश के स्वास्थ्य ढांचे को मजबूत करने और श्रमिकों व महिलाओं को बेहतर सामाजिक सुरक्षा प्रदान करने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन हुआ तो आने वाले वर्षों में देश में स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच और गुणवत्ता दोनों में बड़ा सुधार देखने को मिल सकता है।