बड़ी खबरः अमेरिका-ईरान शांति समझौते पर इस्राइल की खुली बगावत! बेन गवीर बोले- ट्रंप की डील हम पर लागू नहीं, हिजबुल्ला को लेकर दी कड़ी सैन्य कार्रवाई की चेतावनी

Breaking News: Israel openly defies the US-Iran peace deal! Ben-Gvir declares that Trump's deal does not apply to Israel and warns of stern military action regarding Hezbollah.

नई दिल्ली। मध्य-पूर्व में शांति स्थापित करने की दिशा में अमेरिका और ईरान के बीच हुए प्रारंभिक समझौते को उस समय बड़ा झटका लगा जब इस्राइल ने पहली बार खुलकर इस पर अपनी असहमति जता दी। इस्राइल के राष्ट्रीय सुरक्षा मंत्री इतामार बेन-गवीर ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की मध्यस्थता में तैयार हुआ यह समझौता इस्राइल पर किसी भी रूप में लागू नहीं होता और न ही उसका देश इससे बंधा हुआ है। बेन-गवीर का यह बयान ऐसे समय सामने आया है जब अमेरिका और ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य को दोबारा खोलने तथा क्षेत्र में बढ़ते सैन्य तनाव को कम करने के उद्देश्य से एक प्रारंभिक समझौते की घोषणा की है। इस समझौते को पश्चिम एशिया में स्थिरता की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा था, लेकिन इस्राइल की तीखी प्रतिक्रिया ने पूरे घटनाक्रम को नया मोड़ दे दिया है। सोशल मीडिया पर जारी अपने आधिकारिक बयान में बेन.गवीर ने कहा कि इस्राइल एक स्वतंत्र और संप्रभु राष्ट्र है और उसकी राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े निर्णय किसी बाहरी शक्ति या अंतरराष्ट्रीय समझौते से निर्धारित नहीं होंगे। उन्होंने कहा कि इस्राइल अमेरिका का सम्मान करता है और राष्ट्रपति ट्रंप के प्रयासों की सराहना करता है, लेकिन राष्ट्रीय सुरक्षा के मामलों में अंतिम निर्णय केवल इस्राइल की सरकार और सुरक्षा एजेंसियां ही लेंगी। उनके अनुसार, किसी भी समझौते से ऊपर इस्राइली नागरिकों की सुरक्षा और देश की रक्षा है। बेन-गवीर ने यह भी कहा कि अतीत में कई बार अंतरराष्ट्रीय दबाव के आगे झुकने की कीमत इस्राइल को चुकानी पड़ी है, इसलिए अब ऐसी गलतियों की पुनरावृत्ति नहीं की जाएगी।

हिजबुल्ला पर सख्त रुख
राष्ट्रीय सुरक्षा मंत्री ने अपने बयान में विशेष रूप से लेबनान स्थित ईरान समर्थित संगठन हिजबुल्ला का उल्लेख करते हुए कहा कि इस्राइल किसी भी ऐसी व्यवस्था को स्वीकार नहीं करेगा जो उसकी सैन्य कार्रवाई की स्वतंत्रता को सीमित करे। उन्होंने कहा कि उत्तरी सीमा पर स्थायी शांति तभी संभव है जब हिजबुल्ला की सैन्य क्षमताओं को पूरी तरह निष्क्रिय किया जाए। उनके अनुसार, यह संगठन इस्राइल की सुरक्षा के लिए सबसे बड़े खतरों में से एक बना हुआ है। बेन-गवीर ने स्पष्ट किया कि इस्राइली सेना द्वारा सुरक्षा कारणों से नियंत्रित किए गए क्षेत्रों से पीछे हटने का कोई प्रश्न ही नहीं उठता। उन्होंने कहा कि उत्तरी सीमा पर फिर से ऐसी स्थिति बनने नहीं दी जाएगी, जिसमें हिजबुल्ला के लड़ाके इस्राइली बस्तियों के नजदीक सक्रिय हो सकें।

ड्रोन या मिसाइल हमला हुआ तो मिलेगा करारा जवाब
इस्राइली मंत्री ने लेबनान को अप्रत्यक्ष चेतावनी देते हुए कहा कि यदि सीमा पार से किसी भी प्रकार का ड्रोन, यूएवी या मिसाइल हमला किया जाता है तो उसका जवाब तुरंत और बेहद कठोर सैन्य कार्रवाई से दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि हाल के महीनों में इस्राइल ने जो प्रतिरोधक संतुलन स्थापित किया है, उसे किसी भी परिस्थिति में कमजोर नहीं होने दिया जाएगा। बेन.गवीर का मानना है कि आक्रामक और निर्णायक सैन्य प्रतिक्रिया ही भविष्य में होने वाले हमलों को रोकने का सबसे प्रभावी माध्यम है।

पूरी दुनिया की नजर मध्य-पूर्व पर
पश्चिम एशिया पहले से ही कई जटिल संघर्षों और राजनीतिक प्रतिस्पर्धाओं का केंद्र बना हुआ है। ऐसे में अमेरिका-ईरान समझौते और इस्राइल के कड़े रुख के बीच आने वाले दिनों में क्षेत्रीय कूटनीति नई दिशा ले सकती है। फिलहाल इस्राइल ने साफ संकेत दे दिया है कि वह केवल उसी समझौते का समर्थन करेगा, जिससे उसकी सुरक्षा मजबूत हो और उसके रणनीतिक हित सुरक्षित रहें। ऐसे में मध्य-पूर्व की बदलती परिस्थितियों पर अब पूरी दुनिया की नजर टिकी हुई है।