12 साल की सनसनी का 'गोल्डन क्लीन स्वीप': टेबल टेनिस में चमकीं देवभूमि की बेटियां,कायरा भंडारी ने राज्य स्तरीय प्रतियोगिता में जीते 4 स्वर्ण
उत्तराखंड की धरती ने एक बार फिर खेल जगत को एक असाधारण प्रतिभा से परिचित कराया है। महज 12 वर्ष की टेबल टेनिस खिलाड़ी कायरा भंडारी ने अपनी अद्भुत खेल शैली, आक्रामक तकनीक और मानसिक दृढ़ता के दम पर राज्य टेबल टेनिस के इतिहास में एक नया अध्याय लिख दिया है। पौड़ी गढ़वाल के शहीद राइफलमैन जसवंत सिंह महावीर चक्र स्टेडियम में हाल ही में आयोजित '2nd उत्तराखंड स्टेट रैंकिंग टेबल टेनिस टूर्नामेंट' में कायरा ने वह कारनामा कर दिखाया, जो किसी भी खिलाड़ी के लिए एक सपना होता है। उन्होंने प्रतियोगिता के चारों प्रमुख वर्गों में स्वर्ण पदक जीतकर न केवल क्लीन स्वीप किया,बल्कि यह साबित कर दिया कि प्रतिभा उम्र की मोहताज नहीं होती।
उम्र महज 12 साल, लेकिन हौसला और खेल का स्तर सीनियर खिलाड़ियों को चुनौती देने वाला। उत्तराखंड की युवा टेबल टेनिस खिलाड़ी कायरा भंडारी ने पौड़ी में आयोजित दूसरी उत्तराखंड स्टेट रैंकिंग टेबल टेनिस प्रतियोगिता में ऐसा प्रदर्शन किया कि खेल जगत का ध्यान उनकी ओर खिंच गया। कायरा ने एक ही प्रतियोगिता में अंडर-15, अंडर-17, अंडर-19 और सीनियर महिला वर्ग की सिंगल्स स्पर्धाओं में स्वर्ण पदक जीतकर चारों वर्गों में क्लीन स्वीप किया। शहीद राइफलमैन जसवंत सिंह महावीर चक्र स्टेडियम में छह से नौ सितंबर तक आयोजित प्रतियोगिता में प्रदेशभर के करीब 200 खिलाड़ियों ने हिस्सा लिया। अलग-अलग आयु वर्गों में अपनी उम्र से बड़े खिलाड़ियों के बीच मुकाबला करने उतरी कायरा ने पूरे टूर्नामेंट में अपने प्रदर्शन की निरंतरता बनाए रखी और चारों वर्गों के फाइनल जीतकर स्वर्ण पदक अपने नाम किए। खास बात यह रही कि सीनियर महिला वर्ग में यह कायरा का पहला खिताब है। दाएं हाथ से खेलने वाली कायरा की पहचान आक्रामक खेल शैली वाली खिलाड़ी के रूप में बन रही है। तेज रफ्तार शॉट्स, लगातार दबाव बनाने की क्षमता और गेंद पर मजबूत फोकस उनकी खेल शैली की प्रमुख विशेषताएं हैं। यही कारण है कि वह अपनी उम्र से बड़े खिलाड़ियों के साथ भी लगातार मुकाबले कर रही हैं। अंडर-15 से लेकर अंडर-19 और महिला वर्ग तक खेलने से कायरा को अलग-अलग स्तर के खिलाड़ियों के खिलाफ अनुभव मिल रहा है। सीनियर खिलाड़ियों के सामने मुकाबला करना उनके लिए तकनीक और मानसिक मजबूती को परखने का अवसर भी बन रहा है। कायरा का टेबल टेनिस से जुड़ने का सफर वर्ष 2021 में कोविड काल के दौरान शुरू हुआ। शुरुआत सामान्य तौर पर हुई, लेकिन धीरे-धीरे खेल के प्रति उनकी रुचि बढ़ती गई। नियमित अभ्यास और खेल के प्रति गंभीरता ने उन्हें प्रतियोगिताओं की ओर बढ़ाया। वर्ष 2023 से उन्होंने जिला, राज्य और राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं में गंभीरता से भाग लेना शुरू किया। इसके बाद कायरा ने विभिन्न आयु वर्गों में लगातार बेहतर प्रदर्शन किया। राष्ट्रीय स्तर पर उत्तराखंड का प्रतिनिधित्व करते हुए उन्होंने अंडर-13 वर्ग में भारत की नंबर-34 रैंकिंग तक का सफर तय किया। इसके साथ ही अंडर-15, अंडर-17 और अंडर-19 वर्गों में भी राष्ट्रीय स्तर पर प्रतिस्पर्धा कर रही हैं। कायरा की मेहनत का असर उनकी राज्य रैंकिंग में भी दिखाई दिया। वर्ष 2025 में वह अंडर-13 में दूसरे, अंडर-15 में पहले, अंडर-17 में तीसरे, अंडर-19 में पहले और महिला वर्ग में दूसरे स्थान पर थीं। वर्ष 2026 में उन्होंने इन सभी वर्गों में नंबर-1 रैंकिंग हासिल कर ली। वर्ष 2026 कायरा के करियर के लिए एक और महत्वपूर्ण पड़ाव लेकर आया। उन्होंने ताशकंद, उज्बेकिस्तान और अल्माटी, कजाकिस्तान में आयोजित डब्लूटीटी यूथ कंटेंडर प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पदार्पण किया। इन प्रतियोगिताओं में उन्हें विभिन्न देशों के युवा खिलाड़ियों के खिलाफ खेलने का अनुभव मिला। कायरा का मूल घर देहरादून है और उनके पिता का परिवार टिहरी गढ़वाल के कीर्तिनगर क्षेत्र से जुड़ा है। फिलहाल उनकी ट्रेनिंग लखनऊ स्थित अकादमी में कोच पराग अग्रवाल के मार्गदर्शन में हो रही है। उनकी मां भी बेटी की ट्रेनिंग के लिए देहरादून से लखनऊ जाकर उनके साथ रहती हैं। कायरा भंडारी ने अपनी सफलता का श्रेय कोच पराग अग्रवाल की मेहनत को दिया। उन्होंने कहा, “ये सारी सफलताएं मेरे कोच पराग अग्रवाल की मेरे साथ की गई मेहनत का नतीजा हैं। मैं लगातार अपने खेल पर फोकस कर रही हूं। आगे के लिए मैंने कुछ गोल निर्धारित किए हैं, उन्हें अचीव करने का प्रयास करूंगी। कायरा के कोच पराग अग्रवाल, जो भारतीय टेबल टेनिस टीम के कोच भी हैं, उनकी प्रतिभा को लेकर आश्वस्त हैं। उनका कहना है कि पौड़ी में चार वर्गों में स्वर्ण पदक जीतना बड़ी उपलब्धि है। उन्होंने बताया कि लक्ष्य उत्तराखंड की सभी टीमों में शीर्ष पर रहने का था और इस प्रयास में सफलता मिली। उनके अनुसार कायरा ने उज्बेकिस्तान और कजाकिस्तान की अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भी अच्छा प्रदर्शन किया है और फिलहाल उनका पूरा ध्यान आगे की प्रतियोगिताओं के लिए कड़ी तैयारी पर है। पौड़ी में चार स्वर्ण पदकों की यह उपलब्धि कायरा के बढ़ते खेल सफर में एक अहम पड़ाव है। 12 साल की उम्र में राष्ट्रीय रैंकिंग से लेकर अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं तक पहुंच चुकी कायरा अब अपने प्रदर्शन को लगातार बेहतर बनाने के लक्ष्य के साथ आगे बढ़ रही हैं।