ऑपरेशन सिंदूर की पहली वर्षगांठ: सोशल मीडिया पर उमड़ा गर्व का सैलाब, पीएम मोदी और मंत्रियों ने बदली प्रोफाइल पिक्चर
नई दिल्ली। आज पूरा देश 'ऑपरेशन सिंदूर' की पहली वर्षगांठ मना रहा है। यह वही दिन है जब भारतीय सेना ने सीमा पार जाकर दुश्मनों के कलेजे को छलनी किया था। इस ऐतिहासिक मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी समेत केंद्र सरकार के दिग्गज मंत्रियों ने अपनी सोशल मीडिया प्रोफाइल पिक्चर बदलकर देश के जांबाज जवानों के शौर्य और बलिदान को भावभीनी श्रद्धांजलि दी। प्रधानमंत्री मोदी ने सुबह ही एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर अपनी प्रोफाइल तस्वीर बदली, जिसमें ऑपरेशन सिंदूर की एक गौरवमयी झलक दिखाई दे रही है। पीएम के इस कदम के तुरंत बाद विदेश मंत्री एस. जयशंकर, वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण और पीयूष गोयल जैसे वरिष्ठ मंत्रियों ने भी अपनी प्रोफाइल बदलकर राष्ट्र के संकल्प को दोहराया। रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यह केवल एक तस्वीर नहीं, बल्कि पाकिस्तान को यह याद दिलाने का तरीका है कि भारत अब चुप बैठने वाला देश नहीं है।
भारतीय सेना ने आज एक विशेष वीडियो जारी कर दुनिया को बताया कि कैसे 6-7 मई 2025 की उस रात ने इतिहास बदल दिया। सेना ने अपनी पोस्ट में लिखा-"न्याय किया गया। जय हिंद।" चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ मुख्यालय ने इस ऑपरेशन को 'राष्ट्रीय संकल्प का प्रतीक' करार दिया। वीडियो में उन पलों को दिखाया गया है जब हमारी वायुसेना और विशेष दस्तों ने पीओके और पाकिस्तान के भीतर मौजूद आतंकी लॉन्च पैड्स पर सटीक स्ट्राइक की थी। यह कार्रवाई 22 अप्रैल 2025 को पहलगाम में हुए उस बर्बर आतंकी हमले का जवाब थी, जिसने पूरे देश को झकझोर दिया था। लश्कर-ए-तैयबा के मुखौटा संगठन 'द रेजिस्टेंस फ्रंट' के आतंकियों ने धर्म पूछकर 26 निर्दोष लोगों की हत्या कर दी थी। आतंकियों ने क्रूरता की सारी हदें पार करते हुए पर्यटकों को कलमा पढ़ने पर मजबूर किया था। उस हमले में कई नवविवाहित जोड़े और एक बहादुर स्थानीय पोनी ऑपरेटर शहीद हुए थे। वर्षगांठ पर जारी वीडियो में प्रधानमंत्री मोदी का वह कड़ा संदेश फिर से गूंजा, जिसने कूटनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी थी। पीएम ने स्पष्ट शब्दों में कहा था। "आतंक और बातचीत साथ-साथ नहीं चल सकते। आतंक और व्यापार एक साथ नहीं हो सकते। पानी और खून एक साथ नहीं बह सकते।'ऑपरेशन सिंदूर' को एक 'सीमित और गैर-उत्तेजक' लेकिन अत्यंत घातक सैन्य अभियान माना गया। इसने पाकिस्तान के आतंकी ढांचे को तो ध्वस्त किया ही, साथ ही वैश्विक स्तर पर भारत की 'जीरो टॉलरेंस' नीति को भी स्थापित कर दिया। अधिकारियों के मुताबिक, यह ऑपरेशन भारतीय सैन्य रणनीतिक क्षमता का सबसे बड़ा प्रदर्शन था, जिसने साबित किया कि भारत अपने नागरिकों की सुरक्षा के लिए किसी भी हद तक जा सकता है। आज जब देश इस पराक्रम की पहली वर्षगांठ मना रहा है, तो संदेश साफ है-भारत शांति का पक्षधर है, लेकिन कायरता उसे स्वीकार नहीं।