Aug 29, 2026 Login

न्याय की लड़ाई: मासूम से दुष्कर्म, हत्या और 11 साल का इंतजार! सुप्रीम कोर्ट से बरी हुआ आरोपी तो उत्तराखण्ड के पिथौरागढ़ में भड़का आक्रोश, सड़कों पर उतरे लोग

Fight for justice: Rape of an innocent, murder and 11 years of waiting! When the accused was acquitted by the Supreme Court, anger erupted in Pithoragarh of Uttarakhand, people took to the streets

पिथौरागढ़। सीमांत पिथौरागढ़ जिले की 7 साल की मासूम के साथ दुष्कर्म और हत्या के मामले में मुख्य आरोपी के सुप्रीम कोर्ट से बरी होने पर पूरे इलाके में गहरा आक्रोश फैल गया है। 11 सालों से न्याय की आस लगाए बैठे मासूम के परिजनों को यह फैसला एक गहरा सदमा पहुंचा है, जिसने उनकी जिंदगी की उम्मीदों को चूर-चूर कर दिया। इस फैसले के बाद परिजनों के साथ-साथ आम जनता भी सड़कों पर उतर आई है, और आज न्याय की मांग को लेकर जन सैलाब उमड़ पड़ा, जो इस बात का प्रमाण है कि समाज अभी भी संवेदनशील है और अन्याय के खिलाफ एकजुट हो सकता है।

पिथौरागढ़ जिला मुख्यालय में आक्रोश की लहर दौड़ गई है। मासूम को न्याय दिलाने के लिए नगर की जनता सड़कों पर उतर आई। मातृशक्ति, विद्यालयों के बच्चे और आम लोग रामलीला मैदान में एकत्रित हुए, जहां 'दोषी कौन, मासूम को न्याय दो' जैसे नारे गूंजते रहे। प्रदेश सरकार की कमजोर पैरवी पर लोगों का रोष साफ नजर आया, जो यह सवाल उठाता है कि क्या न्याय व्यवस्था में कमजोर तबकों की आवाज सुनी जा रही है।

मासूम के परिजनों ने प्रेस वार्ता में अपनी पीड़ा व्यक्त की। उन्होंने कहा कि मामले की सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई और फैसला आ गया, लेकिन उन्हें इसकी भनक तक नहीं लगी। प्रदेश सरकार पर कमजोर पैरवी का आरोप लगाते हुए उन्होंने बताया कि पॉक्सो कोर्ट और हाईकोर्ट में दोष सिद्ध होने के बावजूद सुप्रीम कोर्ट से न्याय नहीं मिला। यह स्थिति दिल दहला देने वाली है, जहां एक मासूम की चीखें अदालतों के गलियारों में गुम हो गईं।

पीड़ित परिवार ने गहरी भावुकता के साथ कहा कि 'बेटी बचाओ' के नारे अब खोखले लगते हैं। उन्होंने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से मांग की कि फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में रिव्यू पिटीशन दाखिल की जाए और आरोपियों को कठोरतम सजा दिलाई जाए। परिजनों की सिर्फ एक मांग है - बेटी के गुनहगारों को फांसी की सजा दी जाए। उनकी आंखों में दर्द और निराशा साफ झलक रही है, जो हर माता-पिता के दिल को छू लेती है।

इस मामले पर विभिन्न संगठनों ने भी अपना आक्रोश जताया है। परिजनों ने जिलाधिकारी कार्यालय पहुंचकर राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन भेजने की बात कही। पूरे सीमांत जिले पिथौरागढ़ में जनता के भीतर गुस्सा व्याप्त है। विभिन्न संगठनों ने प्रदेश सरकार की कड़ी निंदा की और पिथौरागढ़ नगर में मौन विरोध जताया। सिमलगैर बाजार में सीमांत यूथ मोर्चा, उत्तराखंड छात्र मोर्चा और नगर यूथ कमेटी के युवाओं ने कहा कि मासूम को जब तक इंसाफ नहीं मिलेगा, तब तक चैन से नहीं बैठेंगे। उन्होंने राज्य सरकार से ठोस कदम उठाने की अपील की। रामलीला ग्राउंड में विभिन्न समाजसेवी संगठन एकत्रित हुए और संकल्प लिया कि मासूम को न्याय दिलाने की हर कोशिश की जाएगी। यह एकजुटता समाज की उस भावना को दर्शाती है जो अन्याय के खिलाफ लड़ने का हौसला देती है।

बता दें कि 20 नवंबर 2014 को पिथौरागढ़ की रहने वाली 7 साल की मासूम अपने परिवार के साथ हल्द्वानी के शीशमहल स्थित रामलीला ग्राउंड में एक शादी समारोह में आई थी। समारोह के दौरान वह अचानक लापता हो गई। काफी तलाश के बावजूद उसका पता नहीं चला। लापता होने के 6 दिन बाद उसका शव गौला नदी से बरामद हुआ। पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में पुष्टि हुई कि बच्ची के साथ दुष्कर्म (गैंगरेप) किया गया था, उसके बाद उसकी हत्या कर दी गई। इस घटना ने पूरे समाज को झकझोर दिया था। लोगों में भारी गुस्सा भड़का और सड़कों पर विरोध प्रदर्शन हुए। तत्कालीन मुख्यमंत्री हरीश रावत के काफिले पर भी गुस्साई भीड़ ने हमला किया। पूरे प्रदेश में बड़ा आंदोलन चला।

पुलिस ने जांच के लिए कई राज्यों में तलाशी अभियान चलाया। घटना के 8 दिन बाद मुख्य आरोपी अख्तर अली को चंडीगढ़ से गिरफ्तार किया गया। उसकी निशानदेही पर दो अन्य आरोपी प्रेमपाल और जूनियर मसीह को पकड़ा गया। मार्च 2016 में हल्द्वानी की एडीजे स्पेशल कोर्ट ने अख्तर अली को गैंगरेप और हत्या का दोषी ठहराते हुए फांसी की सजा सुनाई। प्रेमपाल को पांच साल की सजा दी गई। अक्टूबर 2019 में नैनीताल हाईकोर्ट ने इस फैसले को बरकरार रखा। लेकिन अब सुप्रीम कोर्ट से आरोपी को बरी कर दिया गया है, जिसके बाद लोगों में आक्रोश है। उनका कहना है कि मामले में पैरवी ठीक से नहीं की गई, जिससे आरोपी बरी हो गए। यह घटना न्याय व्यवस्था पर सवाल उठाती है और हमें सोचने पर मजबूर करती है कि क्या मासूमों की रक्षा के लिए पर्याप्त कदम उठाए जा रहे हैं।

आज मासूम प्रकरण पर बीजेपी का शिष्टमंडल परिजनों से मिलने पिथौरागढ़ उनके आवास पर पहुंचा। इस दौरान मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने दूरभाष पर मासूम के पिता से वार्ता की और आश्वस्त किया कि राज्य सरकार पूरी तरह उनके साथ खड़ी है। सीएम धामी ने बताया कि इस प्रकरण पर न्याय विभाग और सीनियर वकीलों से विधिक राय लेते हुए मुख्यमंत्री आवास पर विस्तृत चर्चा की जाएगी। फिर राज्य सरकार सुप्रीम कोर्ट में पुनर्विचार याचिका दायर करने के लिए हरसंभव प्रयास करेगी। यह कदम परिजनों को कुछ राहत दे सकता है, लेकिन सवाल यह है कि क्या देर हो चुकी है? समाज को अब एकजुट होकर ऐसी घटनाओं के खिलाफ आवाज उठानी होगी, ताकि कोई और मासूम ऐसी त्रासदी का शिकार न बने।