उत्तराखंड राज्य गठन के 21 सालो बाद भी नही सुलझा उत्तरप्रदेश और उत्तराखंड के बीच परिसंपत्तियों के बंटवारे का मामला,टिहरी डैम पर आज भी है यूपी का मालिकाना हक,
उत्तराखंड के सीएम पुष्कर सिंह धामी मुख्यमंत्री बनने के बाद पहली बार उत्तरप्रदेश के दौरे पर है । उत्तराखंड में अगले वर्ष विधानसभा चुनाव होने है ऐसे में सीएम धामी का ये दौरा उत्तराखंड के लिए काफ़ी अहम माना जा रहा है। उत्तराखंड राज्य को बने 21 साल हो चुके है लेकिन आज भी दोनों राज्यो के बीच बंटवारे को लेकर मसला हल नही पाया है। इन मसलों पर कई बार पहले भी तमाम मीटिंग्स हुई है ,21 सालो में दोनों ही राज्यो के मुख्यमंत्रियों ने परिसंपत्तियों के बंटवारे को लेकर कई बैठके भी की लेकिन नतीजा वही ढाक के तीन पात ही रहा। सीएम धामी के इस दौरे से अब इन मसलों पर उम्मीद की किरण दिखाई दे रही है,क्योंकि सीएम धामी के इस पूरे दौरे में सबसे अहम परिसंपत्तियों के विवाद को सुलझाना ही है।
क्या है परिसंपत्तियों का 21 साल पुराना विवाद?
दरअसल जब 9 नवंबर सन 2000 को उत्तराखंड एक पृथक राज्य के रूप में स्थापित किया गया तब दोनों राज्यो में बंटवारा हो गया। उत्तरप्रदेश से उत्तराखंड को अलग किया तो जाहिर है दोनों राज्यो के बीच जिलों,ज़मीन,इमारतों, इत्यादि का भी बंटवारा हुआ। इनमें से कई बंटवारे आज तक नही हुए। मसलन उत्तराखंड सिंचाई विभाग की करीब 5500 से 13000 हैक्टेयर ज़मीन और करीब 4 हज़ार इमारतों के बंटवारे का विवाद आज भी अनसुलझा है,इन पर पिछले 21 सालो से उत्तरप्रदेश का ही कब्जा है जबकि इनका बंटवारा तभी हो जाना चाहिए था जब उत्तराखंड अलग राज्य बना। इसके अलावा उत्तराखंड परिवहन विभाग की करीब 5 हज़ार करोड़ रुपए की सम्पत्ति,कांवड़ मेले का भूमि विवाद,हरिद्वार कुम्भ भूमि,आज भी विवादों में घिरे है इनका बंटवारा भी नही हुआ।
आपको जानकर आश्चर्य ही होगा कि उत्तराखंड की कई संपत्तियों पर आज भी उत्तरप्रदेश का मालिकाना हक है जिसका रेवेन्यू भी उत्तरप्रदेश को ही मिलता है।जिनमे टिहरी डैम भी शामिल है। उत्तराखंड को आज भी नहरों, जलाशयों पर हक नही मिल पाया है,जिसकी वजह से उत्तराखंड में जल संसाधन होते हुए भी राज्य उनसे वंचित है। टिहरी डैम की ही तरह रामगंगा जलविद्युत परियोजना में पॉवर हाउस उत्तराखंड का है लेकिन उसे चलाने वाला बांध उत्तरप्रदेश के हक में है। जिला उधमसिंह नगर और हरिद्वार की प्रमुख नहरें भी उत्तरप्रदेश के मालिकाना हक में है। ऐसे ही कई विभागो की भूमि पर आज भी उत्तरप्रदेश का ही हक है जिससे उत्तरप्रदेश को करोड़ो का राजस्व प्राप्त होता है जो उत्तराखंड सरकार को मिलना चाहिए और वो राजस्व उत्तराखंड की जनता के हितों में काम आना चाहिए।
ये सब इसीलिए होता आया क्योंकि उत्तर प्रदेश पुनर्गठन एक्ट में उत्तराखंड विरोधी प्रावधान किए गए,जिसके तहत उत्तराखंड को उसकी जायज संपत्तियां ना मिल सकी,इसके लिए उत्तर प्रदेश पुनर्गठन एक्ट की धारा 79 और 80 में ऐसा प्रावधान किया गया। ये एक्ट साल 2000 में लागू किया गया था। जब तक उत्तरप्रदेश राज्य पुनर्गठन अधिनियम के धारा 79,80,81,और 82 रहेंगी तब तक परिसंपत्तियों का विवाद सुलझना मुश्किल है।
बहरहाल परिसंपत्तियों के बंटवारे को लेकर उत्तराखंड के सीएम धामी की उत्तरप्रदेश के सीएम योगी आदित्यनाथ से मुलाकात पर तमाम मीडिया वालों को नज़रें टिकी है।