वक्त से पहले परीक्षा: यूपी-उत्तराखंड समेत 5 राज्यों में नवंबर-दिसंबर में ही हो सकते हैं विधानसभा चुनाव! निर्वाचन आयोग की हरी झंडी का इंतजार
नई दिल्ली। देश की राजनीति को लेकर इस वक्त की सबसे बड़ी खबर सामने आ रही है। उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, पंजाब, गोवा और मणिपुर सहित देश के पांच महत्वपूर्ण राज्यों में विधानसभा चुनाव अपने निर्धारित समय से पहले, इसी वर्ष नवंबर-दिसंबर में कराए जा सकते हैं। राजनीतिक और प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार, केंद्र सरकार इस बड़े विकल्प पर बेहद गंभीरता से विचार कर रही है।
सामान्य परिस्थितियों में इन राज्यों में विधानसभा चुनाव अगले वर्ष फरवरी-मार्च के दौरान होने प्रत्सावित थे। लेकिन अगले वर्ष फरवरी में होने वाले राष्ट्रीय जनगणना के दूसरे चरण के काम में कोई बाधा न आए, इसलिए चुनाव कार्यक्रम को आगे खिसकाने (पहले कराने) की तैयारी की जा रही है। हालांकि, इस पर अंतिम मुहर भारत निर्वाचन आयोग की समीक्षा के बाद ही लगेगी, लेकिन इस संभावित फैसले ने देश के सियासी पारे को अचानक बढ़ा दिया है। जनगणना देश की सबसे बड़ी और जटिल प्रशासनिक कवायदों में से एक है। इसमें देश भर के लाखों सरकारी कर्मचारियों, शिक्षकों और अधिकारियों की ड्यूटी लगती है। दूसरी ओर, विधानसभा चुनाव कराने के लिए भी भारी मात्रा में मानव संसाधन, कड़े सुरक्षा इंतजाम और प्रशासनिक तंत्र की आवश्यकता होती है। यदि चुनाव और जनगणना दोनों प्रक्रियाएं अगले साल फरवरी-मार्च में एक साथ होती हैं, तो प्रशासनिक मशीनरी पर अत्यधिक दबाव बढ़ जाएगा। दोनों ही राष्ट्रीय महत्व के काम हैं और दोनों में कोई कोताही नहीं बरती जा सकती। इसी व्यावहारिक संकट से बचने के लिए केंद्र सरकार चाहती है कि इस साल के अंत तक पांचों राज्यों के चुनाव निपट जाएं, ताकि अगले साल की शुरुआत में पूरा प्रशासन केवल जनगणना पर ध्यान केंद्रित कर सके।
चुनावी राज्यों की स्थिति पर एक नज़र
राज्य सामान्य समय संभावित नया समय राजनीतिक महत्व
उत्तर प्रदेश फरवरी-मार्च नवंबर-दिसंबर दिल्ली का रास्ता तय करने वाला देश का सबसे बड़ा सियासी सूबा।
उत्तराखंड फरवरी-मार्च नवंबर-दिसंबर साख की लड़ाई, जहां कांटे की टक्कर की उम्मीद है।
पंजाब फरवरी-मार्च नवंबर-दिसंबर त्रिकोणीय और बहुकोणीय मुकाबले के बीच बेहद संवेदनशील चुनाव।
गोवा फरवरी-मार्च नवंबर-दिसंबर छोटे राज्य में सरकार बनाने के लिए जोड़-तोड़ की बड़ी सियासत।
मणिपुर फरवरी-मार्च नवंबर-दिसंबर पूर्वोत्तर का बेहद महत्वपूर्ण राज्य, जहां रणनीतिक जीत मायने रखती है।
राजनीतिक दृष्टि से इन पांचों राज्यों के चुनाव बेहद संवेदनशील और निर्णायक माने जा रहे हैं। खासकर उत्तर प्रदेश, जो देश की राजनीति की दशा और दिशा तय करता है, वहां का चुनाव राष्ट्रीय राजनीति के भविष्य के लिए लिटमस टेस्ट साबित होगा। इसके अलावा उत्तराखंड, पंजाब, गोवा और मणिपुर में भी स्थानीय और राष्ट्रीय समीकरणों को साधने के लिए सभी दलों ने अपनी पूरी ताकत झोंक रखी है।