दिल्ली का सत्य निकेतन हादसा: छात्रों से भरा 5 मंजिला पीजी भरभराकर गिरा,3 की मौत की खबर,कई लोगों के अभी भी दबे होने की आशंका
नई दिल्ली। देश की राजधानी दिल्ली में साउथ कैंपस से सटे और छात्र-छात्राओं के प्रमुख ठिकाने माने जाने वाले सत्य निकेतन इलाके में रविवार को एक भयावह हादसा हो गया। यहां छात्रों से खचाखच भरी एक 5 मंजिला पीजी (पेइंग गेस्ट) इमारत अचानक ताश के पत्तों की तरह जमींदोज हो गई। इस भीषण हादसे में मलबे में दबने से 3 छात्रों की दर्दनाक मौत हो गई, जबकि कई घायल छात्रों को गंभीर अवस्था में जेपीएन एम्स ट्रॉमा सेंटर में भर्ती कराया गया है। एनडीआरएफ, फायर ब्रिगेड और दिल्ली पुलिस की टीमें युद्धस्तर पर रेस्क्यू ऑपरेशन में जुटी हुई हैं।
दिल्ली के छात्र बहुल इलाके सत्य निकेतन में रविवार को एक दर्दनाक हादसे ने पूरे इलाके को दहला दिया। शिव मंदिर के पास छात्रों के रहने के लिए इस्तेमाल हो रही करीब पांच मंजिला पीजी इमारत अचानक भरभराकर ढह गई। हादसे के समय इमारत के भीतर कई छात्र मौजूद थे। मलबे में दबने से अब तक तीन छात्रों की मौत की सूचना है, जबकि कई लोगों के दबे होने की आशंका के बीच राहत और बचाव अभियान जारी रहा। चार घायलों को जेपीएन एम्स ट्रॉमा सेंटर में भर्ती कराया गया है, जिनमें दो की हालत गंभीर बताई गई है। हादसे की सूचना मिलते ही दिल्ली पुलिस, दमकल विभाग और एनडीआरएफ की टीमें मौके पर पहुंचीं और युद्धस्तर पर बचाव अभियान शुरू किया। मलबे को हटाने के लिए आधुनिक उपकरणों की मदद ली गई। पुलिस के अनुसार अब तक छह लोगों को मलबे से निकालकर अस्पताल पहुंचाया जा चुका है। घटनास्थल के आसपास सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है। दिल्ली पुलिस के मुताबिक प्रारंभिक स्थानीय जांच में सामने आया है कि इमारत करीब 40 से 50 साल पुरानी थी। इसमें बेसमेंट के साथ पांच ऊपरी मंजिलें थीं और इसे पीजी के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा था। पुलिस के अनुसार हादसे के समय बेसमेंट में मरम्मत का काम चल रहा था। इसी बिंदु को हादसे की जांच में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। प्रारंभिक जांच और स्थानीय लोगों के बयानों के आधार पर बेसमेंट में चल रही कथित खुदाई, कमजोर पिलर, बिना अनुमति ढांचे में बदलाव और पुरानी नींव पर अतिरिक्त निर्माण के दबाव जैसे पहलुओं की जांच की जा रही है। हालांकि हादसे की वास्तविक वजह जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी। ढही हुई इमारत के ठीक बगल वाली बिल्डिंग को भी एहतियातन खाली करा लिया गया। अधिकारियों ने वहां ढांचे में दरारें और संभावित खतरे को देखते हुए यह कदम उठाया। आसपास के लोगों और छात्रों को भी सुरक्षित दूरी बनाए रखने की सलाह दी गई। सत्य निकेतन दिल्ली विश्वविद्यालय के साउथ कैंपस से सटा इलाका है। यहां वेंकटेश्वर कॉलेज, आर्यभट्ट कॉलेज, मोतीलाल नेहरू कॉलेज और मैत्रेयी कॉलेज समेत कई शिक्षण संस्थानों के बड़ी संख्या में छात्र पीजी और हॉस्टल में रहते हैं। यही वजह है कि इलाके में हमेशा छात्रों की बड़ी मौजूदगी रहती है। हादसे के बाद छात्रों की सुरक्षा और पीजी में उपलब्ध सुविधाओं को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं। स्थानीय छात्रा आस्था कुमारी ने बताया कि इमारत गिरने के बाद तेज आवाज सुनाई दी और कुछ ही देर में मौके पर एंबुलेंस व बचाव दल पहुंचने लगे। उन्होंने पीजी व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए कहा कि छात्रों की सुरक्षा के लिहाज से पर्याप्त निकास द्वार और अन्य जरूरी सुविधाएं होनी चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि इतने छोटे क्षेत्र में ऊंची इमारतों में बड़ी संख्या में छात्रों को ठहराने की अनुमति और सुरक्षा मानकों की निगरानी किस तरह की जा रही है। पुलिस ने हादसे के संबंध में पीजी संचालक और भवन मालिक के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। पुलिस के अनुसार भवन मालिक आनंद बंसल गुरुग्राम का रहने वाला है और वह अपने भाई के साथ इलाके में कई पीजी संचालित करता है। जांच एजेंसियां अब भवन के निर्माण, स्वीकृत नक्शे, बेसमेंट में चल रहे काम और सुरक्षा मानकों से जुड़े दस्तावेजों की पड़ताल कर रही हैं। हादसे की गंभीरता को देखते हुए दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता मौके पर पहुंचीं। उन्होंने जिलाधिकारी, दिल्ली पुलिस, दमकल विभाग और एनडीआरएफ के अधिकारियों से राहत-बचाव अभियान की जानकारी ली और छात्रों को सुरक्षित निकालने के निर्देश दिए। केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने भी हादसे पर दुख जताया और अपना निर्धारित गोवा दौरा रद्द कर दिया। उन्हें गोवा में भाजपा के नए प्रदेश कार्यालय भवन का उद्घाटन करना था। कांग्रेस नेता दीपेंद्र हुड्डा ने हादसे पर दुख जताते हुए एमसीडी, प्रशासन और दमकल विभाग की जवाबदेही पर सवाल उठाए। उन्होंने इलाके में संचालित पीजी की सुरक्षा व्यवस्था और मानकों की निगरानी को लेकर प्रशासन से जवाब मांगा। सत्य निकेतन हादसे ने राजधानी में छात्रों के लिए संचालित पीजी और पुरानी इमारतों की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब जांच का मुख्य फोकस यह पता लगाने पर है कि आखिर वर्षों पुरानी इमारत अचानक क्यों ढही और क्या बेसमेंट में चल रहे निर्माण या मरम्मत कार्य ने हादसे को जन्म दिया।